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बांग्लादेश के इस परिवार के पुरुषों के नहीं मिलते FINGERPRINT, जाने क्यों?

बांग्लादेश के इस परिवार के पुरुषों के नहीं मिलते FINGERPRINT, जाने क्यों?

बांग्लादेश में अपू के परिवार में पुरुषों के फिंगरप्रिंट नहीं लिए जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बांग्लादेश में अपू के परिवार में पुरुषों के फिंगरप्रिंट नहीं लिए जा सकते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

No Fingerprints of This Family Bangladesh: बांग्लादेश के एक परिवार के पुरुषों की उँगलियों (No Fingerprints of Male) की छाप या फिंगर प्रिंट्स नहीं लिए जा सकते हैं. अपू अपने परिवार के साथ बांग्लादेश के उत्तरी जिले के राजशाही जिले के एक गाँव में रहते हैं. अपू के परिवार के पुरुषों का जेनेटिक म्यूटेशन (Genetic Mutation) ऐसा है जिनके फिंगरप्रिंट्स नहीं लिए जा सकते हैं.

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    ढाका. बांग्लादेश (Bangladesh) के एक परिवार के पुरुषों की उँगलियों की छाप या फिंगर प्रिंट्स (No Finger Prints) नहीं लिए जा सकते हैं. अपू अपने परिवार के साथ बांग्लादेश के उत्तरी जिले के राजशाही जिले के एक गाँव में रहते हैं. अपू के परिवार के पुरुषों का जेनेटिक म्यूटेशन (Genentic Mutation) ऐसा है जिनके फिंगरप्रिंट्स नहीं लिए जा सकते हैं. ऐसा जेनेटिक म्यूटेशन दुनियाभर में चंद लोगों का है. अपू के फिंगरप्रिंट्स नहीं होने के कारण उन्हें कई समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं. अपू ने अपने दादा के समय की चर्चा करते हुए बताया कि उनके समय में फिंगरप्रिंट्स नहीं होने के कारण किसी तरह की समस्या नहीं होती थी, लेकिन आज के अत्याधुनिक युग में उँगलियों के आसपास घूमते डर्मेटोग्लाइफ (dermatoglyphs) के रूप में बायोमीट्रिक डाटा इकठ्ठा करने का माध्यम बना गया है. वोट देने से लेकर एयरपोर्ट से गुजरने तक और अपने स्मार्टफोन को खोलने में यही तकनीक काम आती है.

    नो फिंगरप्रिंट स्टांप के साथ जारी हुआ आईडी कार्ड

    वर्ष 2008 में बांग्लादेश में सभी वयस्कों के लिए राष्ट्रीय आईडी कार्ड जारी हुआ. इस आईडी कार्ड के लिए डेटाबेस के लिए एक थंबप्रिंट (अंगूठे का निशान) की आवश्यकता थी लेकिन अपू का फिंगरप्रिंट नहीं लिया जा सका है. ऐसा होने पर कर्मचारियों को यह समझ नहीं आया था कि अपू के पिता अमल सरकार को यह आईडी कार्ड कैसे दिया जाए? इसका समाधान यह निकाला गया कि अपू के पिता को 'NO FINGERPRINT' स्टाम्प के साथ यह कार्ड जारी हुआ.

    परिवार के 9 सदस्य बिना फिंगरप्रिंट्स के मिले

    पहली बार यह बीमारी 2007 में सामने आई जब पीटर इटिन नाम के एक स्विस त्वचा विशेषज्ञ को एक महिला ने संपर्क कर बताया कि उसे अमेरिका आने में दिक्क्त हो रही है क्योंकि कस्टम अधिकारी उसका फिंगर प्रिंट्स दर्ज नहीं कर पा रहे हैं. जांच करने पर पाया गया कि महिला के फ्लैट फिंगर पैड और हाथों में पसीने की ग्रंथियों की संख्या कम पाई गई. महिला के 16 सदस्यों के परिवार की जांच करने पर 7 सदस्यों के फिंगरप्रिंट्स थे जबकि 9 सदस्य बिना फिंगरप्रिंट्स के मिले.

    इस बीमारी को डर्मेटोग्लाइफ का नाम दिया गया

    इस बीमारी को डर्मेटोग्लाइफ का नाम दिया गया था लेकिन प्रो पीटर इटिन ने इसे अपने पहले मरीज के इमीग्रेशन पर अटकने के चलते इस बीमारी को Immigration delay disease नाम दिया. अपू के के चाचा गोपेश को फिंगरप्रिंट्स के कारण पासपोर्ट के लिए दो साल तक इंतजार करना पड़ा. गोपेश के कार्यालय में जब फिंगरप्रिंट अटेंडेंस सिस्टम का उपयोग शुरू हुआ तब भी उन्हें अपने अधिकारियों को समझाना पड़ा और पुरानी प्रणाली का उपयोग करने की अनुमति लेनी पड़ी.

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    अमल और अप्पू को हाल ही में बांग्लादेशी सरकार द्वारा एक मेडिकल प्रमाणपत्र पेश करने के बाद एक नए तरह का राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किया गया था. यह कार्ड रेटिना स्कैन और चेहरे की पहचान बताता है. लेकिन उन्हें अभी भी एक सिम कार्ड खरीदने या लाइसेंस प्राप्त करने में परेशानी आती है. पासपोर्ट बनवाना तो एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया है.

    Tags: Bangladesh, Fingerprint scan

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