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HIV पीड़ित पांच में से तीन लोगों को ही मिल पाती है दवा

भाषा
Updated: July 18, 2018, 7:45 PM IST
HIV पीड़ित पांच में से तीन लोगों को ही मिल पाती है दवा
सांकेतिक तस्वीर

एचआईवी का इलाज जिन दवाइयों से किया जाता है, उन्हें एंटीरेट्रोवायरल मेडिसिन कहा जाता है. ये दवाइयां एचआईवी वायरस को शरीर से बाहर नहीं निकालती हैं, बल्कि उनको अपनी तादाद बढ़ाने से रोकती हैं ताकि बीमारी की गति धीमी हो जाए.

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संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी/एड्स एजेंसी ने बुधवार को बताया कि एचआईवी से संक्रमित पांच में से कम से कम तीन लोगों ने वर्ष 2017 में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ली. दुनिया भर में ऐसे लोगों की संख्या 2.17 करोड़ है और यह एंटी-एड्स दवा तक पहुंच का नया रिकॉर्ड है.

एचआईवी का इलाज जिन दवाइयों से किया जाता है, उन्हें एंटीरेट्रोवायरल मेडिसिन कहा जाता है. ये दवाइयां एचआईवी वायरस को शरीर से बाहर नहीं निकालती हैं, बल्कि उनको अपनी तादाद बढ़ाने से रोकती हैं ताकि बीमारी की गति धीमी हो जाए. एंटीरेट्रोवायरल दवाइयों को “एआरवी” कहते हैं. इन दवाइयों द्वारा एचआईवी के इलाज की प्रक्रिया को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी या एआरटी कहा जाता है.

यूएनएड्स की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में 3.69 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित थे. इनमें से 1.52 करोड़ लोगों को आवश्यक दवा मिली.

एजेंसी ने नए संक्रमणों और मौतों की संख्या में कमी लाने में हुई प्रगति की प्रशंसा की, लेकिन उसने इंसानों के मरने की बढ़ती संख्या पर अफसोस भी जताया. 1980 के दशक की शुरुआत में इस बीमारी का पता चला था और तब से करीब आठ करोड़ लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं और 3.54 करोड़ लोगों की मौत हो चुकी है.



एजेंसी ने कहा कि अब तक हुई प्रगति से इसके खतरे पर तो विराम लगा है लेकिन उसने यह चेतावनी दी है कि इस बीमारी पर किए जाने वाले खर्च एवं दुनिया के ध्यान में कमी आई है.

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गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रम्प के शासन में अमेरिकी प्रशासन ने इस पर होने वाले खर्च में कटौती की धमकी दी है. अमेरिका एड्स कार्यक्रम पर सबसे अधिक धन खर्च करने वाला देश रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य है कि वर्ष 2020 तक एचआईवी संक्रमित लोगों में से 90 प्रतिशत अपनी स्थिति को जानें. उनमें कम से कम 90 प्रतिशत को निश्चित रूप से एआरटी प्राप्त होना चाहिए और उनमें से 90 प्रतिशत के एचआईवी विषाणु सक्रिय नहीं होने चाहिए.

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First published: July 18, 2018, 5:14 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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