बेहद नाजुक मोड़ पर अमेरिका और सऊदी अरब का रिश्ता! खशोगी की हत्या से जुड़ा क्राउन प्रिंस का नाम

जमाल खगोशी  (फ़ाइल फोटो)

जमाल खगोशी (फ़ाइल फोटो)

Khashoggi Murder Case: जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद तस्वीर बदलने लगी है. डोनाल्ड्र ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए सऊदी अरब और अमेरिका के रिश्ते अच्छे थे. हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक, खशोगी हत्याकांड में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का नाम आने से दोनों देशों के रिश्ते नाजुक मोड़ पर पहुंच सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 10:27 AM IST
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नई दिल्ली. सऊदी अरब और अमेरिका के रिश्ते बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं. वजह है पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसी का सनसनीखेज दावा. जो बाइडेन (Joe Biden) प्रशासन ने खुफिया एजेंसी की एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें दावा किया गया है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Crown Prince Mohammed bin Salman) के कहने पर ही पत्रकार जमाल खगोशी (Jamal Khashoggi) की हत्या की गई थी. हालांकि क्राउन प्रिंस ने अमेरिका के इन दावों को सीरे से खारिज कर दिया है. बता दें कि साल 2018 में खगोशी की सऊदी अरब में हत्या हुई थी.

जो बाइडेन के राष्ट्रपति बनने के बाद तस्वीर बदलने लगी है. डोनाल्ड्र ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए सऊदी अरब और अमेरिका के रिश्ते अच्छे थे. खास बात ये है कि उन दिनों ट्रंप और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच काफी करीबी रिश्ते बन गए थे. हाल के दिनों में ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनेर और क्राउन प्रिंस के बीच वॉट्सऐप पर चैट को लेकर भी खुलासे हुए हैं.

क्राउन प्रिंस से डील करना मुश्किल चुनौती

वॉशिंगटन में ईस्ट पॉलिसी के एक एक्सपर्ट सामन हेंडरसन का कहना है कि अमेरिका के लिए क्राउन प्रिंस से डील करना आसान नहीं होगा. वो बेहद ताकतवर हैं. बता दें कि पिछले साल मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भी सऊदी अरब पर सवाल उठे थे. कई देशों और एक्सपर्ट को लगता है कि क्राउन प्रिंस अपने देश को एक 'रफ स्टेट' बना सकते हैं. यानी अंतराष्ट्रीय कानूनों को तोड़कर वो दूसरे देशों के लिए खतरा बन सकते हैं.
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बढ़ रही हैं दूरियां

अमेरिका और सऊदी अरब के बीच पहली बार दोस्ती के हाथ साल 1945 में बढ़े थे. उस वक्त फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट अमेरिका के राष्ट्रपति थे. रूजवेल्ट  ने उन दिनों किंग अज़ीज से बातचीत के बाद तेल को लेकर डील की थी. दरअसल उन दिनों अमेरिका दूसरे विश्व युद्ध के बाद अपने देश को आर्थिक मोर्चे पर मजबूत करने की कोशिश में था. लेकिन अब हालात बदलने लगे हैं. अमेरिका अब पहले की तरह सऊदी अरब पर तेल के लिए निर्भर नहीं है. जबकि सऊदी अरब को सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की जरूरत है. हालांकि बाइडेन ने पहले ही इस बात का ऐलान कर दिया है कि यमन में वो साऊदी अरब की कार्रवाई का समर्थन नहीं करते हैं.



सउदी बन रहा है दुश्मन!

सितंबर 2001 में अमेरिका पर हमले के बाद से भी हालात बदले हैं. हमले के लिए जिस विमान का इस्तेमाल किया गया था उसे हाईजैक करने वाले 19 में से 15 लोग साऊदी अरब के थे. हालांकि इसके बाद भी जॉर्ज बुश ने रिश्तों को बेहतर रखा. लेकिन अब हालात बदल रहे हैं. अमेरिका के कई नेताओं का मनना है कि सऊदी अरब अब उनका दुश्मन है.
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