तमाम विवादों के बावजूद एमी कॉनी बैरट ने US सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पद की शपथ ली

एमी कॉनी बैरट ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति की शपथ ली.
एमी कॉनी बैरट ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति की शपथ ली.

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय (US Supreme Court) के 115वें न्यायमूर्ति के तौर पर एमी कॉनी बैरट (Amy Coney Barrett) ने सोमवार रात को शपथ ले ली. इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप भी मौजूद रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 27, 2020, 1:21 PM IST
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वाशिंगटन. एमी कॉनी बैरट (Amy Coney Barrett) ने सोमवार रात अमेरिकी उच्चतम न्यायालय (US Supreme Court) के 115वें न्यायमूर्ति के तौर पर शपथ ली. इससे पहले सीनेट ने उनकी उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति पद पर नियुक्ति की पुष्टि की थी. राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के लिए इसे एक बड़ी जीत माना जा रहा है. रिपब्लिकन बहुमत वाले सीनेट ने 48 के मुकाबले 52 वोट देकर बैरट के नाम की पुष्टि की.

न्यायमूर्ति क्लैरेंस थॉमस ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में एक समारोह में बैरेट को संवैधानिक शपथ दिलाई. ट्रंप भी इस दौरान वहां मौजूद रहे. शपथ लेने के बाद बैरेट ने कहा, 'मुझे आज यहां खडे़ होकर बेहद सम्मानित महसूस हो रहा है.' वहीं ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका, अमेरिका के संविधान और निष्पक्ष एवं तटस्थ कानून के लिए यह एक महत्वपूर्ण दिन है.' डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडेन ने सीनेट के बैरेट के नाम की पुष्टि करने पर निशाना साधते हुए कहा कि नए न्यायाधीश का चयन तीन नवम्बर को चुनाव जीतने के बाद विजेता द्वारा किया जाना चाहिए था.

करीब 200 लोगों की उपस्थिति में जस्टिस क्लैरेंस थॉमस ने बैरेट को संविधान की शपथ दिलाई. शपथ लेने के बाद बैरेट ने कहा कि वो मानती हैं कि "एक जज का काम है कि वो नीतियों को लेकर अपनी पसंद से प्रभावित ना हो" और वो "अपना काम बिना किसी डर या पक्षपात के" करेंगी. न्यायाधीश रूथ बदर गिन्सबर्ग के सितम्बर में निधन के बाद यह पद खाली हुआ था. ‘एपी’ की खबर के अनुसार प्रधान न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स मंगलवार को अदालत में एक निजी समारोह में संघीय अपील अदालत की पूर्व न्यायाधीश बैरट को दूसरी शपथ दिलाएंगे, जिसे न्यायिक शपथ कहा जाता है.



हुआ था विवाद
यह पहली बार था जब राष्ट्रपति चुनाव के इतनी करीब सुप्रीम कोर्ट में किसी जज की नियुक्ति हुई. यह अमेरिका के आधुनिक इतिहास में पहली बार था जब अल्पसंख्यक पार्टी ने राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत जज को जरा भी समर्थन ना दिया हो. डेमोक्रेट सांसदों ने कई हफ्तों तक यह कहा कि उनकी नियुक्ति पर मतदान में गलत तरह से जल्दबाजी की जा रही है. यहां तक की रविवार को पूरी रात जिरह करते हुए उन्होंने ने जोर दे कर कहा कि रिक्त पद को भरने के लिए किसी का नाम मनोनीत करने का अधिकार उसे मिलना चाहिए जो तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनावों में अपनी जीत दर्ज करे.



चुनावों से ठीक एक सप्ताह पहले कई महत्वपूर्ण मामलों में फैसला लंबित है और बैरेट का मत इनमें से कई मामलों में निर्णायक साबित हो सकता है. इनमें नार्थ कैरोलाइना और पेंसिल्वेनिया राज्यों में ऐब्सेंटी बैलट की समय सीमा बढ़ाना और ट्रंप की इमरजेंसी अपील कि मैनहैटन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी को उनके आयकर रिटर्न हासिल करने से रोका जाए शामिल हैं. 10 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में ओबामा युग के अफोर्डबल केयर कानून पर भी सुनवाई होनी है, जिसे ट्रंप के कहने पर चुनौती दी गई है.
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