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PM Modi के US दौरे से क्या दोनों देशों के बीच व्‍यापारिक रिश्‍ते बन पाएंगे ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के व्‍यापक परिणाम सामने आएंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के व्‍यापक परिणाम सामने आएंगे.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) के बीच होने वाली अहम बैठक को लेकर कई सवाल सामने हैं. इनको लेकर सीएनएन-न्यूज 18 से साक्षात्कार के दौरान अमेरिकी-भारतीय व्यापार परिषद (American-Indian Business Council) की प्रमुख निशा देसाई बिसवल (Nisha Desai Biswal) ने बताया कि दोनों ही देश के नेता इस बैठक को लेकर काफी उत्सुक हैं. बिसवल ने कहा कि भारत को इस वार्ता से दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक अवसरों में विस्तार की उम्मीद है.

  • News18Hindi
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    न्‍यू यॉर्क . भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) मंगलवार को अपने पांच दिवसीय दौरे पर अमेरिका (America) पहुंचे. इस दौरान वह क्वाड सम्मेलन (quad summit) में हिस्सा लेंगे, यूएन की जनरल असेंबली (United Nation General Assembly) में भाषण देंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (US President Joe Biden) के साथ व्हाइट हाउस में द्विपक्षीय बैठक में भाग लेंगे. 2014 में सत्ता संभालने के बाद मोदी का ये सातवां अमेरिकी दौरा है, और सत्ता संभालने के बाद बाइडेन से ये उनकी पहली मुलाकात है. इस मुलाकात को लेकर सीएनएन-न्यूज 18 से साक्षात्कार के दौरान अमेरिकी-भारतीय व्यापार परिषद (American-Indian Business Council) की प्रमुख निशा देसाई बिसवल (Nisha Desai Biswal) ने बताया कि दोनों ही देश के नेता इस बैठक को लेकर काफी उत्सुक हैं. बिसवल ने कहा कि भारत को इस वार्ता से दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक अवसरों में विस्तार की उम्मीद है.

    बिसवल से हुई बातचीत के संपादित अंश
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन की इस पहली व्यक्तिगत द्विपक्षीय बैठक से आप क्या ठोस परिणामों की उम्मीद लगा रही हैं ?
    – इस बैठक को लेकर राष्ट्रपति बाइडेन और मोदी दोनों ही काफी उत्सुक हैं. इससे पहले कई दूसरे मौकों पर फोन पर दोनों की बातचीत हो चुकी है, और इस साल हुई क्वाड लीडर की वर्चुअल मीटिंग में भी हमने उन्हें देखा था. लेकिन ये बैठक कई वजहों से खास है. सबसे पहले, जैसा की आपने वैश्विक सम्मेलन में देखा जहां प्रधानमंत्री ने भाषण दिया और राष्ट्रपति बाइडेन ने भी इस बारे में बात की. महामारी को हराने में भारत और अमेरिका के बीच जो सहयोग रहा वो दोनों ही नेताओं के लिए अहम रहा है और ये बातचीत का एक अहम विषय होगा.
    इसके अलावा मौसम परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में दोनों देशों के बीच सहयोग भी बातचीत का अहम विषय होगा, मौसम परिवर्तन विषय को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन कैरी भी पिछले हफ्ते भारत के दौरे पर थे. इस द्विपक्षीय बैठक के साथ साथ क्वाड की बैठक भी हो रही है, और इस बैठक का अहम बिंदु भारत और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच आपसी सहयोग रहेगा, जिसका लक्ष्य उन्नत तकनीक, जलवायु और समुद्री क्षेत्र को मुक्त बनाए रखना सुनिश्चित करने पर होगा, ताकि चारों लोकतंत्रों के पास कई दिशाओं में व्यापार करने के अवसर हों और इंडो-पेसिफिक सभी के लिए खुला रहे. इसके साथ ही इंडो-पेसिफिक वैश्विक सुरक्षा, समृद्धि को बरकरार रखना इसका अहम पहलू होगा. ये दोनों देशों के बीच व्यापारिक नज़रिए से बेहद अहम होगा.
    हमें इस बात की भी उम्मीद है कि द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक अवसरों की बढ़ोतरी पर बातचीत होगी. हाल के वक्त में हम भारत के तरफ से सुन चुके हैं कि वह अमेरिकी निवेश और उच्च स्तर के व्यापार में दिलचस्पी रखते हैं. मैं उम्मीद कर रही हूं कि शायद दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते या सीमित व्यापार समझौते की संभावनाओं को तलाशने की शुरूआत हो सके.

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    जहां तक ट्रेड डील का सवाल है, तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रहते हुए भी इस पर बातचीत हुई थी लेकिन उसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था, उस दौरान क्या बाधाएं रही और क्या आपको लगता है कि अब वो बाधाएं दूर हो जाएंगी?

    – निश्चित तौर पर, व्यापार को लेकर हमारे बीच मतभेद रहे हैं और इतनी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ ऐसा होना स्वाभाविक है. लेकिन मुझे ये भी लगता है कि व्यापारिक समझौते में हम क्या प्राथमिकता चाहते हैं इसे लेकर हम बेमेल अपेक्षाओं से भी पीड़ित हैं. जब अमेरिका को लग रहा था कि मामला बन गया है तब भारत तैयार नहीं था और जब भारत इसके लिए तैयार हुआ तो अमेरिका ने कदम हटा लिए. कोई बड़े की उम्मीद लगाए बैठा है, कोई छोटा और धीमा चाहता है. मुझे लगता है कि अब वक्त आ गया है जब इन बातों को किनारे करते हुए हम इस बात पर ध्यान दें कि अपनी अर्थव्यवस्थाओं और नीतियों को कैसे बेहतर कर सकते हैं और इसकी बदौलत कैसे परिणाम हासिल कर सकते हैं.
    भारत को अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए जिसका अमेरिका समर्थन करता है. उसके लिए वैश्विक आर्थिक ताकत बनने की ज़रूरत है. और वैश्विक आर्थिक ताकत बनने के लिए वैश्विक आर्थिक तंत्र का हिस्सा बनना पड़ेगा. अमेरिका के लिए हमें व्यापार की हिचक से पार पाने की ज़रूरत है जो पूर्व प्रशासन और शायद वर्तमान प्रशासन में भी मौजूद रही है. हमें व्यापार में अग्रणी होने की ज़रूरत है और शायद ये वार्ता उस बात के लिए एक सुअवसर है.

    कोविड-19 महामारी से देशों और कंपनियों ने एक बड़ी सीख हासिल की है कि चीन पर वह अति आत्मनिर्भरता नहीं रखना चाहते हैं, आपको लगता है कि भारत इसका विकल्प साबित हो सकता है.
    मुझे लगता है कि सप्लाई चैन (आपूर्ति श्रंखला) के जोखिम को कम करने को लेकर बातचीन न केवल व्हाइट हाउस या प्रधानमंत्री कार्यालय में हो रही है, बल्कि अमेरिकी बोर्डरूम से लेकर दुनियाभर में ये बातचीत का अहम विषय है. जब हम जोखिम कम करने और आपूर्ति श्रंखला की बात करते हैं, तो उनका क्षेत्रीयकरण और विविधता पर बात करनी होगी, हमें ये सुनिश्चित करना होगा कि भारत में इस आपूर्ति श्रंखला को बेहतर माहौल मिले और वो यहां लंबे वक्त के लिए निवेश करें.
    आपूर्ति श्रंखला एक बड़ा निवेश है इसलिए ऐसा माहौल और नियामक तैयार करना जिससे उन्हें लंबे वक्त तक के लिए स्थिरता मिले यही कंपनियों को रोकने में अहम है. भारत का बड़ा कदम उठाने का यही सही वक्त है और हमने इसकी शुरूआत भी कर दी है. भारत ने निवेश को आकर्षित करने के लिए हाल के महीनों में पीएलआई योजना में कई महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं. निवेशक यहां पर नियामकों में स्थिरता देख रहा है, जिसमें पूर्वव्यापी कर देयता पर एक बड़ा कदम भी शामिल है. ये सब वो उपाय हैं जो एक आत्मविश्वास पैदा करते हैं.

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    कुछ कंपनियों के सीईओ भी प्रधानमंत्री मोदी से मिलने वाले हैं, उनकी क्या अपेक्षाएं हैं. ऐसा क्या है जिसकी वो भारत से अपेक्षा या मांग रखते हैं और प्रधानमंत्री से उस पर बात कर सकते हैं.
    – मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री कुछ भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण उद्योंगों के बारे में सोच रहे हैं. चाहे फिर वो ड्रोन तकनीक हो, जनरल एटोमिक्स पर भी बातचीत हो सकती है. कुछ कंपनियां जिनके बारे में मैंने अखबार में पढ़ा था. मुझे लगता है ये सूची बहुत काम की है. कुछ कंपनियां जो 5जी, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, क्लाइमेट और क्लीन एनर्जी तकनीक से जुडी हुई है. मुझे लगता है कि ये इस बात की ओर इशारा करता है कि प्रधानमंत्री भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था और आने वाले वर्षों में वैश्विक वाणिज्य को आगे बढ़ाने वाली उन्नत तकनीक के लिए तैयार कर रहे हैं.

    क्वाड शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हमने उस घोषणा को सुना जिसे ओकस कहा जाता है. ये एक तरह का सैन्य गठबंधन है, आपको क्या लगता है कि अमेरिका चीन का मुकाबला करने के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है.
    – अमेरिका की ओकस को लेकर क्या मंशा या आकांक्षाए हैं उस पर मेरा बात करना उचित नहीं है. लेकिन मैं आपको क्वाड के ढांचे के बारे में बता सकती हूं, जिसे तब शुरू किया गया था जब मैं सरकार में थी. इसका मतलब न सिर्फ रणनीतिक या सुरक्षा के ढांचे से हैं बल्कि ये एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां हमारे चारों लोकतंत्र अपना नजरिया साझा कर सकते हैं और एक व्यापक स्तर की साझेदारी खड़ी कर सकते हैं. आपने देखा होगा इससे पहले क्वाड की बैठक का अहम बिंदु क्लाइमेट, कोविड-19 और तकनीक में बढ़ोतरी था. मुझे लगता है कि क्वाड में इसी तरह से विषयों का विस्तार होता रहेगा और आने वाले वक्त में इसमें शिक्षा और कोविड पर केंद्रित मुद्दे भी शामिल होंगे. हालांकि मुझे लगता है कि क्वाड ऐसा मंच है जहां पर भविष्य की अर्थव्यवस्था, डिजिटिल सिद्धातों पर आधारित आर्थिक एजेंडा पर बल देना, तकनीक पर निवेश पर आधारित बातचीत के लिए भी बहुत गुंजाइश है. ये वो विषय है जो आने वाले सालों में इंडो-पैसिफिक देशों के लिए बेहद अहम हैं. आप देखियेगा कि किस तरह क्वाड का महत्व बढ़ता है और इसके क्षेत्रों में विकास होता है.

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