अमेरिकी सेना हटाने की ट्रंप ने जब दी धमकी, तेल उत्पादन कम करने पर राजी हो गया सऊदी अरब

अमेरिकी सेना हटाने की ट्रंप ने जब दी धमकी, तेल उत्पादन कम करने पर राजी हो गया सऊदी अरब
ट्रंप ने तेल उत्पादन में कटौती को लेकर सऊदी अरब को अल्टीमेटम दिया था

रिपोर्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने सऊदी अरब (Saudi Arab) के साथ 75 साल पुराने रणनीतिक गठबंधन को तोड़ने की धमकी दे दी थी जिसकी वजह से तेल उत्पादन को लेकर ऐतिहासिक वैश्विक समझौता हो सका जो कि व्हाइट हाउस के लिए कूटनीतिक जीत है

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 9:48 PM IST
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कोरोनावायरस (Coronavirus) की वजह से दुनियाभर में लॉकडाउन (Lockdown) जारी है. लोगों के घरों में रहने से तेल की मांग में बेहद कमी चल रही है जिस वजह से तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है. वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में मांग और पूर्ति के बीच बैलेंस रखने के लिए ओपेक, उसके सहयोगी देश और रूस के बीच पेट्रोलियम उत्पादन को कम करने पर ऐतिहासिक समझौता हुआ जिससे कि ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा जा सके. रूस और सऊदी अरब कच्चे तेल के शीर्ष उत्पादक माने जाते हैं और दोनों के बीच उत्पादन में कटौती की सहमति बन गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी की वजह से रूस और सऊदी अरब के बीच तेल उत्पादन कम करने को लेकर ऐतिहासिक डील हो सकी है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ ऑयल-प्राइस वॉर खत्म करने का दबाव बढ़ाते हुए एक अल्टीमेटम दिया था. 2 अप्रैल को ट्रंप ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को फोन कर कहा कि, ‘जब तक पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC)  तेल उत्पादन में कटौती करना शुरू नहीं करते, वह सांसदों को सऊदी अरब से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के कानून को पारित करने से रोकने में शक्तिहीन रहेंगे.’

रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ 75 साल पुराने रणनीतिक गठबंधन को तोड़ने की धमकी दे दी थी जिसकी वजह से तेल उत्पादन को लेकर ऐतिहासिक वैश्विक समझौता हो सका जो कि व्हाइट हाउस के लिए कूटनीतिक जीत है. तेल के उत्पादन में कमी की घोषणआ से 10 दिन पहले ही ट्रंप ने सऊदी अरब को ये संदेश भिजवा दिया था.



अमेरिकी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि प्रशासन ने सऊदी नेताओं को सूचित कर दिया था कि तेल के  उत्पादन में कटौती के बिना अमेरिकी कांग्रेस को प्रतिबंध लगाने से रोकने का कोई तरीका नहीं होगा जिसमें सऊदी अरब से अमेरिकी सेना की वापसी भी शामिल हो सकती है. अमेरिका ने तमाम कूटनीतिक माध्यमों से सऊदी अरब तक ये संदेश साफ-साफ पहुंचा दिया था कि, ‘हम आपकी ऑयल इंडस्ट्री की सुरक्षा कर रहे हैं जबकि आप हमारे उद्योगों को तबाह कर रहे हैं.’
रॉयटर्स ने बुधवार शाम व्हाइट हाउस में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रम्प से पूछा कि, ‘क्या उन्होंने सऊदी प्रिंस सलमान को कहा था कि अमेरिका सऊदी अरब से सेना वापस बुला सकता है?  इस सवाल पर ट्रम्प का जवाब था कि, ‘उन्हें ऐसा कहने की जरूरत नहीं पड़ी.’

ट्रंप से जब ये पूछा गया कि उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को फोन कर क्या कहा तो उनका जवाब था कि, ‘रूस और सऊदी अरब के बीच डील को लेकर कुछ मुश्किलें आ रही थीं जिस पर मैंने टेलिफोन कर बात की और फिर हम एक डील पर पहुंच सके.’

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को ट्रंप के फोन के एक हफ्ते पहले यू.एस. रिपब्लिकन सीनेटरों केविन क्रैमर और डैन सुलिवन ने कानून पेश किया था कि सऊदी अरब जब तक तेल उत्पादन में कटौती नहीं करता है तो वहां से अमेरिकी सैनिकों, पैट्रियाट मिसाइलों और मिसाइल रोधी रक्षा प्रणालियों को हटा लिया जाए.  रॉयटर्स के मुताबिक नॉर्थ डकोटा से रिपब्लिक सीनेटर क्रैमर ने ट्रंप से 30 मार्च को मुलाकात की थी और सऊदी अरब से अमेरिकी सेना को हटाने के विधेयक के बारे में चर्चा की थी.

14 फरवरी 1945 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन रूज़वेल्ट और सऊदी अरब के शाह अब्दुल अज़ीज़ के बीच अमेरिकी नेवी क्रूज़र यूएसएस क्विंसी में मुलाकात के बाद एक समझौता हुआ था जिसके तहत अमेरिका सऊदी अरब को सामरिक सुरक्षा देगा और बदले में उसके तेल संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेगा. सऊदी अरब में फिलहाल अमेरिका के 3 हज़ार से ज्यादा टुकड़ियां तैनात हैं जो कि खाड़ी में सऊदी अरब के तेल ठिकानों की रक्षा करते हैं.

12 अप्रैल को ट्रंप के दबाव का ही नतीजा था कि दुनिया के शीर्ष् तेल उत्पादक देश तेल उत्पादन में कटौती को राजी हो गए. जिससे अमेरिका में शेयर बाज़ार में भी राहत दिखाई दी. तेल की गिरती कीमतों की वजह से अमेरिका में हज़ारों नौकरियों पर संकट आ गया था और एनर्जी मार्केट गोते लगा रहा था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि दुनिया के तेल उत्पादक देशों का समूह ओपेक प्लस 20 मिलियन बैरल उत्पादन में प्रतिदिन कमी कर रहा है.
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