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अफगानिस्‍तान के मौजूदा हालात से खुश नहीं हैं अमेरिकी जनरल, बोले- 20 साल में खोए 242 सैनिक

अमेरिका ने साफ किया है कि तालिबान के राज को मान्यता देने को लेकर अमेरिका किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है.

अमेरिका ने साफ किया है कि तालिबान के राज को मान्यता देने को लेकर अमेरिका किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है.

यूएस चीफ ऑफ स्टाफ अध्यक्ष जनरल मार्क मिले (General Mark Milley) ने कहा, जब हम पिछले 20 सालों को याद करते हैं तो हमारे अंदर गुस्‍सा और दर्द दोनों ही पैदा होता है. पिछले 20 सालों में जिस तरह से हमने इराक (Iraq) और अफगानिस्‍तान (Afghanistan) में अपने 242 सैनिकों को खोया है वह परेशान करने वाला है.

  • News18Hindi
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    वॉशिंगटन. अफगानिस्‍तान (Afghanistan) से 31 अगस्‍त को अमेरिकी सेना ( US Army) के आखिरी जहाज के उड़ान भरने के साथ ही 20 साल से अफगानिस्‍तान में तालिबान (Taliban) से जारी जंग का अंत हो गया. अफगानिस्‍तान में पिछले 20 साल में जो कुछ भी हुआ उसे यादकर अब अमेरिकी जनरल ने अपना गुस्‍सा और दर्द बयां किया है. अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान के लड़ाकों ने एक बार फिर अफगानिस्‍तान पर कब्‍जा कर लिया है. इस पूरे घटनाक्रम पर अब यूएस चीफ ऑफ स्टाफ अध्यक्ष जनरल मार्क मिले ने कहा, जब हम पिछले 20 सालों को याद करते हैं तो हमारे अंदर गुस्‍सा और दर्द दोनों ही पैदा होता है. पिछले 20 सालों में जिस तरह से हमने इराक और अफगानिस्‍तान में अपने 242 सैनिकों को खोया है वह परेशान करने वाला है.

    बता दें कि अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद अफगानिस्‍तान में जिस तरह के हालात पैदा हुए उससे अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन के फैसले की काफी आलोचना की जा रही है. हालांकि बाइडेन प्रशासन ने सभी आलोचनाओं को खारिज कर दिया है और साफ किया है कि उन्‍होंने जो फैसला लिया है वह पूरी तरह से सोच समझकर लिया है. बता दें कि अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप, कई रिपब्लिकन नेताओं के साथ रूस और चीन के अधिकारियों ने भी जो बाइडेन के फैसले की आलोचना की है.

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    तालिबान द्वारा अफगानिस्‍तान में कब्‍जे के बीच जिस तरह से अमेरिकी सेना की वापसी हुई है उसे कुछ लोग बाइडेन प्रशासन की बड़ी गलती मानते हैं. अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा था, जो बिडेन ने जिस तरह से अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्‍तान से बुलाया है वह सेना की वापसी नहीं, तालिबान के सामने अमेरिका का आत्‍मसमर्पण है.

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    जनरल मार्क मिले ने पेंटागन संवाददाता सम्मेलन में कहा, हम नहीं जानते कि तालिबान का भविष्‍य क्‍या होगा लेकिन मैं अपनी व्‍यक्तिगत अनुभव से कह सकता हूं कि यह एक क्रूर समूह है. ये समूह अपने अंदर बदलाव लाता है या नहीं ये देखा जाना अभी बाकी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा कि तालिबान के राज को मान्यता देने को लेकर अमेरिका किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं है. उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्‍तान में बदले हालात के बाद अमेरिका ने जिन भी देशों से बात की है वह भी किसी भी तरह की हड़बड़ी में दिखाई नहीं पड़ते हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तालिबान जिस तरह का व्यवहार अपनाता है उस पर निर्भर करेगा कि दूसरे देश तालिबान के बारे में क्‍या सोचते हैं.

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