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EXPLAINED: फाइजर वैक्सीन को मिली पूर्ण मंजूरी कोरोना के खिलाफ जंग में क्यों है अहम?

पिछले साल दिसंबर महीने में फाइजर वैक्सीन को यूएस एफडीए ने मंजूरी दी थी. ये मंजूरी पाने वाली फाइजर की वैक्सीन पहली थी. फाइल फोटो

पिछले साल दिसंबर महीने में फाइजर वैक्सीन को यूएस एफडीए ने मंजूरी दी थी. ये मंजूरी पाने वाली फाइजर की वैक्सीन पहली थी. फाइल फोटो

Coronavirus Vaccination: जून के आखिर में अमेरिका में हुए सर्वे के मुताबिक टीका ना लगवाने 31 फीसदी लोगों ने कहा था कि वे ...अधिक पढ़ें

    नई दिल्ली. अमेरिका में जुलाई के बाद से कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) को टीकाकरण (Coronavirus Vaccination) ना कराने वाले लोगों की महामारी की संज्ञा दी जा रही है, संक्रमण के फैलाव के लिए वैक्सीन लगवाने में लोगों की आनाकानी (Vaccine Hesitancy) को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. इस साल की शुरुआत में अमेरिका में टीकाकरण की तेज शुरुआत के बाद वैक्सीनेशन के आंकड़े ठहर से गए हैं. ऐसे में टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर ने फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer BioNtech) की mRNA वैक्सीन को औपचारिक मंजूरी (Full Approval) देने का फैसला किया है. अमेरिकी ड्रग रेगुलेटर (USFDA) का मानना है कि इससे टीकाकरण में तेजी आएगी और वैक्सीन को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को भी दूर किया जा सकेगा.

    औपचारिक मंजूरी का मतलब क्या?
    कोरोना संक्रमण के अभी तक जितनी वैक्सीन को मंजूरी मिली है, उनमें ज्यादातर को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली है. महामारी से पहले वैक्सीन के विकास में कई साल का समय लगता था, लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण ने इसे बदल दिया. वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में वैक्सीन विकसित की, ट्रायल किया और रिकॉर्ड समय में रिलीज भी किया. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि वैक्सीन से जुड़ी सुरक्षा और प्रभाविकता पर किसी तरह का समझौता किया गया है. वैक्सीन को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी मिली है, ताकि महामारी के व्याप्त संकट का मुकाबला किया जा सके.

    यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के एक्टिंग कमिश्नर जेनेट वुडकॉक ने कहा, “फाइजर और अन्य वैक्सीन ने एफडीए के कड़े मानकों का पालन किया है, जिसके बाद उन्हें इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी मिली थी. पहली एफडीए मान्यता प्राप्त वैक्सीन के बाजार में आने पर लोगों को विश्वास होगा कि वैक्सीन ने कड़े मानकों का पालन किया है, प्रभावी है और इसके निर्माण में एफडीए के प्रोटोकॉल का पालन किया गया है.”

    वुडकॉक ने कहा कि वैक्सीन को औपचारिक मंजूरी मिलने से टीकाकरण के प्रति लोगों में विश्वास पैदा होगा. उन्होंने कहा कि इससे महामारी को थामने में और मदद मिलेगी. बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन लगातार अपने लोगों से टीकाकरण कराने की अपील कर रहे हैं. उन्होंने कंपनियों और संस्थाओं ने अपने स्टाफ का टीकाकरण कराने की अपील की है, साथ ही अमेरिकी सेना के 13 लाख सक्रिय सैनिकों के लिए भी टीकाकरण को अनिवार्य करने पर विचार हो रहा है.

    इमरजेंसी से अलग कैसे हैं औपचारिक मंजूरी
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक किसी भी मेडिकल प्रोडक्ट को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी तब दी जाती है, जब बीमारी से मानव जीवन को खतरा बढ़ जाए और संक्रमण के महामारी में बदलने की आशंका हो. ये सारी बातें कोरोना संक्रमण के मामले में लागू होती हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इंसान ने इस वायरस का सामना कभी नहीं किया था, इसलिए महामारी को कंट्रोल करने के लिए वैक्सीन ही सबसे बड़ा मेडिकल सॉल्यूशन था. ऐसे में सरकारों और कंपनियों ने वैक्सीन के विकास में पूरी ताकत झोंक दी और रिकॉर्ड टाइम में वैक्सीन विकसित कर ली गई.

    हालांकि इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी पाने वाली कंपनियों को औपचारिक मंजूरी के लिए सभी प्रक्रियाओं को पालन करना होता है, ताकि मेडिकल प्रोडक्ट को बाजार में उतारा जा सके. WHO के मुताबिक एक बार प्रोडक्ट इमरजेंसी लिस्ट में शामिल हो जाता है, तो जहां तक संभव हो, मार्केटिंग की मंजूरी पाने के लिए कंपनी को प्रोडक्ट निर्माण और उसके विकास से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए.

    फाइजर को कैसे मिली इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी
    पिछले साल दिसंबर महीने में फाइजर वैक्सीन को यूएस एफडीए ने मंजूरी दी थी. ये मंजूरी पाने वाली फाइजर की वैक्सीन पहली थी. एफडीए ने इसे रैंडम, नियंत्रित और हजारों लोगों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल के आधार पर मंजूरी दी थी. फाइजर की वैक्सीन इमरजेंसी इस्तेमाल के तहत 16 साल से ऊपर के लोगों को दी जा सकती थी, बाद में यह वैक्सीन 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए भी मंजूर कर ली गई. लेकिन, वैक्सीन के औपचारिक मंजूरी को 16 साल से ऊपर के लोगों के लिए रखा गया है.

    हालांकि इमरजेंसी इस्तेमाल के तहत वैक्सीन 12 से 15 साल के बच्चों को भी दी जा सकती है. साथ ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को भी वैक्सीन की तीसरी खुराक दी जा सकती है. फाइजर की वैक्सीन दो खुराक की वैक्सीन है और दो खुराक के बीच तीन हफ्ते का अंतर है. एफडीए ने कहा है कि फाइजर की वैक्सीन का 22 हजार लोगों पर परीक्षण किया गया है. परीक्षण में शामिल लोगों की उम्र 16 साल से अधिक थी, वहीं वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद क्लिनिकल ट्रायल में शामिल लोगों को चार महीने तक मेडिकल निगरानी में रखा गया.

    अमेरिका में वैक्सीन क्यों नहीं लगवा रहे लोग?
    अमेरिका में अप्रैल के मध्य में 30 लाख से ज्यादा वैक्सीन की खुराक लोगों को दी गई थी, उसके बाद से टीकाकरण की संख्या में लगातार कमी दर्ज की गई है. इस बीच कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या जून के आखिर में प्रतिदिन 10 हजार के करीब थी, जो अगस्त आते-आते 1 लाख हो गई है. जून के आखिर में अमेरिका में हुए सर्वे के मुताबिक टीका ना लगवाने 31 फीसदी लोगों ने कहा था कि वे वैक्सीन तभी लगवाएंगे, जब उसे औपचारिक इस्तेमाल की मंजूरी मिल जाएगी, वहीं 49 फीसदी लोगों को कहना था कि वे इंतजार करना पसंद करेंगे और देखेंगे कि वैक्सीन का असर क्या रहता है.

    क्लिनिकल ट्रायल में फाइजर की वैक्सीन 90 फीसदी प्रभावी पाई गई है.

    Tags: Coronavirus, Coronavirus vaccination, MRNA Vaccine, Pfizer-BioNTech, USFDA

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