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बिना दवाओं के ही ठीक हुआ HIV का मरीज, दुनिया में अब तक का ऐसा दूसरा मामला

बिना दवाओं के ही ठीक हुआ HIV का मरीज, दुनिया में अब तक का ऐसा दूसरा मामला

एचआईवी रोगी के बिना दवाओं ठीक हो जाने के दूसरे मामले की जानकारी दी गई है.   (कॉन्सेप्ट इमेज)

एचआईवी रोगी के बिना दवाओं ठीक हो जाने के दूसरे मामले की जानकारी दी गई है. (कॉन्सेप्ट इमेज)

विश्व में दूसरे ऐसे एचआईवी रोगी (HIV) की पहचान की गई है जो ‘एंटीरेट्रोवाइरल’ (antiretrovirals) दवाओं के उपयोग के बिना ही संभवत: वायरस (Virus) से मुक्त हो गया है. वैज्ञानिकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. ‘एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित खोज से पता चलता है कि मरीज एचआईवी से पीड़ित था और उसका कोई उपचार नहीं चल रहा था. अंतरराष्ट्रीय टीम ने गौर किया कि अगर शोधकर्ता इस प्रतिक्रिया में अंतर्निहित प्रतिरक्षा तंत्र को समझ सकते हैं तो वे ऐसे उपचार विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं जो एचआईवी संक्रमण के मामलों में इन प्रतिक्रियाओं को दोहराने के लिए दूसरों की प्रतिरक्षा प्रणाली को तैयार कर सकते हैं.

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    बोस्टन (अमेरिका). विश्व में दूसरे ऐसे एचआईवी (HIV) रोगी की पहचान की गई है जो ‘एंटीरेट्रोवाइरल’ (antiretrovirals) दवाओं के उपयोग के बिना ही संभवत: वायरस (Virus) से मुक्त हो गया है. वैज्ञानिकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. ‘एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन’ नामक पत्रिका में प्रकाशित खोज से पता चलता है कि मरीज एचआईवी से पीड़ित था और उसका कोई उपचार नहीं चल रहा था. उसके 1.5 अरब से अधिक रक्त और ऊतक कोशिकाओं के अध्ययन में वायरल जीनोम का कोई सबूत नहीं मिला था. एचआईवी यानी ह्युमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस के कारण इम्‍युनिटी कमजोर हो जाती है और एक समय के बाद शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र काम करना बंद कर देता है. इसके बाद कई प्रकार के संक्रमण हो जाते हैं और मरीज की मौत तक हो सकती है.

    अंतरराष्ट्रीय टीम ने गौर किया कि अगर शोधकर्ता इस प्रतिक्रिया में अंतर्निहित प्रतिरक्षा तंत्र को समझ सकते हैं तो वे ऐसे उपचार विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं जो एचआईवी संक्रमण के मामलों में इन प्रतिक्रियाओं को दोहराने के लिए दूसरों की प्रतिरक्षा प्रणाली को तैयार कर सकते हैं. वैज्ञानिकों ने इस मरीज की पहचान उजागर नहीं की है, उन्‍होंने मरीज को एस्परेंजा पेशंट नाम दिया है. उन्होंने कहा कि वायरस में खुद को एचआईवी रोधी दवाओं और शरीर के प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं से खुद को प्रभावी तरीके से बचाने की क्षमता होती है. हैरानी की बात है कि ऐसे मामले में पहले मरीज की पहचान जिन वैज्ञानिकों ने की थी, उन्‍हीं वैज्ञानिकों ने दूसरे मरीज की पहचान की है.

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    शोधकर्ताओं ने कहा कि एचआईवी संक्रमण के दौरान अपने जीनोम के स्वरूपों को डीएनए या कोशिकाओं की आनुवंशिक सामग्री में रखता है, जिसे वायरल भंडारण भी कहा जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में, वायरस एचआईवी-विरोधी दवाओं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से प्रभावी रूप से बच जाता है. ज्यादातर लोगों में इस भंडार से लगातार नए वायरल कण बनते रहते हैं. एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) दवाओं से नए वायरस का निर्माण रूक जाता है लेकिन इन दवाओं में वायरस के पूरे पूल को खत्‍म करने की क्षमता नहीं होती है. इस वजह से अधिकांश मरीजों में वायरस के नए पार्टिकल बनते रहते हैं. इनके कारण ही मरीजों के वायरस को कमजोर करने के लिए रोजाना ही दवा लेनी होती है.

    ‘एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी’ (एआरटी) के तहत नए वायरस को बनने से रोका जा सकता है लेकिन भंडार को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है. इससे वायरस पर काबू के लिए रोजाना उपचार की आवश्यकता होती है. वैज्ञानिकों ने अपने पिछले अध्ययन में एक ऐसे मरीज की पहचान की, थी जिसके जीनोम में एचआईवी वायरल अनुक्रम नहीं था. यह दर्शाता है कि उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली ने एचआईवी भंडार को समाप्त कर दिया होगा.

    Tags: Antiretrovirals, HIV, Patient, Virus

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