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दक्षिण चीन सागर के विवाद में ऑस्ट्रेलिया भी कूदा, जानें क्यों?

दक्षिण चीन सागर के विवाद में ऑस्ट्रेलिया भी कूदा, जानें क्यों?

दक्षिण चीन सागर का विवाद गहराता जा रहा है। इस समुद्र के आसपास स्थित देश लगातार चीन के रवैये का विरोध करते रहे हैं।

दक्षिण चीन सागर का विवाद गहराता जा रहा है। इस समुद्र के आसपास स्थित देश लगातार चीन के रवैये का विरोध करते रहे हैं।

दक्षिण चीन सागर का विवाद गहराता जा रहा है। इस समुद्र के आसपास स्थित देश लगातार चीन के रवैये का विरोध करते रहे हैं।

    नई दिल्ली। दक्षिण चीन सागर का विवाद गहराता जा रहा है। इस समुद्र के आसपास स्थित देश लगातार चीन के रवैये का विरोध करते रहे हैं। फिलीपींस, वियतनाम, भारत और जापान समेत तमाम देशों का मानना है कि चीन दक्षिण चीन सागर पर कब्जा जमाना चाहता है। इस पूरे विवाद में अब ऑस्ट्रेलिया भी कूद पड़ा है। दक्षिण चीन सागर में अपना दबदबा बनाने के लिए ऑस्ट्रेलिया अपनी नौसेना को ताकतवर बनाने पर खरबों रुपये खर्च करने वाला है।


    दक्षिण चीन सागर पर कब्जे की लड़ाई तेज होती जा रही है। एक तरफ चीन है जो लगातार इस समुद्री इलाके पर अपना कब्जा बता रहा है। यहां तक कि उसने इस इलाके में फाइटर प्लेन तक तैनात कर रखे हैं। वहीं अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे मुल्क चीन के दावे को खारिज कर रहे हैं। दरअसल पूरा झगड़ा दक्षिण चीन सागर के समुद्री मार्ग को लेकर है, जो कि कारोबार के लिहाज से दुनिया का दूसरा सबसे अहम समुद्री मार्ग है। इस समुद्री मार्ग के जरिए हर साल करीब 5 खरब डॉलर का कारोबार होता है। अब इस झगड़े में ऑस्ट्रेलिया भी कूद पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि हाल के दिनों में दक्षिणी चीन सागर में शक्ति संतुलन बदला है। इस समुद्री इलाके में दबदबा बनाने के लिए चीन, उत्तर कोरिया, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मुल्कों ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाई है। लिहाजा ऑस्ट्रेलिया भी हथियारों की इस होड़ में कूद पड़ा है।


     ऑस्ट्रेलिया ने अपनी फौज को मजबूत बनाने के लिए अगले 10 साल में 139 अरब डॉलर खर्च करने का ऐलान किया है। ऑस्ट्रेलिया का ज्यादा जोर नौसेना को मजबूत बनाने पर है। इसीलिए अगले 10 साल में पनडुब्बियों की संख्या दोगुनी करके 24 करने की योजना है। साथ ही फाइटर प्लेन, फ्रिगेट, बख्तरबंद वाहन और ड्रोन भी शामिल हैं। समुद्री इलाके की निगरानी के लिए पेट्रोलिंग नौका भी शामिल की जाएगी।


    दरअसल चीन दक्षिण चीन सागर के तटीय इलाके में स्थित कई द्वीपों पर कब्जा जमा चुका है, जबकि उसने कुछ कृत्रिम द्वीप भी बनाएं हैं जहां उसने अपने खुफिया फौजी ठिकाने बना रखे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व रक्षा मंत्री किम बीजले का कहना है कि चीन दक्षिण चीन सागर के आसपास कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां फौजी सुविधाएं बढ़ा रहा है। ऐसा करके चीन पूरे क्षेत्र में एकाधिकार की लड़ाई को उकसा रहा है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को भी पूरा हक है कि वो अपनी सैन्य ताकत बढ़ाए।


    अमेरिका और जापान के दावों को खारिज करते हुए चीन लगातार ये दावा करता रहा है कि पूरे दक्षिणी चीन सागर पर उसका हक है और वो आगे भी इस इलाके में आने वाले द्वीपों को विकसित करता रहेगा। वहीं खुद को दुनिया का दादा मानने वाले अमेरिका को चीन की ये हेकड़ी रास नहीं आ रही है। अमेरिकी दक्षिण चीन सागर के कारोबारी मार्ग की हवाई और जलमार्ग के जरिए निगरानी करना चाहता है, ताकि वो चीनी नौसेना की गतिविधि पर भी नजर रख सके। देखना ये है कि वर्चस्व की ये लड़ाई कहां जाकर थमती है।


    Tags: Australia, China

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