AstraZeneca: अमेरिकी एजेंसी को एस्ट्राजेनेका पर ट्रायल के दौरान 'पुराने डेटा' के इस्तेमाल का शक

एस्ट्राजेनेका ने अपने बयान में कहा कि उसका टीका कोविड-19 को रोकने में 79 प्रतिशत तक प्रभावी है. फाइल फोटो

एस्ट्राजेनेका ने अपने बयान में कहा कि उसका टीका कोविड-19 को रोकने में 79 प्रतिशत तक प्रभावी है. फाइल फोटो

AstraZeneca: भारत के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा भी इस टीके का उत्पादन किया जा रहा है. टीका सभी उम्र और समुदाय के लोगों पर समान रूप से प्रभावी देखा गया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 5:02 PM IST
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नई दिल्ली. ब्रिटिश-स्वीडिश दवा कंपनी एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) की कोरोना वैक्सीन एक बार फिर से संदेह के घेरे में आ गई है. अमेरिका की हेल्थ एजेंसी को संदेह है कि कंपनी ने ट्रायल के दौरान पुराने डेटा का इस्तेमाल किया. बता दें कि एक दिन पहले ही एस्ट्राजेनेका ने अमेरिका में हुए वैक्सीन के ट्रायल के नतीजों का ऐलान किया है. इसके तहत कहा गया है कि उनकी ये वैक्सीन 79% प्रभावी है.

अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्सिस डिजिज के मुताबिक डेटा सेफ्टी मॉनेटरिंग बोर्ड ने एस्ट्राजेनेका के डेटा को लेकर चिंता जताई है. बोर्ड को शक है कि एस्ट्राजेनेका ने ट्रायल के दौरान पुराने डेटा का इस्तेमाल किया. लिहाजा ये वैक्सीन कितनी प्रभावी है ये सही-सही बता पाना फिलहाल मुश्किल है. अमेरिका में इस वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर आखिरी फैसला एक एडवाइजरी कमेटी करेगी.

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79 प्रतिशत प्रभावी
अमेरिका और दक्षिण अमेरिकी देशों में ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका टीके पर हुए एक बड़े परीक्षण में सामने आया है कि यह टीका कोविड-19 को होने से रोकने में 79 प्रतिशत और रोग को गंभीर होने से रोकने में सौ प्रतिशत तक प्रभावी है. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय तथा एस्ट्राजेनेका कंपनी द्वारा विकसित टीके के तीसरे चरण का अध्ययन अमेरिका, चिली और पेरू में किया गया जिससे इसके “सुरक्षित और प्रभावी” होने की पुष्टि दोबारा हुई.

दूसरे देशों में भी ट्रायल के अच्छे नतीजे
इससे पहले ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में टीके का परीक्षण किया गया था. भारत के सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा भी इस टीके का उत्पादन किया जा रहा है. टीका सभी उम्र और समुदाय के लोगों पर समान रूप से प्रभावी देखा गया और 65 वर्ष की आयु से अधिक के व्यक्तियों पर यह 80 प्रतिशत असरदार रहा.

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और टीके के प्रमुख जांचकर्ता एंड्र्यू पोलार्ड ने कहा, “यह नतीजे मिलना अच्छी खबर है क्योंकि इससे टीके के प्रभाव का पता चलता है। यह ऑक्सफोर्ड के ट्रायल के नतीजे में भी समान रूप से प्रभावी दिखता है।”
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