कोरोना वायरस: ट्रंप को थी सिर्फ अपनी फिक्र! व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले चुपके से लगवा ली थी वैक्सीन

अमेरिका (America) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)

अमेरिका (America) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump)

इस खुलासे के बाद अमेरिका (America) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) एक बार फिर से विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं, क्योंकि उन्होंने कोरोना (Coronavirus) की सबसे ज्यादा मार झेल रही आम जनता पर खुद को तवज्जो दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 3, 2021, 10:49 AM IST
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वॉशिंगटन. अमेरिका (America) के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बार फिर चर्चा में हैं. एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि व्हाइट हाउस (White House) छोड़ने से पहले ट्रंप और मलेनिया ने चुपके से कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) लगवा ली थी. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जनवरी में व्हाइट हाउस से विदा होने से पहले ही डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी को वैक्सीन दे शॉट दिए गए थे. अमेरिकीवासियों से ये बात छिपाए रखी गई. हालांकि, रिपोर्ट में इसकी जानकारी नहीं दी गई कि ट्रंप-मेलानिया को कौन सी वैक्सीन लगी.

कोरोना से निपटने को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की काफी आलोचना हुई थी. उनकी गलत नीतियों की वजह से ही अमेरिका दुनिया में सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देश बना. इस खुलासे के बाद ट्रंप एक बार फिर से विरोधियों के निशाने पर आ गए हैं, क्योंकि उन्होंने कोरोना (Coronavirus) की सबसे ज्यादा मार झेल रही आम जनता पर खुद को तवज्जो दी.

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वैक्सीन तैयार करने का खुद को दिया था क्रेडिट
डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले रिकॉर्ड समय में वैक्सीन तैयार करने का पूरा क्रेडिट खुद को देते आए हैं. उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि उनकी कोशिशों के चलते ही अमेरिका को वैक्सीन मिल सकी. व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले उन्होंने कहा था, ‘उन्हें (डेमोक्रेट्स) यह कभी न भूलने दें कि वैक्सीन डेवलपमेंट के पीछे हम हैं. हमारी वजह से ही देश को इतनी जल्दी वैक्सीन मिल पाई’.

अमेरिका ने बनाई कौन सी वैक्सीन?
अमेरिका के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने मॉडर्ना और फाइजर बायोन्टेक वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दी है. मैसाचुसेट्स स्थित बायोटेक कंपनी मॉडर्ना ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज (NIAID) के साथ मिलकर RNA आधारित वैक्सीन बनाई है. आरएनए टीका मानव कोशिकाओं में प्रवेश करके काम करता है. वहीं, फाइजर फार्मास्युटिकल कंपनी और उसकी जर्मन सहयोगी कंपनी बायोएनटेक ने फाइजर बायोन्टेक नाम से वैक्सीन तैयार की है. ये टीका विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए मैसेंजर आरएनए (मॉडर्न वैक्सीन के समान) पर आधारित है.
अमेरिका में कोरोना के कितने केस?
अमेरिका में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 2.93 करोड़ से ज्यादा हो गया है. अब तक 5.29 लाख लोगों ने इस वायरस से जान गंवाई है. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि मई तक देश में इतनी वैक्सीन मौजूद होंगी कि हर वयस्क को वैक्सीनेट किया जा सकेगा. बाइडन का यह बयान इस लिहाज से खास हो जाता है कि कुछ दिन पहले हेल्थ मिनिस्ट्री ने इसके लिए अगस्त तक का वक्त तय किया था.
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