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क्या है गुलियन-बैरे सिंड्रोम? जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन का इससे क्या संबंध है

जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन को लेकर चेतावनी जारी हुई है. ( प्रतीकात्‍मक चित्र )

जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन को लेकर चेतावनी जारी हुई है. ( प्रतीकात्‍मक चित्र )

अमेरिका में इन दिनों एक अजीब तंत्रिका संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी सिर उठा रही है, खास बात ये है कि ये बीमारी उन लोगों में हो रही है जिन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड-19 वैक्सीन लगवाई है, मामले बढ़ने के साथ ही देश के दवा नियामक ने इस उत्पाद से जुड़ी चेतावनी जारी की है. इस वैक्सीन की खास बात ये है कि इसका केवल एक डोज ही लगना होता है और अन्य वैक्सीन के मुकाबले इसको लाना-ले जाना, रख-रखाव ज्यादा आसान होता है. यही वजह है कि अविकसित और विकासशील देशों ने अपने यहां पर होने वाले टीकाकरण के लिए इसमें रुचि दिखाई है. भारत भी उन देशों में शामिल है.

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    वॉशिंगटन. अमेरिका में इन दिनों एक अजीब तंत्रिका संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी सिर उठा रही है. खास बात ये है कि ये बीमारी उन लोगों में हो रही है जिन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड- 19 वैक्सीन लगवाई है. मामले बढ़ने के साथ ही देश के दवा नियामक ने इस उत्पाद से जुड़ी चेतावनी जारी की है. इस वैक्सीन की खास बात ये है कि इसका केवल एक डोज ही लगना होता है और अन्य वैक्सीन के मुकाबले इसको लाना-ले जाना, रख-रखाव ज्यादा आसान होता है. यही वजह है कि अविकसित और विकासशील देशों ने अपने यहां पर होने वाले टीकाकरण के लिए इसमें रुचि दिखाई है. भारत भी उन देशों में शामिल है, जिसने यूएस में बनी इस वैक्सीन में रुचि दिखाई है. लेकिन अब जे एंड जे की वैक्सीन को अपने देश अमेरिका में ही अनुमति मिलना मुश्किल लग रहा है.

    आईए जानते हैं क्या है जे एंड जे से जुड़ी ताजा जानकारी

    जे एंड जे वैक्सीन के साथ कैसा खतरा
    यूएस खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बताया कि देश भर में 100 ऐसे लोग मिले हैं, जिन्हें जे एंड जे वैक्सीन लगाया गया था और अब वे गुलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से पीड़ित हैं. यूएस में करीब 13 लाख लोगों ने  जेएंडजे वैक्सीन लगवाई थी. कंपनी के मुताबिक प्राथमिक जानकारी के हिसाब से इसमें 95 लोगों को गंभीर रूप से बीमार पड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था और 1 की मौत हो गई थी. यूएस के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन (सीडीसी) ने कहा कि जीबीएस के ज्यादा मामले 50 वर्ष से ऊपर के पुरुषों में देखे गए हैं. वहीं जे एंड जे का कहना है कि जीबीएस के मामले वैक्सीन लगने के 6 हफ्ते या 42 दिन बाद बढ़े हैं. खाद्य एवं औषधि प्रशासन का कहना है कि वैक्सीन के बाद जीबीएस के मामले वैसे तो बहुत कम हैं लेकिन फिर भी अगर वैक्सीन लगने के बाद किसी को कमज़ोरी, शरीर में झुनझुनी, चलने में परेशानी, या चेहरे को हिलाने डुलाने में परेशानी होती है तो उसे तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए.
    वहीं जे एंड जे का कहना है कि अगर इनकी वैक्सीन लगने के बाद किसी तरह की कोई गड़बड़ी मिलती है तो वो इसे यूएस प्रशासन, यूरोपियन स्वास्थ्य एजेंसी, डब्ल्यूएचओ और दूसरे स्वास्थ्य संगठन के साथ रिपोर्ट साझा करेगी.

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    क्या होता है, गुलियन बैरे सिंड्रोम
    गुलियन बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम नर्व्स पर हमला करता है. कमज़ोरी और झुनझुनी इस बीमारी के आम लक्षण हैं. हालांकि ये बहुत तेजी से फैलता है और धीरे धीरे शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है. इस मामले मे ज्यादातर लोगों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है.
    हालांकि अभी तक जीबीएस होने का सही कारण पता नहीं चल सका है. दो-तिहाई मरीजों ने छह हफ्ते से पहले इन्फेक्शन की जानकारी दी थी, जिसमें सांस से जुड़ी और गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण शामिल है. वैसे तो ये एक लाइलाज बीमारी है, लेकिन कई इलाज बीमारी की अवधि को कम कर सकते हैं. ज्यादातर मरीज इस बीमारी से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं और इस बीमारी का मृत्यु दर 4-7 फीसद है.
    इससे पहले जीबीएस का मामला 1976 में यूएस में स्वाइन फ्लू टीकाकरण अभियान के दौरान सामने आया था. उसके बाद 2009 में एच1एन1 महामारी के दौरान भी इस तरह के मामले सामने आए थे.

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    जे एंड जे वैक्सीन का प्रकार क्या है
    जे एंड जे वायरल वेक्टर प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है, जो कोविड-19 बीमारी के खिलाफ सबसे व्यापक तौर इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन है. किसी भी वैक्सीन के काम करने का तरीका एक ही होता है कि पैथोजन जो बीमारी की वजह है उसका इम्यून सिस्टम से परिचय कराना, जिससे इम्यून सिस्टम खुद को भविष्य के लिए तैयार कर सके.

    वायरल वैक्टर वैक्सीन में वैज्ञानिक हानिरहित, संशोधित वायरस के विभिन्न प्रकार (जो वेक्टर या वाहक होते हैं) होते हैं. जिसे कुछ आणविक निर्देशों के साथ  मानव कोशिका में डाला जाता है. कोविड-19 के मामले में मानव कोशिका ये निर्देश पढ़ती है और नोवेल कोरोनावायरस का स्पाइक प्रोटीन तैयार करता है. जो इंसानों को संक्रमित कर देता है. जैसे ही शरीर स्पाइक प्रोटीन तैयार करता है, इम्यून सिस्टम सक्रिय हो जाता है और वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी तैयार करता है.

    ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनका वैक्सीन जो भारत में कोविशील्ड के नाम से बनाई जा रही है, रूस की स्पूतनिक V वैक्सीन, भी इसी वायरल वैक्टर प्लेटफॉर्म पर तैयार की गई है.

    जे एंड जे वैक्सीन को क्या कहा गया
    खाद्य एवं औषधि विभाग ने हाल ही में इस खबर के बाद  जे एंड जे वैक्सीन पर रोक लगा दी है. इससे पहले इस साल की शुरुआत में  यूएस ने इसे आपातकालीन स्तर पर तीसरी वैक्सीन के तौर पर अनुमति दी थी. इसके पहले भी एफडीए यूएस में वैक्सीन निर्माण क्षेत्र में कुछ गड़बड़ी मिलने पर इसके लाखों डोज पर रोक लगा दी थी. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जून में यूएस सरकार ने कंपनी को 6 करोड़ डोज़ को खराब बताकर लेने से इनकार कर दिया था. इससे पहले अप्रैल में वैक्सीन के बाद खून के थक्के जमने की शिकायत  भी मिली थी. जिसके बाद इसके निर्माण पर रोक लगा दी गई थी. जब सीडीसी ने डेटा का आकलन किया तो पाया कि 80 लाख लोगों में से 15 में खून से थक्का जमने के मामले सामने आए थे. इसके बाद वैक्सीन के स्थगन को हटा दिया गया था.

    क्या भारत को  जे एंड जे की वैक्सीन मिलेगी
    जे एंड जे वैक्सीन के ट्रायल में 72 फीसद क्षमता पाई गई थी और इसे 2-8 डिग्री तापमान पर 4.5 महीने तक रखा जा सकता है. ये वो बात थी जो इस वैक्सीन को भारत के लिए पूरी तरह से उपयुक्त बनाती है. क्योंकि इसे लाने ले जाने के साथ ही रखने में भी दिक्कत नहीं है. केंद्र ने वैक्सीन जो यूएस में इस्तेमाल हो रही है उसकी खेप के लिए रास्ता साफ कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक शासन ने कंपनी को आधिकारिक तौर पर जे एंड जे वैक्सीन को भारत में लाने और इसका निर्माण भारत में ही हैदराबाद की बायोलॉजिकल ई में ही करने को कहा है. भारत अब तक आपातकाल के आधार पर चार वैक्सीन को अनुमति दे चुका है इसमें कोविशील्ड, घरेलू वैक्सीन कोवैक्सिन, स्पूतनिक V और अमेरिका में बनी मॉडर्ना.

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