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क्या आप भी फूड डिलिवरी एप से खाना मंगाने के हैं शौकीन तो हो जाएं सावधान, WHO ने किया चौंकाने वाला खुलासा!

क्या आप भी फूड डिलिवरी एप से खाना मंगाने के हैं शौकीन तो हो जाएं सावधान, WHO ने किया चौंकाने वाला खुलासा!

कोरोना महमारी के बाद मोटापे की समस्या और बढ़ी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर-आभार twitter)

कोरोना महमारी के बाद मोटापे की समस्या और बढ़ी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर-आभार twitter)

WHO के मुताबिक, दुनियाभर के बच्चों में मोटापा की समस्या बढ़ती जा रही है. ऑनलाइन गेम और फूड ऐप इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है. अगर बात यूरोप की करें तो यहां की स्थिति और भी गंभीर है. डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप के 60 फीसदी वयस्क और एक तिहाई बच्चे अधिक वजन वाले या मोटे हैं.

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दुनियाभर में मोटापा एक ऐसी समस्या बन कर उभर रहा है, जिसने सभी को चिंता में डाल दिया है. खास बात यह है कि इसके शिकार सबसे ज्यादा बच्चे हो रहे हैं. शारीरिक मेहनत का अभाव, बैठे-बैठे खाना, और जंक फूड के चलन ने मोटापे की समस्या में तेजी से इजाफा किया है. वहीं कोविड के बाद तो हाल बद से बदतर हो गए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मुताबिक, यूरोप के करीब 60 फीसद वयस्क और एक तिहाई बच्चे ज्यादा वजन और मोटापे के शिकार हैं. यूरोप से आगे अमेरिका है, जहां मोटापा एक महामारी का रूप ले चुका है.

स्थिति पहले से ही बुरी है, ऐसे में फूड डिलीवरी एप की वजह से लगातार लोग मोटापे के शिकार हो रहे हैं. डब्लूएचओ की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में होने वाली कुल मौतों के 13 फीसद के पीछे की एक बड़ी वजह मोटापा है. रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि यूरोप में सालाना कम से कम 2 लाख लोगों की मौत कैंसर से होती है और मोटापा इसका सबसे बड़ा कारण है.

जटिल चुनौती है मोटापा

शरीर में चर्बी ज्यादा होना कई बीमारियों को न्यौता देता है. जिसमें 13 तरह के कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज, दिल की समस्या और फेफड़ों की बीमारी शामिल है. यही नहीं यह विकलांगता की भी बड़ी वजह है. मोटापा एक जटिल बीमारी होती है जो अनहेल्दी फूड खाने और शारीरिक गतिविधि के अभाव में पनपती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के क्षेत्रीय निदेशक (यूरोप) डॉ हेन्स क्लूज का कहना है कि मोटापा ऐसी बीमारी है जो किसी तरह की सीमा को नहीं मानता है. यूरोप के कई क्षेत्रों में लोग किसी ना किसी तरह से मोटापे के शिकार हैं. इसे नियंत्रित करने का एकमात्र तरीका एक मजबूत स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है.

फूड डिलीवरी एप की भूमिका

दुनिया के तमाम विकसित और विकासशील देश दिन पर दिन डिजिटल होते जा रहे हैं. किसी भी तरह की कोई भी जरूरत का समाधान फोन में मौजूद तमाम ऐप में है. यूरोप में इसी डिजिटल खाने के माहौल ने बहुत बुरा असर डाला है. लोग कब, क्या और कैसे खाते हैं. इस पर बारीकी से नजर रखी जानी चाहिए क्योंकि यह ‘मील डिलीवरी एप’ उच्च वसा, उच्च शर्करा और पेय पदार्थों के उपभोग में उल्लेखनीय भूमिका निभा रही हैं.

यूके की एक स्टडी बताती है कि घर पर खाना मंगाना यानी घर पर बनाए खाने की तुलना में औसतन प्रतिदिन 200 कैलोरी ज्यादा लेना. इसका मतलब यह हुआ कि बच्चा एक हफ्ते में 8 दिन का खाना खा रहा है.

फूड एप ऐसे बन सकता है फायदेमंद

मोटापे पर यूरोपियन कांग्रेस ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन खाना या दूसरे खाद्य पदार्थों की डिलीवरी का इस्तेमाल करके स्वास्थ्यवर्धक खाने, अच्छी डाईट को भी बढ़ावा दिया जा सकता है. मोटापे से निपटने के लिए यूके जरूरी कदम उठाने पर गंभीरता से काम कर रहा है. इसके चलते वहां कुछ नीतियां भी पेश की गई हैं, जिसके चलते तमाम रेस्तरां और कैफे को अपने खाद्य पदार्थ की कैलोरी की जानकारी दिखानी होगी.

इस कारण लोग अधिक सामान खरीदते हैं

इसके अलावा एक के साथ एक मुफ्त जैसे तरीकों को भी धीरे-धीरे बंद करना होगा. एक शोध से पता चला है कि इस तरह के स्कीम के चलते लोग अपनी जरूरत से 20 फीसद ज्यादा सामान खरीदते हैं. साथ ही यूके में रात 9 बजे से पहले भोजन में उच्च चीनी, नमक और वसा वाले उत्पादों के टीवी विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की भी योजना है.

Tags: Fatness, Food, World Health Organisation

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