'असंतोष के स्वरों को ऑनलाइन दबा रही कई सरकारें'

भाषा
Updated: November 14, 2017, 8:11 PM IST
'असंतोष के स्वरों को ऑनलाइन दबा रही कई सरकारें'
'असंतोष के स्वरों को ऑनलाइन दबा रही कई सरकारें' (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भाषा
Updated: November 14, 2017, 8:11 PM IST
एक मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को कहा कि रूस और चीन के साथ-साथ कई अन्य सरकारें भी सोशल मीडिया को अपने हित के लिए इस्तेमाल करने में लग गईं हैं. वो असंतोष के स्वरों को ऑनलाइन दबा रही हैं जो कि लोकतंत्र के लिए गंभीर ख़तरा है.

मानवाधिकार समूह 'फ्रीडम हाउस' ने मंगलवार को कहा कि 65 देशों में इंटरनेट आज़ादी पर एक अध्ययन किया गया था और इसमें पाया गया कि 30 सरकारें ऑनलाइन सूचना को विकृत करने के लिए किसी न किसी तरह से सूचना से छेड़छाड़ करती हैं. पिछले साल ऐसी सरकारों की संख्या 23 थी.

मानवाधिकार समूह की 'फ्रीडम ऑन नेट' रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रयासों में पेड टिप्पणी करने वाले, ट्रोल्स, बोट्स, फर्ज़ी खबरिया वेबसाइट, प्रचार एजेंसियां शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में कम से कम 18 देशों के चुनाव में ऑनलाइन, तोड़ मरोड़ और गलत बयानी के तरीकों ने अहम किरदार अदा किया है. इन देशों में अमेरिका भी शामिल है.

फ्रीडम हाउस के अध्यक्ष माइकल अब्रामोवित्ज़ ने कहा कि सरकार का प्रचार करने के लिए पैसा देकर टिप्पणी करने वालों और राजनीति बोट्स का इस्तेमाल करने में चीन और रूस सबसे आगे थे लेकिन अब ये वैश्विक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि तेज़ी से फैलती ये तकनीकें लोकतंत्र और सिविल एक्टिविजम के लिए संभावित ख़तरा है.

फ्रीडम ऑन नेट परियोजना की निदेशक संजा कैली ने बताया कि इस तरह के तोड़ मरोड़ करने के तरीके को पकड़ना अक्सर मुश्किल होता है. इसके अलावा सेंसरशिप और वेबसाइट ब्लॉक करने की तुलना में इसका मुकाबला करना भी कठिन है.

संगठन ने कहा कि वर्ष 2017 लगातार सातवां साल है जब इंटरनेट आज़ादी में कुल मिलाकर कमी देखी गई है.
First published: November 14, 2017
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