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पांचवें बर्थडे पर हुआ पोलियो, 81 साल से लोहे के फेफड़े में कैद है जिंदगी

पांचवें बर्थडे पर हुआ पोलियो, 81 साल से लोहे के फेफड़े में कैद है जिंदगी

ये मशीन लगभग 7 फीट लंबी विशाल वेंटिलेटर होती है. इसमें पोलियोग्रस्त को ऐसे लेटाया जाता है, जिसमें उसे सिर बाहर की तरफ रहे.

ये मशीन लगभग 7 फीट लंबी विशाल वेंटिलेटर होती है. इसमें पोलियोग्रस्त को ऐसे लेटाया जाता है, जिसमें उसे सिर बाहर की तरफ रहे.

पोलियो (Polio) एक संभावित जानलेवा बीमारी है, जो कभी दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक थी. 1940 के दशक के आखिर में अमेरिका में हर साल औसतन 35,000 लोगों को पोलियो ने अक्षम कर दिया था.

    न्यूयॉर्क. मार्था लिलार्ड (Martha Lillard)उन पोलियोग्रस्त रोगियों में एक हैं, जो दशकों तक लोहे के फेफड़े के सहारे जिंदा हैं. 8 जून 1953 को मार्था लिलार्ड ने अपना पांचवां जन्मदिन ओक्लाहोमा (Oklahoma) के एक एंटरटेनमेंट पार्क में शानदार पार्टी करके मनाया था. इसके एक हफ्ते से थोड़ा अधिक समय बाद उसे बुखार आया. गले में खराश और गर्दन में दर्द की शिकायत हुई. परिवार उसे अस्पताल ले गए, जहां उसे डॉक्टरों ने बताया कि उसे पोलियो (Polio) है.

    मार्था का अस्पताल में छह महीने तक इलाज चला. उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी. लिहाजा डॉक्टरों ने उसे एक विशाल धातु के टैंक में रखा. ये एक वेंटिलेटर है, जिसे लोहे का फेफड़ा कहा जाता है. इससे उसे सांस लेने में मदद मिलती है. 81 साल से लिलार्ड जीवित रहने के लिए लोहे के फेफड़े पर निर्भर है.

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    पोलियो एक संभावित जानलेवा बीमारी है, जो कभी दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक थी. 1940 के दशक के आखिर में अमेरिका में हर साल औसतन 35,000 लोगों को पोलियो ने अक्षम कर दिया था.

    1955 में पोलियो का टीका व्यापक रूप से उपलब्ध हो गया. लाखों अमेरिकियों को टीका लगाया गया. रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार, 1979 के बाद से अमेरिका में पोलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है. यह बीमारी लगभग समाप्त हो चुकी है. अब सिर्फ पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में ये बीमारी है.

    पोलियो शरीर में किस अंग को प्रभावित करेगा, इसका पहले से अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. लिलार्ड के मामले में उसे सांस लेने की दिक्कत हो रही थी. इसलिए उसे ताउम्र लोहे के फेफड़े के सहारे रहना पड़ रहा है.

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    ये मशीन लगभग 7 फीट लंबी विशाल वेंटिलेटर होती है. इसमें पोलियोग्रस्त को ऐसे लेटाया जाता है, जिसमें उसे सिर बाहर की तरफ रहे. रोगी की गर्दन के चारों ओर एक सील वैक्यूम बनता है. उपकरण के आधार पर ये मानव डायाफ्राम का काम करती है. इससे फेफड़े हवा से भर जाते हैं और रोगी को सांस मिलती है.

    आज लिलार्ड इसी मशीन में रहकर अपना सारा वक्त लगभग अकेले गुजारती है. कभी वो पेंट करती है, तो कभी हॉलीवुड की फिल्में देखती है. कोरोनाकाल में वह लगभग आइसोलेशन में ही रही.

    Tags: Health, Polio

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