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हनोई में अमेरिकी अधिकारी पर सॉनिक अटैक! हवाना सिंड्रोम के शक में कमला हैरिस की फ्लाइट में 3 घंटे की हुई देरी

Havana Syndrome को पहली बार अमेरिकी राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों ने 2016 की शुरुआत में क्यूबा की राजधानी में रिपोर्ट किया था. फाइल फोटो

Havana Syndrome को पहली बार अमेरिकी राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों ने 2016 की शुरुआत में क्यूबा की राजधानी में रिपोर्ट किया था. फाइल फोटो

Hawana Syndrome Case : हवाना सिंड्रोम से पीड़ित लोगों ने बताया कि उन्हें कानों को भेदने वाला शोर सुनाई देता है और वे चेहरे पर भारी तनाव महसूस करते हैं. कभी कभार दर्द, मितली और चक्कर भी आता है. इस तरह के मामले जर्मनी, ऑस्ट्रिया, रूस और चीन में तैनात अमेरिकी अधिकारी ने भी रिपोर्ट किए हैं.

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    हनोई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस (Kamala Harris) की सिंगापुर से वियतनाम की यात्रा में हनोई में तथाकथित हवाना सिंड्रोम (Hawana Syndrome Case) के एक संभावित मामले की जांच के कारण मंगलवार को कई घंटे की देरी हुई, प्रशासन के अधिकारियों ने इस आशय की जानकारी दी. हालांकि ये जांच अपने शुरुआती स्तर पर ही थी और अधिकारियों ने हैरिस से कहा कि वे अपने तय कार्यक्रम के मुताबिक वियतनाम में रुक सकती हैं, हैरिस के इस दौरे का उद्देश्य अफगानिस्तान (Afghanistan) से अमेरिकी सेना के निकलने के बीच अमेरिकी विदेश नीति के बारे में सहयोगियों को आश्वस्त करना है. हवाना सिंड्रोम स्वास्थ्य से जुड़ी कई रहस्यमय घटनाओं को कहा जाता है. इस सिंड्रोम (Havana Syndrome) को पहली बार अमेरिकी राजनयिकों और सरकारी अधिकारियों ने 2016 की शुरुआत में क्यूबा की राजधानी में रिपोर्ट किया था.

    हालांकि ये तुरंत स्पष्ट नहीं हो सका कि हनोई में कौन हवाना सिंड्रोम का शिकार हुआ है. हालांकि अधिकारियों ने कहा कि जो भी सिंड्रोम का शिकार व्यक्ति है, वह ना तो उपराष्ट्रपति के लिए और ना ही व्हाइट हाउस के लिए काम करता है. हनोई स्थित अमेरिकी दूतावास के बयान के मुताबिक हैरिस के दौरे में देरी इसलिए हुई कि उपराष्ट्रपति के कार्यालय को वियतनाम की राजधानी में हाल ही में एक संभावित असामान्य स्वास्थ्य घटना की एक रिपोर्ट के बारे में पता चला. हालांकि दूतावास ने कोई और जानकारी उपलब्ध नहीं कराई लेकिन कहा कि हैरिस ने स्थिति का आकलन करने के बाद हनोई जाने का फैसला किया.

    हवाना सिंड्रोम को जानिए
    हवाना सिंड्रोम को परिभाषित करने के लिए अमेरिकी सरकार “असामान्य स्वास्थ्य घटना” का प्रयोग करती है. इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों ने बताया कि उन्हें कर्णभेदी शोर सुनाई देता है और वे चेहरे पर भारी तनाव महसूस करते हैं. कभी कभार दर्द, मितली और चक्कर भी आता है. इस तरह के मामले जर्मनी, ऑस्ट्रिया, रूस और चीन में कार्यरत अमेरिकियों द्वारा भी रिपोर्ट किए गए हैं. इस मामले को परिभाषित करने के लिए कई सारी दलीलें दी गई हैं, जैसे लोगों को टारगेट करके माइक्रोवेब और सुपरसोनिक अटैक करना, जोकि जासूसी या हैकिंग के लिए हो सकता है.

    वॉशिंगटन में भी सामने आए 2 मामले
    अमेरिका इस तरह के मामलों को बेहद गंभीरता से लेता है और हाल ही में दो ऐसे केस वॉशिंगटन में दर्ज किए गए हैं, जिनमें से एक मामले में नवंबर में व्हाइट हाउस के अधिकारी ने चक्कर आने की सूचना दी थी. प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था कि मामले में रूस संलिप्त हो सकता है, हालांकि मास्को ने इनकार कर दिया.

    बता दें कि कमला हैरिस को मंगलवार की शाम को सिंगापुर में भाषण देने के बाद हनोई जाना था, लेकिन उनकी फ्लाइट में तीन घंटे से ज्यादा की देरी हुई. हालांकि हैरिस के मुख्य प्रवक्ता साइमन सिंड्रोम ने स्थिति पर बात करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि हैरिस ठीक हैं और पत्रकारों ने मंगलवार को उन्हें कई बार देखा है, इसलिए उनके स्वास्थ्य के बारे में चिंतित होने की जरूरत नहीं है.

    हवाना सिंड्रोम के मामलों में इजाफा
    इधर वॉशिंगटन में कांग्रेस ने मामले को उठाया और हाउस और सीनेट में सभी पार्टियों ने इस पर चिंता जताई और सिंड्रोम की जांच के लिए बाइडन सरकार से मांग की. बाइडन सरकार पर इस तरह के मामलों की जांच कराने का बेहद दबाव है, क्योंकि हाल के दिनों में हवाना सिंड्रोम के मामले बढ़े हैं. लेकिन वैज्ञानिक और सरकार ने इस बारे में निश्चित नहीं है कि इस हमले के पीछे कौन हो सकता है. और यह भी क्या ये लक्षण सर्विलांस उपकरणों की वजह से होते हैं, या इसके पीछे किसी तरह का हमला है.

    रेडियो फ्रीक्वेंसी एनर्जी को बताया ‘विलेन’
    हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेने का आश्वासन ही दिया है, और कहा है कि सिंड्रोम से प्रभावित लोगों को बढ़िया मेडिकल केयर उपलब्ध कराया जाएगा. हवाना सिंड्रोम के बारे में एक महत्वपूर्ण विश्लेषण ये सामने आया है कि इसके पीछे रेडियो फ्रीक्वेंसी एनर्जी हो सकती है. बीते दिसंबर में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की ओर से प्रकाशित रिपोर्ट में रेडियो फ्रीक्वेंसी अटैक मस्तिक की संचालन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है और इससे कोई बहुत ज्यादा नुकसान भी नहीं होगा. हालांकि पैनल ने अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बताया कि अमेरिकी अधिकारियों को किस तरह टारगेट किया जाता है.

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