ईरान के सामने आखिर क्यों बेबस दिख रहा है दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश?

ईरान के सामने आखिर क्यों बेबस दिख रहा है दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश?
राष्ट्रपति के खिलाफ़ महाभियोग की सुनवाई शुरू

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने शांति की अपील इसलिए की, ताकि खाड़ी के 20 देशों में मौजूद उसके 70 हजार से ज्यादा सैनिक और 100 सैन्य बेसों को सुरक्षित रखा जा सके.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 9, 2020, 1:30 PM IST
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वॉशिंगटन. अमेरिका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान के उस दावे को खारिज करते हुए कहा कि हवाई हमले में उसके 80 सैनिक मारे गए. ट्रंप ने कहा कि कोई भी अमेरिकी सैनिक इस हमले में हताहत नहीं हुआ. इसके साथ ही ट्रंप ने साफ कर दिया कि अमेरिका, ईरान पर किसी तरह की सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा. अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों मानना है कि ट्रंप के ऐसा इसलिए किया, ताकि खाड़ी के 20 देशों में मौजूद उसके 70 हजार से ज्यादा सैनिक और 100 सैन्य बेसों को सुरक्षित रखा जा सके.

विश्लेषकों का मानना है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने की चेतावनी देते तो खाड़ी देशों में उसके सैनिकों को खतरा बढ़ सकता था. ईरान ने बुधवार को इराक स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर 22 मिसाइलें दागी थीं. ईरान ने मिसाइल से अमेरिका के दो एयरबेस अल-अशद और इरबिल को निशाना बनाने की कोशिश की. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि ईरान ने जानबूझकर मिसाइलें US एयरबेस पर नहीं दागीं. ताकि अमेरिकी हमलों से बचा जा सके. सैटेलाइट इमेज में भी यह साफ नजर आ रह है.

ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को बनाया था बंधक
ईरान की फारस न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बुधवार देर रात 1:45 से 2:15 के बीच 22 मिसाइलें दागी गई. ऐन अल-असद एयर बेस पर फतेह-313 मिसाइल से हमला किया गया. फतेह मिसाइल का ईरान ने 2015 में परीक्षण किया था. इसकी मारक क्षमता 500 किमी है. 40 साल में ईरान ने पहली बार अमेरिका पर सीधा हमला किया. इससे पहले 1979 में ईरान ने तेहरान स्थित दूतावास में अमेरिका के 52 राजनयिकों को 444 दिन तक बंदक बनाकर रखा था.
ईरान ने दी धमकी


ईरान के रक्षा मंत्री आमिर हातामी ने कहा कि यदि अमेरिका इस हमले के जवाब में देता है और हमला करता है, तो उसे बहुत बुरा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. वहीं विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा कि यह हमला हमने आत्मरक्षा के लिए किया. हम युद्ध नहीं चाहते. वहीं यूरोपीए और नाटो एकजुटता दिखाते हुए हमले की निंदा की है. रूस के राष्ट्रपति और ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन ने दोनों देशों से तनाव कम करने की अपील की है.

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