नासा ने अंतरिक्ष में भेजा खास 'टॉइलट', कीमत जानकर आप हो जाएंगे हैरान

नासा ने महिला एस्ट्रोनॉट के लिए स्पेशल टॉइलट बनाया. (फोटो सौजन्य से नासा)
नासा ने महिला एस्ट्रोनॉट के लिए स्पेशल टॉइलट बनाया. (फोटो सौजन्य से नासा)

नासा (NASA) 2024 में चांद पर आर्टेमिस मिशन (Artemis mission on moon) के तहत एक महिला और एक पुरुष एस्ट्रोनॉट को भेजने की तैयारी कर रहा है. आईएसएस (ISS) पर इसका टेस्ट आर्टेमिस के लिए अहम होगा. इस टॉइलट (Toilet) में महिलाओं के लिए फनल-सक्शन सिस्टम लगाया गया है. जिससे एस्ट्रॉनोट अपने आप को बेहतर तरीके तरोताजा रख सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 3, 2020, 12:44 PM IST
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वाशिंगटन. अंतरिक्ष में बने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए नासा ने एक खास टॉइलट भेजा है. ये टॉइलट लेकर गया है नासा का नार्थरोप ग्रुमैन एंटेर्स रॉकेट. इस मिशन को भारत की पहली महिला अंतरिक्षयात्री कल्पना चावला के नाम पर रखा गया है. इस सिग्नस कार्गो स्पेसक्राफ्ट के साथ जाने वाले सामान में से एक स्पेस टॉइलट भी है.

इस टॉइलट को भेजने के पीछे महिला एस्ट्रोनॉट की सुविधाओं को ध्यान में रखा गया है. नासा ने इस टॉइलट को करीब 23 मिलियन डॉलर यानी 174 करोड़ खर्च करके डिजाइन किया है. ताकि अंतरिक्ष में महिला एस्ट्रोनॉट को लंबे वक्त तक रुकने में कोई परेशानी न हो. दरअसल अंतरिक्ष में टॉइलट की कमी की वजह से महिला एस्ट्रोनॉट को लंबे वक्त तक रुकने में मुश्किल होती थी.

6 साल की मेहनत का नतीजा है टॉइलट



नासा के वैज्ञानिकों की मानें तो इस खास टॉइलट को बनाने में 6 साल का लंबा वक्त लगा है. उनके अनुसार अभी तक स्पेस में महिला एस्ट्रोनॉट की काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था, क्योंकि अभी तक स्पेस में इस्तेमाल की जा रही माइक्रोग्रैविटी टॉइलट पुरुष एस्ट्रोनॉट को ध्यान में रखकर डिजाइन किए गए थे. लेकिन जैसे-जैसे स्पेस में महिला एस्ट्रोनॉट की संख्या बढ़ी हैं खास टॉइलट की जरूरत महसूस की जाने लगी.
इस टॉइलट में क्या खास होगा
नासा 2024 में चांद पर आर्टेमिस मिशन के तहत एक महिला और एक पुरुष एस्ट्रोनॉट को भेजने की तैयारी कर रहा है. आईएसएस पर इसका टेस्ट आर्टेमिस के लिए अहम होगा. इस टॉइलट में महिलाओं के लिए फनल-सक्शन सिस्टम लगाया गया है. जिससे एस्ट्रॉनोट अपने आप को बेहतर तरीके तरोताजा रख सके. इसके लिए इस खास टॉइलट को डिजाइन किया गया है. पहले के सिस्टम्स के मुकाबले इसका द्रव्यमान और आयतन कम होगा और इसे इस्तेमाल करना भी आसान होगा. यही नहीं, इसमें यूरिन ट्रीटमेंट की सुविधा भी होगी. जिससे स्पेसक्राफ्ट के रीसाइक्लिंग सिस्टम में इसे प्रॉसेस किया जा सकेगा. सीट पर बैठते वक्त ऐस्ट्रोनॉट्स के पैर फंसाने के लिए खास हुक भी लगे होंगे.


महिलाओं के लिए टॉइलट बनाना था चुनौती
नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार स्पेसक्राफ्ट में वेस्ट कलेक्शन सिस्टम डिवेलप करना गुरुत्वाकर्षण की वजह से एक बड़ी चुनौती होता है. खासकर पेशाब और मल को अलग करके रखना मुश्किल होता है. यूरिन का इस्तेमाल जहां रीसाइकल करने के बाद पीने के पानी के तौर पर किया जाता है, वहीं मल को कंटेनर में रखा जाता है. पहले के टॉइलट पुरुष यात्रियों को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे लेकिन शारीरिक संरचना में अंतर की वजह से यूनिसेक्स टॉइलट (महिला और पुरुष, दोनों के लिए) बनाना एक बड़ी चुनौती थी.
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