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फतवा अब भी प्रभावी है? इससे रुश्दी की जिंदगी कैसे बदली, जानिए जापानी-इतालवी से इसका कनेक्शन

द सैटेनिक वर्सेज का इतालवी में अनुवाद करने वाले एटोर कैप्रियोलो पर उनके मिलान अपार्टमेंट में हमला किया गया था. फोटो- AFP

द सैटेनिक वर्सेज का इतालवी में अनुवाद करने वाले एटोर कैप्रियोलो पर उनके मिलान अपार्टमेंट में हमला किया गया था. फोटो- AFP

ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने सलमान रुश्दी के 1988 के उपन्यास 'द सैटेनिक वर्सेज' के लिए मौत का फतवा जारी किया था. फतवा जारी किए जाने के तैंतीस साल बाद सलमान रुश्दी पर शुक्रवार को चाकू से बेरहमी से हमला किया गया.

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हाइलाइट्स

ईरान के अयातुल्ला खुमैनी ने सलमान रुश्दी के खिलाफ जारी किया था मौत का फतवा
फतवे के बाद रुश्दी ने 6 महीने में बदले 56 घर, छद्म नाम जोसेफ एंटोन अपनाया
सलमान रुश्दी के सिर पर रखा गया था 28 लाख डॉलर का इनाम

नई दिल्ली. ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खुमैनी ने सलमान रुश्दी के 1988 के उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लिए मौत का फतवा जारी किया था. फतवा जारी किए जाने के 33 साल बाद सलमान रुश्दी पर शुक्रवार को चाकू से हमला किया गया. उनके एजेंट ने कहा था कि सर्जरी के बाद लेखक रुश्दी वेंटिलेटर पर थे. उन्हें एक आंख खो देने की आशंका है और उनका लीवर छुरे के हमले से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है.

खुमैनी ने फतवे में दुनिया के मुसलमानों से ‘द सैटेनिक वर्सेज’ पुस्तक के लेखक और प्रकाशकों को जल्दी से खत्म करने की अपील की थी, जिससे आगे से कोई भी इस्लाम के पवित्र मूल्यों को ठेस पहुंचाने की हिम्मत ना करे. रुश्दी के सिर पर 28 लाख डॉलर का इनाम रखा गया था. खुमैनी ने कहा था कि जो कोई भी मौत की सजा को अंजाम देने की कोशिश में मारा जाएगा, उसे शहीद माना जाना चाहिए और उसे जन्नत मिलेगी. इस फतवे ने रुश्दी के जीवन को हमेशा के लिए बदल दिया. अगले 13 साल में रुश्दी ने जोसेफ एंटोन के छद्म नाम को अपनाया और पहले 6 महीनों में 56 बार घर बदले.

बहरहाल केवल रुश्दी ही इस फतवे के अकेले शिकार नहीं हुए हैं. जापानी भाषा में ‘द सैटेनिक वर्सेज’ का अनुवाद करने वाले हितोशी इगारशी की 1999 में टोक्यो के उत्तर-पूर्व में सुकुबा विश्वविद्यालय परिसर की एक इमारत में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. पुलिस ने कहा था कि उनके शरीर में चाकू के गहरे घाव थे. द सैटेनिक वर्सेज का इतालवी में अनुवाद करने वाले एटोर कैप्रियोलो पर उनके मिलान अपार्टमेंट में हमला किया गया था. बहरहाल वे इस हमले में बच गए, जबकि अक्टूबर 1993 में उपन्यास के नॉर्वेजियन प्रकाशक विलियम न्यागार्ड को तीन गोलियां मारी गईं. ओस्लो में उनके घर के बाहर न्यागार्ड को मरा समझकर छोड़ दिया गया. उनको ठीक होने के लिए अस्पताल में महीनों समय बिताना पड़ा.

बहरहाल 1998 में ब्रिटेन के साथ राजनयिक संबंधों को फिर से बहाल करने के प्रयास के दौरान ईरान के नेता मोहम्मद खातमी ने कहा था कि ईरान रुश्दी की हत्या के किसी भी प्रयास का न तो समर्थन करता है और न उसमें बाधा बनेगा. हालांकि लगभग एक दशक बाद ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी का कहना था कि फतवा अभी भी प्रभावी है और रुश्दी की हत्या के लिए दिया जाने वाला इनाम बढ़कर 30 लाख डॉलर से अधिक हो गया है.

Tags: Salman Rushdie

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