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बांग्लादेश के मंत्री की मांग- 1971 में किए नरसंहार के लिए माफ़ी मांगे पाकिस्तान

बांग्लादेश के मंत्री ने पाकिस्तान से आधिकारिक माफ़ी मांगने के लिए कहा.
बांग्लादेश के मंत्री ने पाकिस्तान से आधिकारिक माफ़ी मांगने के लिए कहा.

1971 War Bangladesh: बांग्लादेश के मंत्री शहरियार आलम ने बांग्लादेश में नवनियुक्त पाकिस्तानी राजदूत इमरान अहमद सिद्दीकी के साथ मुलाकात कर मांग की है कि पाकिस्तान को 1971 युद्ध के दौरान किये गए नरसंहार के लिए माफ़ी मांगनी चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 9:34 AM IST
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ढाका. बांग्लादेश (Bangladesh) में एक बार फिर 1971 में पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) द्वारा अंजाम दिए गए नरसंहार के लिए पाकिस्तान पर माफ़ी मांगने का दबाव बनाने के लिए आवाज़ उठ रही है. इस नरसंहार के लिए अभी तक पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं मांगी है. बांग्लादेश सरकार के विदेश राज्य मंत्री शहरियार आलम ने कहा है कि पाकिस्तान पर आधिकारिक माफ़ी मांगने का दबाव बनाया जाना चाहिए. इस नरसंहार को अब 50 साल बीत चुके हैं लेकिन पाकिस्तान अभी तक भी इस बारे में किसी तरह की चर्चा करने से बचती रही है.

शहरियार आलम बांग्लादेश में नवनियुक्त पाकिस्तानी राजदूत इमरान अहमद सिद्दीकी के साथ मुलाकात के दौरान यह मांग उठाई है. बताया जाता है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी सेना ने लगभग 30 लाख निर्दोष बांग्लादेशियों की हत्या कर दी थी. शहरियार आलम ने पाकिस्तानी राजदूत इमरान अहमद सिद्दीकी से बांग्लादेश में फंसे पाकिस्तानियों की वापसी को पूरा करने और संपत्ति के बंटवारे के मुद्दे को हल करने के अलावा पाकिस्तान से बांग्लादेश मुक्ति संग्राम 1971 में हुए नरसंहार के लिए आधिकारिक माफी मांगने की मांग की। उन्होंने व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए पाकिस्तान में अधिक बांग्लादेशी उत्पादों के पहुंच प्रदान करने का आग्रह किया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन पाकिस्तान के लिए ज्यादा लाभकारी है।

पाकिस्तानी सेना ने मचाया था तांडव
गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना ने उस समय पूर्वी पाकिस्तान रहे बांग्लादेश पर 25 मार्च 1971 की आधी रात को अचानक हमला कर दिया था जिसके बाद युद्ध शुरू हुआ और 16 दिसंबर को यह युद्ध समाप्त हुआ. आधिकारिक तौर पर 9 महीने चले युद्ध में 30 लाख लोग मारे गए. बता दें कि बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वर्ष 2017 में संयुक्‍त राष्‍ट्र में दिए अपने भाषण में जनरल याहया खान की सेना के नरसंहार का कड़वा सच दुनिया के सामने पेश किया था. उन्‍होंने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा था कि याहया खान की सेना ने वर्ष 1971 में जघन्य सैन्य अभियान शुरू किया जिससे मुक्ति संग्राम के दौरान हुए नरसंहार में 30 लाख निर्दोष लोग मारे गए. हसीना ने कहा, वर्ष 1971 के मुक्ति संग्राम में हमने नरसंहार का चरम रूप देखा.
पाकिस्तानी सेना के निशाने पर थीं बंगलादेशी महिलाएं


पाकिस्तान के खिलाफ 9 महीने चले मुक्ति संग्राम में 30 लाख निर्दोष लोग मारे गए और याहया खान की सेना ने 20000 से ज्यादा महिलाओं का शोषण किया. उन्होंने कहा, पाकिस्तानी सेना ने 25 मार्च को जघन्य ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू किया जो 1971 के नरसंहार की शुरुआत थी. बुद्धिजीवियों की नृशंस तरीके से हत्या की गई. दरअसल, पाकिस्‍तानी सेना ने बंगबंधु के नेतृत्‍व में हुए विद्रोह को कुचलने के लिए बांग्‍लादेश के बुद्धिजीवियों की हत्‍या शुरू की. इसके तहत लेखकों, शिक्षकों, डॉक्‍टरों, वैज्ञानिकों को रात में ही उनके घर से उठा लिया गया और बेहद क्रूर तरीके से उनकी हत्‍या कर दी गई.



जानकारों के मुताबिक बांग्‍लादेश के 30 लाख लोगों की हत्‍या का जिम्‍मेदार याहया खान शराब और महिलाओं का शौकीन था. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक याहया खान को 'लेडीज मैन' कहा जाता था. पाकिस्‍तानी तानाशाह की सबसे नजदीक महिला दोस्त थीं अक्लीम अख्तर जो 'जनरल रानी' के नाम से मशहूर थीं. इसके अलावा मलका-ए-तरन्नुम नूरजहां को याहया खान 'नूरी' कह कर पुकारता था. नूरजहां भी याहया को 'सरकार' कह कर बुलाती थीं.
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