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क्या कोविड-19 वेरिएंट हवा के जरिए और भी आसानी से फैल रहे हैं? जानिए स्टडी का नतीजा

रिसर्च में कहा गया कि ढीला-ढाला मास्क पहनने से कोरोना संक्रमण को किसी भी तरह से नहीं रोका जा सकता.

रिसर्च में कहा गया कि ढीला-ढाला मास्क पहनने से कोरोना संक्रमण को किसी भी तरह से नहीं रोका जा सकता.

Coronavirus Variant: शोधार्थियों का कहना है कि डेल्टा वेरिएंट के आने के बाद वायरस ने खुद में विकास किया और अब वो हवा में ज्यादा बेहतर तरीके से गति कर सकता है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्ली. कोविड-19 पर हुए एक अध्ययन से पता चला है कि S-CoV-2 के वेरिएंट हवा में अब बेहतर तरह से रह सकते हैं. इसलिए वैक्सीन लगवाने के अलावा लोगों का बाहर निकलने के दौरान टाइट फिट मास्क पहनना चाहिए और हवा के आवागमन को सुनिश्चित करना बेहद ज़रूरी है.

    अमेरिकी की मेरिलैंड यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों की एक टीम ने पाया कि जो लोग S-CoV-2 से संक्रमित होते हैं, वह अपनी सांसों के जरिए संक्रमित वायरस बाहर छोड़ते हैं, और अगर संक्रमण अल्फा वेरिएंट से हुआ है तो वायरस की मूल स्ट्रैन से 43 से 100 गुना ज्यादा वायरस हवा में फैलने का खतरा बना रहता है.

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    एनडीटीवी में प्रकाशित खबर के मुताबिक यूनिवर्सिटी ऑफ मेरीलैंड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर डॉन मिल्टन का कहना है कि हमारे हाल में किए अध्ययन से हवा से फैलने की महत्ता के पर्याप्त सबूत मिलते हैं. उन्होंने कहा, “हम जानते हैं कि डेल्टा वेरिएंट, अल्फा वेरिएंट की तुलना में ज्यादा संक्रामक है. हमारी शोध बताती है कि वेरिएंट हवा के जरिये एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में खुद को बेहतर बना रहे हैं. इसलिए वैक्सीन लगवाने के अलावा हवा का सही संचार, टाइट मास्क पहनना वायरस को रोकने के लिए बेहद जरूरी है.”

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    शोधार्थियों का कहना है कि अल्फा वेरिएंट से हवा में फैला संक्रमण नाक के स्वैब और लार में मौजूद वायरस की तुलना में 18 गुना ज्यादा था. शोध के लेखकों में से एक जियान्यू लाई का कहना है कि नाक और मुंह के जरिए अल्फा वेरिएंट का संक्रमण फैला था. संक्रमित व्यक्ति की नाक और मुंह से निकली बड़ी बूंदों की फुहार से निकला वायरस संक्रमण फैला सकता है, लेकिन हमारा अध्ययन बताता है कि सांस के ज़रिये छोड़े गए एयरोसोल इससे कहीं गुना ज्यादा होते हैं.

    शोधार्थियों का कहना है कि डेल्टा वेरिएंट के आने से पहले हवा में फैले वायरस डेल्टा वेरिएंट से थे. डेल्टा वेरिएंट के आने के बाद वायरस ने खुद में विकास किया और अब वो हवा में ज्यादा बेहतर तरीके से गति कर सकता है. मास्क पहनने से वायरस पर कितनी रोकथाम की जा सकती है, इसे जानने के लिए S-CoV-2 के सांस द्वारा छोड़े जाने पर ये सर्जिकल या कपड़े के मास्क से कितना रुकता है, इस पर एक अध्ययन किया गया.

    शोधार्थियों ने पाया कि चेहरा ढंका रहने से वायरस वाली हवा में रहने के बावजूद इससे बीमारी होने की आशंका में 50 फीसद तक कमी आ जाती है. वहीं ढीला-ढाला मास्क पहनने से संक्रमण को किसी भी तरह से नहीं रोका जा सकता है. इस अध्ययन का लब्बोलुआब यही है कि छोड़ी गई सांस में मौजूद वायरस से बचाव के लिए ज़रूरी है कि सही मास्क का इस्तेमाल किया जाए. जहां पर आप मौजूद हों वहां हवा का सही संचार हो, यूवी एयर सेनिटेशन हो. यही वो तरीका है जिससे दफ्तरों या कमरों में बंद क्षेत्र में बचाव किया जा सकता है.

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