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तेजी से पिघल रहा है आर्कटिक का 'लास्‍ट आइस एरिया', 2030 की गर्मियों तक खत्‍म हो जाएगी बर्फ

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 4:04 PM IST
तेजी से पिघल रहा है आर्कटिक का 'लास्‍ट आइस एरिया', 2030 की गर्मियों तक खत्‍म हो जाएगी बर्फ
लास्‍ट आइस एरिया में 2016 तक 41,43,980 वर्ग किमी बर्फ थी, जो अब 9.99 लाख वर्ग किमी रह गई है.

साइटेकडेली (SciTechDaily) की रिपेार्ट के मुताबिक, 'लास्ट आइस एरिया' (Last Ice Area) दुनिया का सबसे पुराना (Oldest) और सबसे मोटी (Thickest) बर्फ की चादर वाला इलाका है. जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और ग्‍लो‍बल वार्मिंग (Global Warming) के कारण अब यह दोगुनी तेजी से पिघल रहा है. इस एरिया में 2016 तक 41,43,980 वर्ग किमी बर्फ थी, जो अब 9.99 लाख वर्ग किमी रह गई है. अगर इसी गति से यह पिघलती (Melt) रही तो 2030 तक यहां से बर्फ खत्म (Icefree) हो जाएगी.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 4:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. ग्‍लोबल वार्मिंग के कारण पूरी दुनिया प्राकृतिक आपदाओं (Natural Disaster) के खतरों से जूझ रही है. साथ ही और बड़ी प्राकृतिक आपदाओं के संकट से घिरी हुई. एक अध्‍ययन के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण आर्कटिक सागर (Arctic Ocean) की सबसे पुरानी और सबसे मोदी बर्फ की चादर वाले इलाके पर संकट खड़ा हो गया है. इस इलाके को 'लास्‍ट आइस एरिया' (Last Ice Area) कहा जाता है. इस एरिया की बर्फ अब दोगुनी रफ्तार से पिघल रही है. जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स (Geophysical Research Letters) में प्रकाशित अध्‍ययन से पता चला है कि ग्रीनलैंड (Greenland) के उत्‍तर में मौजूद आर्कटिक सागर की बर्फ उम्‍मीद से ज्‍यादा तेजी से पिघल रही है.

तेजी से बदल रहा है ग्रीनलैंड और कनाडा के आसपास का मौसम
रिपोर्ट के मुताबिक, इस एरिया में 2016 तक 41,43,980 वर्ग किमी बर्फ थी, जो अब 9.99 लाख वर्ग किमी रह गई है. अगर यही हाल रहा तो साल 2030 की गर्मियों तक 'लास्‍ट आइस एरिया' से बर्फ गायब हो सकती है. आर्कटिक की बर्फ पिघलने से ग्रीनलैंड और कनाडा (Canada) के आसपास का मौसम (Weather) बदल रहा है. लास्‍ट आइस एरिया में अभी से गर्मी (Summers) बढ़ गई है. यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो (University of Toronto) में वायुमंडलीय भौतिक वैज्ञानिक (Atmospheric Physicist) केंट मूर ने बताया कि 1970 के बाद से अब तक आर्कटिक में करीब 5 फीट बर्फ पिघल चुकी है यानी हर 10 साल में करीब 1.30 फीट बर्फ पिघल रही है. ऐसे में समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है. नेशनल स्‍नो एंड आइस डाटा सेंटर (NSIDC) के मुताबिक, आर्कटिक क्षेत्र में मौजूद ज्‍यादातर बर्फ की चादर सिर्फ एक से चार साल पुरानी है.

आर्कटिक समुद्र पर करीब 1.20 लाख साल पहले आखिरी बार बर्फ खत्म हुई थी.


एक लाख साल पहले आखिरी बार खत्‍म हुई थी आर्कटिक की बर्फ
अध्‍ययन के मुताबिक, लास्‍ट आइस एरिया के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र की बर्फ की प्रकृति (Nature of Ice) में आ रहे बदलाव में अंतर है. हर साल दोनों क्षेत्रों की बर्फ की मोटाई बढ़ने-घटने में अंतर आ चुका है. वहीं, बर्फ की प्रवाह (Motion Patterns) में भी खासा अंतर नजर आ रहा है. आर्कटिक की बर्फ पिघलने (Melt) का असर पूरी दुनिया में देखने को मिलेगा. आर्कटिक समुद्र पर करीब 1.20 लाख साल पहले आखिरी बार बर्फ खत्म हुई थी. ध्रुवीय इलाके में तेजी से बढ़ते तापमान (Temperature) के कारण ये स्थिति फिर पैदा हो सकती है. इसी से ब्रिटेन (Britain) में बाढ़ (Flood) के हालात हैं. अमेरिका (US) में बेमौसम तूफान भी इसी वजह से आ रहे हैं.

बर्फ के साथ पूरी तरह खत्‍म हो जाएंगे इस इलाके के जीव-जंतु
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आर्कटिक से बर्फ खत्म हो जाती है तो दुनियाभर में तापमान बढ़ जाएगा और मौसम में कई तरह के बदलाव होंगे. ग्लोबल वार्मिंग की स्थिति भी बदतर हो जाएगी. आर्कटिक क्षेत्र में आर्कटिक महासागर, कनाडा का कुछ हिस्सा, ग्रीनलैंड, रूस (Russia) का कुछ हिस्सा, अमेरिका का अलास्का, आइलैंड (Iceland), नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड पड़ते हैं. वहीं, 'लास्ट आइस एरिया' में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतु रहते हैं. अगर इसी रफ्तार से बर्फ पिघलती रही तो पोलर बेयर, व्हेल, पेंग्विन और सील जैसे जीव-जंतु यहां से पूरी तरह खत्म हो जाएंगे.

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First published: November 15, 2019, 4:04 PM IST
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