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स्पेस में अमेरिका बनाने जा रहा सुपर हाइवे? चीन को ऐसे देगा मात

स्पेस में अमेरिका बनाने जा रहा सुपर हाइवे? चीन को ऐसे देगा मात

प्रतीकात्मक तस्वीर.

प्रतीकात्मक तस्वीर.

अमेरिका के पास ऐसे बिजनेस पार्टनर और सहयोगी हैं, जो भविष्य में चंद्रमा और उससे आगे की यात्रा के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे (Superhighway in Space). ये एक ऐसा हाइवे होगा, जिसपर ईंधन भरवाने, अंतरिक्षयान की मरम्मत कराने और कूड़ा फेंकने जैसी सुविधाएं होंगी.

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    न्यूयॉर्क. अंतरिक्ष (Space) के मामले में तेजी से बढ़ते चीन को पछाड़ने के लिए अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार नजर आ रही है. सेना की तैयारी अब अंतरिक्ष में एक ‘सुपर हाइवे’ बनाने की है. ताकि लोगों की अंतरिक्ष तक पहुंच आसान की जा सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के पास ऐसे बिजनेस पार्टनर और सहयोगी हैं, जो भविष्य में चंद्रमा और उससे आगे की यात्रा के लिए इसका इस्तेमाल करेंगे (Superhighway in Space). ये एक ऐसा हाइवे होगा, जिसपर ईंधन भरवाने, अंतरिक्षयान की मरम्मत कराने और कूड़ा फेंकने जैसी सुविधाएं होंगी.

    चीन जिस तरह धरती और समुद्र में अपनी विस्तारवादी नीति अपना रहा है, उसी तरह वो अंतरिक्ष के क्षेत्र में भी कर रहा है. अमेरिका की सेना की कोशिश रहेगी कि चीन के अंतरिक्ष में ‘मेगास्ट्रक्चर’ बनाने से पहले वो अपना सुपर हाइवे बना ले. द सन की रिपोर्ट के अनुसार, एक सेमीनार में स्पेस फोर्स के ब्रिगेडियर जनरल जॉन ऑल्सन ने कहा, ‘हमने कई देशों की पॉलिसी देखी है, खासतौर पर चीन की. हम अपने पार्टनर्स की मदद से ये पहले करना चाहते हैं, तभी हम वो मानक निर्धारित कर सकेंगे और वो सिद्धांत बना सकेंगे, जिनपर हम भरोसा करते हैं.’

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    जरनल जॉन ने चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड़ानों के संगठन की भाषा अंग्रेजी है और मेरा मानना है कि अंतरिक्ष यात्रा में भी यही होना चाहिए, ना कि मंदारिन (चीन की भाषा) का इस्तेमाल हो. उन्होंने कहा, ‘मैं आप सबको ये बताना चाहता हूं कि चंद्रमा पर दोबारा जाने के लिए अमेरिका और चीन के बीच रेस चल रही है. दोनों ही देश चंद्रमा पर वो स्थान ढूंढ रहे हैं, जहां भविष्य में बेस तैयार किया जा सके.’

    चीन पृथ्वी की कक्षा में एक विशालकाय मेगास्ट्रक्चर बनाने की तैयारी कर रहा है. इस जगह पर सोलर पावर प्लांट, टूरिस्ट कॉम्पलैक्स, गैसे स्टेशन से लेकर एस्टेरॉयड माइनिंग तक की सुविधा होगी. इस संबंध में चीन की नेचुरल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफसी) ने एक पंचवर्षीय योजना की घोषणा की है.

    इसके तहत रिसर्चर्स को निर्देश दिया गया है कि वह प्रौद्योगिकी और तकनीक विकसित करें. अंतरिक्ष में किए जाने वाले इस निर्माण के लिए हल्के सामान का इस्तेमाल किया जाएगा. ताकि उसे रॉकेट के जरिए आसानी से पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचाया जा सके.

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    वैज्ञानिकों को ऐसी तकनीक की जरूरत पड़ेगी, जिससे कक्षा में चीजों को नियंत्रित किया जा सकेगा. वहीं चीन की सरकार ने भी कहा है कि अंतरिक्ष में बड़े प्रोजेक्ट पर काम किए जाने की तत्काल जरूरत है. जिसमें बड़े अंतरिक्षयान शामिल हैं. ताकि उन्हें पृथ्वी की कक्षा में भेजा जा सके. वहीं, ये इस तरह का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जिसमें कम से कम एक मील तक बड़ा सोलर पावर स्टेशन होगा, जो 2035 तक चीन के ग्रिड तक बिजली पहुंचाएगा. चीन पृथ्वी की कक्षा में कई स्पेस स्टेशन बनाने की योजना बना रहा है, जिनके सामने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन काफी छोटा दिखाई देगा.

    चीन ने यहां अपना स्पेश स्टेशन तियांगयोंग पहले ही बनाना शुरू कर दिया है. अब वो यहां नए मॉड्यूल और टेलीस्कोप भेजकर इसका आकार बड़ा कर रहा है. एनएसएफसी ने मेगास्ट्रक्चर को लेकर अधिक जानकारी नहीं दी है. नई जानकारी का मतलब केवल रिसर्च के लिए दिशा-निर्देश दिए जाने से है. चीन अपने स्पेस स्टेशन (Space Station) के जरिए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को चुनौती देना चाहता है. नासा, यूरोपीय संघ और दूसरे कई देशों के साथ मिलकर अंतरिक्ष पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का संचालन कर रहा है. इस वक्त अंतरिक्ष स्टेशन पर सात अंतरिक्षयात्री मौजूद हैं.

    Tags: Space

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