लाइव टीवी

BCG वैक्सीन की वजह से नहीं बल्कि कम टेस्ट होने की वजह से कम हैं देश में कोरोना के आंकड़े?

News18Hindi
Updated: April 9, 2020, 7:44 PM IST
BCG वैक्सीन की वजह से नहीं बल्कि कम टेस्ट होने की वजह से कम हैं देश में कोरोना के आंकड़े?
अमेरिकी डॉक्टर फहीम युनूस ने विकासशील देशों में कोविड 19 के कम मामलों की वजह से टेस्टिंग पर सवाल उठाया है (Courtesy-twiiter)

डॉ फहीम युनूस ने अपने ट्वीट से उन अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिसर्च पर सवाल खड़े कर दिए जिन्होंने हाल ही में ये संभावना जताई थी कि भारत जैसे देशों में कोरोनावायरस का कहर BCG वैक्सीन की वजह से कम देखा जा सकता है

  • Share this:
भारत में कोरोना संक्रमण के अब तक आए मामलों पर अमेरिका ने नया दावा किया है. अमेरिकी यूनिवर्सिटी में संक्रामक रोगों के प्रमुख डॉ फहीम युनूस ने ट्वीट किया है कि विकासशील देशों में कोरोना संक्रमण के कम मामलों की वजह BCG टीका नहीं है. डॉ युनूस ने BCG टीका के तर्क को मिथक करार देते हुए कहा कि विकासशील देश में कोरोना संक्रमण की कम हो रही टेस्टिंग की वजह से ये सूरत-ए-हाल है. उनका कहना है कि विकासशील देशों में सामूहिक टेस्ट न होने की वजह से संक्रमण की असली संख्या सामने नहीं आ सकी है.

हालांकि, इंडियन काउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के मुताबिक अब तक 130000 सैंपल का टेस्ट हो चुका है. देश में कोविड19 के पॉज़िटिव केस 5865 हैं जिसमें 478 लोग ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्रज हो चुके हैं जबकि 169 मौतें हो चुकी हैं.



उन्होंने साथ ही ये भी ट्वीट किया कि ईरान और पोलैंड में BCG का वैक्सीन लगाया जाता है. जिसके बावजूद ईरान में 65000 और पोलैंड में 5000 मामले सामने आए. डॉ युनूस ने ट्वीट किया दस लाख लोगों में ईरान और पोलैंड ने 2500 टेस्ट किए जबकि पाकिस्तान ने 250 टेस्ट किए.

डॉ फहीम युनूस ने अपने ट्वीट से उन अमेरिकी वैज्ञानिकों की रिसर्च पर सवाल खड़े कर दिए जिन्होंने हाल ही में ये दावा किया था कि भारत जैसे देशों में कोरोनावायरस का कहर BCG वैक्सीन की वजह से कम देखा जा सकता है.

दुनियाभर के देशों में कोरोनावायरस से कोहराम मचा हुआ है. सुपरपावर देश से लेकर विकसित कहलाने वाले और आधुनिक स्वास्थ सेवाओं से लैस देशों में हाहाकार मचा हुआ है. लेकिन घनी आबादी वाले देश भारत में तुलनात्मक रूप से कोरोना के कम मामलों पर शोधकर्ताओं की अलग ही राय है. वो ये मानते हैं कि BCG यानी बैसिलस कैलमेट गुयरिन वैक्सीन होने की वजह से भारत में कोरोना महामारी का व्यापक असर नहीं दिखाई दे रहा है. अमेरिकी शोधकर्ताओं ने भारत में कोरोना से अब तक हुई कम मौतों पर ये अनुमान लगाया है.

न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी बायोकेमिल साइंसेज का दावा

अमेरिकी वैज्ञानिक मानते हैं कि भारत में नवजात बच्चों को BCG का टीका लगाए जाने की वजह से लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत है जो कि कोरोनावायरस से लड़ने में सक्षम है. दरअसल न्यूयॉर्क इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी बायोकेमिल साइंसेज ने दावा किया था कि इटली और अमेरिका में BCG वैक्सीन नहीं होने की वजह से हालात गंभीर हो चुके हैं. इनकी एक रिसर्च के मुताबिक कोरोना से संक्रमित मरीज़ों की तादाद और संक्रमण से मरने वालों मरीज़ों की संख्या उन देशों में ज्यादा है जहां कि BCG वैक्सीन नहीं लगाया जाता है. ये रिसर्च उन तमाम देशों के कोरोना संक्रमण के आंकड़ों, वैक्सीनेशन के कार्यक्रमों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विश्लेषण के बाद तैयार हुई.

इन देशों में नहीं लगते हैं बीसीजी वैक्सीन

अमेरिका, इटली, स्पेन, बेल्जियम,नीदरलैंड में बीसीजी के वैक्सीन नहीं लगाए जाते हैं. जबकि यहां कोरोना संक्रमण के मामले चीन को पीछे छोड़ चुके हैं. वहीं भारत के अलावा ब्राज़ील और जापान में बीसीजी के वैक्सीन लगाए जाते हैं जहां कि कोरोना संक्रमण के मामले तुलनात्मक रूप से कम हैं.

किस बीमारी से बचाव के लिए लगाया जाता है BCG टीका?

BCG का वैक्सीन टीबी यानी तपेदिक और सांस से जुड़ी दूसरी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए नवजात बच्चों को लगाया जाता है.

चीन क्यों बना अपवाद?

लेकिन सवाल ये है कि फिर चीन में कोरोनावायरस की वजह से इतनी सारी मौतें क्यों हुईं? दरअसल चीन में भी BCG  वैक्सीन लगाया जाता है. इसके बावजूद इस वायरस की शुरुआत चीन से हुई जिसने देखते ही देखते दुनिया को अपने आगोश में ले लिया.

दुनिया में कब हुई BCG वैक्सीन की शुरुआत?

साल 1920 से दुनिया में BCG वैक्सीन की शुरुआत हुई. भारत में 1948 से इस टीके की शुरुआत हुई जबकि जापान में 1947 और ब्राज़ील में 1920 से ही इसका वैक्सीनेशन शुरू हो गया था.

खास बात ये है कि डॉ फहीम युनूस ये भी कह रहे हैं कि ईरान में BCG वैक्सीन का इस्तेमाल होता है लेकिन वहां संक्रमण और उससे होने वाली मौतों का आंकड़ा बहुत ज्यादा है. लेकिन यहां ये बात सामने आती है कि ईरान में 1984 से BCG का वैक्सीन शुरू हुआ जिस लिहाज से देखा जाए तो 1984 से पहले जन्म लेने वाली जेनरेशन कोरोनावायरस से ज्यादा प्रभावित हो सकती है.

भारत में क्या कमज़ोर पड़ रहा है वायरस?

बहरहाल, कोरोनावायरस को लेकर जुड़े मिथक और दावे हर दिन सामने आ रहे हैं. एक स्टडी ये भी सामने आई थी कि भारत में मिला वायरस सिंगल स्पाइक है जबकि चीन, अमेरिका और इटली में मिला वायरस ट्रिपल स्पाइक है. ऐसे में भारत में फैला वायरस भारतीयों की कोशिकाओं पर मजबूत पकड़ नहीं बना सकेगा. कोविड19 के नेगेटिव माहौल में ये एक पॉज़िटिव खबर है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अमेरिका से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 9, 2020, 7:38 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading