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35 साल पहले इस बच्ची को लगाया गया था लंगूर का दिल, दुनिया भर में मांगी गई सलामती की दुआ

News18Hindi
Updated: October 27, 2019, 7:11 PM IST
35 साल पहले इस बच्ची को लगाया गया था लंगूर का दिल, दुनिया भर में मांगी गई सलामती की दुआ
ये बच्ची दो हफ्ते से ज्यादा जीवित नहीं रह सकी और उसकी मौत हो गई थी

35 साल पहले 1984 में एक बच्ची के अंदर लंगूर (Baboon) का दिल (Heart) लगाया गया था. लेकिन ट्रांसप्लांट के 14 दिनों बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और 15 नवंबर 1984 को बेबी फाय (Baby Fae) की मौत हो गई.

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  • Last Updated: October 27, 2019, 7:11 PM IST
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नई दिल्ली. विज्ञान (Science) ने कई ऐसे कारनामे किए हैं जिनकी इंसान कल्पना भी नहीं कर सकता. इसी तरह की साइंस की एक घटना के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिसके बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे. दरअसल, 35 साल पहले 1984 में एक बच्ची (Baby Girl) के अंदर लंगूर (Baboon) का दिल (Heart) लगाया गया था. हालांकि ये बच्ची दो हफ्ते से ज्यादा जीवित नहीं रह सकी और उसकी मौत हो गई थी. लेकिन इस हार्ट ट्रांसप्लांट ने दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा लिया था.

बता दें कि 14 अक्टूबर 1984 को एक बच्ची (Baby Girl)  का जन्म हुआ था. जिसका नाम स्टेफनी फे बेइक्वायर था, जो बाद में बेबी फाय (Baby Fae) नाम से चर्चित हुई. जन्म के दौरान उसका दिल (Heart) का बायां हिस्सा पूरी तरह से विकसित नहीं हुआ था, जो एक दुर्लभ जन्मजात ह्रदय रोग है. इस तरह के बच्चों के करीब दो हफ्ते तक जिंदा रहने की उम्मीद होती है. लेकिन फाय के सीने में लंगूर का दिल लगने से दो हफ्ते से ज्यादा जीवित रही.

इस बीमारी के साथ पैदा हुई थी बच्ची
35 साल पहले बेबी फाय के सीने में लंगूर का दिल लगाया था. डॉ लियोनार्ड बेली ने बताया कि फाय हाइपोप्लास्टिक लेफ्ट हार्ट सिंड्रोम के साथ पैदा हुई थी और इस कंडीशन में वह दो हफ्ते से ज्यादा जिंदा नहीं रह सकती थी. अब फाय की मां के पास दो विकल्प थे, या तो वह अस्पताल में बच्ची को इलाज के लिए रखती या फिर घर पर रखकर उसके मरने का इंतजार करती. ऐसे में डॉक्टर बेली के दिमाग में एक आइडिया आया.

बेली के दिमाग में बच्ची का दिल ट्रांसप्लांट करने का आइडिया आया. डॉक्टर का मानना था ट्रांसप्लांट ही बच्ची को ठीक कर सकता है. वैसे तो एक इंसान का दिल दूसरे इंसान में ट्रांसप्लांट होना 1967 से ही शूरू हो गया था. लेकिन फाय केस में इस बात की टेंशन थी कि इतनी छोटी बच्ची को कौन अपना दिल देगा. और उस समय तक किसी भी डॉक्टर ने इतनी छोटी बच्ची का दिल ट्रांसफ्लांट भी नहीं किया था.



35 साल पहले बच्ची को लगाया था लंगूर का दिल
ऐसे में डॉक्टर बेले के दिमाग में आइडिया आया कि क्यों न किसी अन्य प्रजाति का हार्ट ट्रांसप्लांट करके देखा जाए. उन्होंने 7 साल कैलिफॉर्निया के लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी मेटिकल सेंटर में इस पर रिसर्च किया था. बेले ने अपने रिसर्च के दौरान भेड़, बकरी और लंगूर के बीच हार्ट ट्रांसप्लांट किया था. 26 अक्टूबर, 1984 में जब फाय की तबीयत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्होंने लंगूर का दिल लगाने का निर्णय लिया और फाय को उसका हार्ट लगाना शुरू किया. ऑपरेशन सफल रहा और फाय का नया दिल धड़कने लगा.

बेबी के लिए दुनिया भर में मांगी गई थी सलामती की दुआ
सर्जन और लोगों के लिए यह चमत्कार से कम नहीं था. रातों-रात बेबी फाय ने मीडिया में सुर्खियां बटोर ली थीं. लोगों ने बच्ची की सलामती की दुआएं मांगी. लेकिन वह खुशियां कुछ दिनों तक ही रहीं. लंगूर का दिल लगने के बाद बेबी फाय की तबीयत में कुछ दिन तक सुधार हुआ, लेकिन ट्रांसप्लांट के 14 दिनों बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी और 15 नवंबर 1984 को बेबी फाय की मौत हो गई. मेडिकल की दुनिया में ये हार्ट ट्रांसप्लांट इतिहास बना. ये पहला केस था जब मनुष्य को किसी जानवर का दिल लगाया गया और वह कुछ समय तक जीवित रहा था.

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First published: October 27, 2019, 6:12 PM IST
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