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रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही नाव डूबी, 14 की हुई मौत, कई लापता

News18Hindi
Updated: February 11, 2020, 1:28 PM IST
रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही नाव डूबी, 14 की हुई मौत, कई लापता
रोहिंग्या शरणार्थी

नाव डूबने से 14 रोहिंग्या की मौत, यह नाव बंगाल की खाड़ी से मलेशिया की ओर जा रही थी. तटरक्षक बल के प्रवक्ता हमिदुल इस्लाम (Hamidul Islam) ने बताया कि 70 लोगों को बचा लिया गया है.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 1:28 PM IST
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कॉक्स बाजार (बांग्लादेश). दक्षिण बांग्लादेश (Bangladesh) के पास रोहिंग्या शरणार्थियों (Rohingya Refugees) को लेकर जा रही एक नाव मंगलवार सुबह डूब गई. इस हादसे में कम से कम 14 लोगों की डूबने से मौत हो गई और 70 लोगों को बचा लिया गया. हालांकि बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं. मछली पकड़ने वाली इस नाव पर करीब 130 लोग सवार थे. यह नाव बंगाल की खाड़ी से मलेशिया की ओर जा रही थी. तटरक्षक बल के प्रवक्ता हमिदुल इस्लाम (Hamidul Islam) ने बताया कि 70 लोगों को बचा लिया गया है.

म्यामार में 2017 में सैन्य कार्रवाई से घबराकर भागे 7,00,000 से अधिक रोहिंग्या लोग बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे थे. कॉक्स बाजार में स्थित शरणार्थी शिविरों से ये लोग मलेशिया जाने वाली नाव पर सवार हुए थे. इस्लाम ने बताया कि दो नौकाएं मलेशिया की ओर जा रही थीं, शरणार्थी इन्हीं पर सवार थे.

उन्होंने बताया कि एक नाव पानी में डूबी मिली है. इस पर सवार ज्यादातर लोग कॉक्स बाजार के शरणार्थी शिविर से थे. दूसरी नाव का कोई पता नहीं लगा है. हम तलाश कर रहे हैं. तटरक्षक कमांडर नईम उल हक ने बताया, अब तक 14 शव मिले हैं, 70 लोगों को बचाया गया. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इन लोगों को तस्करों ने अपनी बातों में फंसाया था.

नवंबर से मार्च के बीच समुद्र शांत रहता है और मछली पकड़ने की छोटी नौकाएं भी इसमें उतर सकती हैं, ऐसे में तस्करी बढ़ जाती है.

वर्ष 2017 में म्यामांर की सेना ने एक रोहिंग्या छापेमार समूह के हमले के बाद उत्तरी रखाइन प्रांत में कथित नस्ली सफाई अभियान शुरू किया. इसकी वजह से करीब सात लाख रोहिंग्या ने भागकर पड़ोसी बांग्लादेश में शरण ली. म्यांमार पर आरोप लगाया गया कि सेना ने बड़े पैमाने पर दुष्कर्म, हत्या और घरों को जलाने का काम किया.

बौद्ध बहुल म्यामांर रोहिंग्या को बांग्लादेश का बंगाली मानते हैं, जबकि वे पीढ़ियों से म्यांमार में रह रहे हैं. वर्ष 1982 में उनसे नागरिकता भी छीन ली गई थी और वे देशविहीन जीवन व्यापन करने को मजबूर हैं.

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First published: February 11, 2020, 1:28 PM IST
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