मीलों लंबे सुनसान रेगिस्तान में एयरक्राफ्ट लेकर अकेला रहता है ये शख्स, इस तरह गुजरती है जिंदगी

2007 से ही उटाह के रेगिस्तान में ईवो ज़डैरस्की अकेले रह रहे हैं (सांकेतिक फोटो, फोटो क्रेडिट- AP)
2007 से ही उटाह के रेगिस्तान में ईवो ज़डैरस्की अकेले रह रहे हैं (सांकेतिक फोटो, फोटो क्रेडिट- AP)

ईवो ज़डैरस्की 1984 में घर में ही बनाए गये एक हैंग ग्लाइडर (एक तरह का ग्लाइडर) की मदद से कम्युनिस्ट दौर (Communist era) के चेकोस्लोवाकिया (Czechoslovakia) से रूसी जासूसी एजेंसी KGB की नज़रें बचाकर ऑस्ट्रिया (Austria) भाग आये थे. जहां उन्हें राजनीतिक शरण दी गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 9:47 PM IST
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कई 100 मीलों का वीरान रेगिस्तान (Isolated Desert), जहां इंसान (Human) ही नहीं पशु-पक्षियों का भी नामो-निशान नहीं हो. ऐसी जगह पर अगर किसी इंसान को छोड़ दिया जाये तो वह किसी साधारण इंसान के लिए मौत (death) जैसी भयानक यातना से कम नहीं होगा. लेकिन एक इंसान ने ऐसी जिंदगी को अपनी मर्जी से खुशी-खुशी चुना है. ये शख्स हैं, ईवो ज़डैरस्की. जो तबसे सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करते आ रहे हैं, जब यह शब्द आम बोलचाल में शामिल भी नहीं हुआ था. वे 2007 से ही उटाह (Utah) के एक वीरान इलाके में एक एयरोप्लेन हैंगर में अकेले रह रहे हैं. हैंगर एक ऐसी अकेली बिल्डिंग होती है, जिसमें कोई एयरक्राफ्ट (Aircraft) पार्क किया जा सकता है.

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब उनसे पूछा गया कि आप ऐसे वीरान रेगिस्तान में क्यों पड़े हैं, तो वे अपनी कर्कश आवाज (कभी किसी से बात न करने के चलते ऐसी हुई) में कहते हैं, "मैं पहले चेकोस्लोवाकिया (Czechoslovakia) में था, फिर कैलिफोर्निया (California) में रहा. बाद में यहां चला आया." इस तरह से रोमांच से भरी अपनी कहानी (Adventurous Story) को वो यूं पेश करते हैं, जैसे ये सब आम हो. जबकि थोड़ी देर की बातचीत के बाद वे जब खुलते हैं तो वह किस्सा बताते हैं कि कैसे वे 1984 में घर में ही बनाए गये एक हैंग ग्लाइडर (एक तरह का ग्लाइडर) की मदद से कम्युनिस्ट दौर के चेकोस्लोवाकिया से रूसी जासूसी एजेंसी KGB की नज़रें बचाकर ऑस्ट्रिया (Austria) भाग आये थे. जहां उन्हें राजनीतिक शरण दी गई थी. उन्होंने इतने सीक्रेट तरीके से इस मिशन (mission) को अंजाम दिया था कि खुद उनकी मां को भी इस बात की जानकारी नहीं थी.

अपने प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए ईवो ने खरीद ली 400 एकड़ जमीन
बता दें कि 1984 का चेकोस्लोवाकिया, जो अब चेक रिपब्लिक और स्लोवाकिया दो देशों में बंट चुका है, एक कम्युनिस्ट सरकार शासित देश हुआ करता था. ईवो वहां से भाग जाना चाहते थे. वे अपने हवाई जहाजों को बनाने की स्वतंत्रता चाहते थे, एक व्यापार शुरू करना चाहते थे और वह करना चाहते थे, जिससे उन्हें खुशी मिले.
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ऑस्ट्रिया में मात्र 6 महीने गुजारने के बाद उन्हें अमेरिका के कैलिफोर्निया भेज दिया गया. जहां उन्होंने 1986 में एक प्रोपेलर कंपनी की स्थापना भी की थी. यह कंपनी धीरे-धीरे आगे भी बढ़ी और 2007 में उन्होंने उटाह के लूसिन में एक खाली पड़े एयरपोर्ट को खरीद लिया. ऐसा उन्होंने अपने कई सारे प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए किया था. यह इलाका 1936 से ही खाली पड़ा था. एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईवो ने यहां 400 एकड़ का इलाका खरीदने के लिए 99 हजार डॉलर खर्च किये थे. हालांकि जिस समय उन्होंने इसे खरीदा तब तक एयरपोर्ट एक रनवे से अधिक कुछ नहीं था. उन्होंने इसे खरीदने के बाद यहां एक 100x50 फीट का एक एयरक्राफ्ट हैंगर बनवाया, जिसे वे लूसिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट कहते हैं. इसी में वे रहते हैं और इसी में उनकी वर्कशॉप, गैरेज और घर सब है.

नहीं होती ऊब, कहते हैं- मुझे अकेलापन पसंद
ईवो कहते हैं कि हमेशा से छोड़ी हुई जगहों से उन्हें लगाव था. हालांकि वे इस जगह बिल्कुल अकेले हैं लेकिन ईवो का पूरा दिन अपनी वर्कशॉप में उठापटक करने, आस-पास के इलाकों में हाईकिंग करने, शिकार करने, मछली पकड़ने और ग्लाइडिंग आदि में बीत जाता है. हालांकि वे महीने में एक बार 45 मिनट की उड़ान भरकर ओगडेन तक जाते हैं ताकि खाने-पीने का जरूरी सामान लाया जा सके. बीच बीच में वे न्यू मैक्सिको और साउथ डकोटा के ऊपर भी उड़ान भरते हैं.

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हालांकि सुनने में ईवो की जिंदगी बहुत कठिन लग सकती है लेकिन वे मानते हैं कि उन्होंने ऐसी आजादी पा ली है, ज्यादातर लोग जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं. वे कुछ भी, कभी भी, कहीं भी कर सकते हैं. जब उनसे, उनकी तन्हा जिंदगी के बारे में पूछा जाता है तो वे सीधे-सीधे कहते हैं, "मैं इसे पसंद करता हूं. अगर ऐसा नहीं होता, तो मैं यहां होता ही नहीं."
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