केवल स्किल्ड प्रोफेशनल्स को ही एच1बी वीजा देना चाहते हैं ट्रंप: व्हाइट हाउस

नई तकनीकी के संबंध में वाशिंगटन पोस्ट की लाइव चर्चा के दौरान एच-1बी वीजा पर राष्ट्रपति के विचारों के बारे में सवाल करने पर लिडल ने जवाब में कहा, 'ट्रंप चाहते हैं कि योग्य लोग ही अमेरिका आएं.'

भाषा
Updated: November 9, 2018, 12:42 PM IST
केवल स्किल्ड प्रोफेशनल्स को ही एच1बी वीजा देना चाहते हैं ट्रंप: व्हाइट हाउस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
भाषा
Updated: November 9, 2018, 12:42 PM IST
ट्रंप प्रशासन आईटी पेशेवरों में विशेष रूप से लोकप्रिय एच-1बी वीजा के वर्तमान प्रावधानों में कुछ बदलाव करना चाहता है. जिससे केवल स्किल्ड प्रोफेशनल्स को ही वीजा मिल सके और यह सिर्फ आउटसोर्सिंग का तरीका बनकर न रह जाए. व्हाइट हाउस में पॉलिसी कॉर्डिनेशन के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ क्रिस लिडल ने गुरुवार को वाशिंगटन में कहा कि राष्ट्रपति का मानना है कि बेहद कुशलता वाले क्षेत्र जैसे कि आईटी के क्षेत्र में शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग देश में रुकें. उन्होंने इस बात को कई बार सार्वजनिक तौर पर भी कहा है.

नई तकनीकी के संबंध में वाशिंगटन पोस्ट की लाइव चर्चा के दौरान एच-1बी वीजा पर राष्ट्रपति के विचारों के बारे में सवाल करने पर लिडल ने जवाब में कहा, 'ट्रंप चाहते हैं कि योग्य लोग ही अमेरिका आएं. स्पष्ट रूप से यह (एच-1बी वीजा) योग्यता आधारित लोगों के आने का हिस्सा है.' साथ ही उन्होंने माना कि अगर यह मुद्दा कांग्रेस में पहुंचा तो इसे लेकर काफी विवाद हो सकता है.

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माइक्रोसॉफ्ट और जनरल मोटर्स के पूर्व कार्यकारी लिडल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति प्रक्रिया की निगरानी करने और उसका समन्वयन करने के लिए नियुक्त किया गया है. उनका कहना है कि एक हद तक हम विधायिका के स्थान पर नियामक तरीका अपना सकते हैं. वैसे तो एच-1बी वीजा प्रणाली बहुत हद तक विधायिका के तहत आती है लेकिन हम इसे नियमित करके आउटसोर्सिंग में इसकी भूमिका को कम कर सकते हैं. अभी 1,20,000 ए-1बी वीजा है.

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वहीं गूगल, फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के अमेरिकी नियोक्ताओं के संगठन 'कम्पिट अमेरिका' का कहना है कि एच-1बी वीजा रोके जाने की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि हुई है. एच-1बी गैर-आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को सैद्धांतिक और तकनीकी विशेषज्ञता वाले कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है. आईटी कंपनियां भारत और चीन से हजारों-लाखों की संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए इसी वीजा पर निर्भर हैं.
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