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PM हसीना ने कहा- मजहब के आधार पर देश को नहीं बंटने देंगे, कल PM मोदी से करेंगी बातचीत

पीएम शेख हसीना ने कहा कि वे बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता नहीं स्वीकार करेंगी. ( फोटो- AFP)
पीएम शेख हसीना ने कहा कि वे बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरता नहीं स्वीकार करेंगी. ( फोटो- AFP)

Indo-PakWar 1971: बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना (Prime Minister Sheikh Hasina) ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में स्पष्ट कहा कि वे देश में धार्मिक कट्टरता को बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 16, 2020, 2:00 PM IST
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ढाका. बांग्लादेश (Bangladesh) के 50वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री शेख हसीना (Prime Minister Sheikh Hasina) ने पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) द्वारा की गयी हिंसा और क्रूरता को याद किया. हसीना ने स्पष्ट कहा कि वो बहुत मुश्किल और खौफनाक दौर था. हम अब देश को मजहब के आधार पर नहीं बंटने देंगे. 16 दिसंबर 1971 को भारत ने पाकिस्तान को जंग में शिकस्त दी और एक नए देश बांग्लादेश का निर्माण हुआ था. हसीना और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) बृहस्पतिवार को डिजिटल शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे जिस दौरान दोनों देशों के विभिन्न क्षेत्रों में नौ समझौतों पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है.

बता दें कि भारत-पाकिस्तान की जंग के दौरान बांग्लादेश के नागरिकों को पाकिस्तानी सेना की हैवानियत का शिकार होना पड़ा था. हसीना ने कट्टरपंथी और और आजादी के विरोधी लोगों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा- बांग्लादेश की आजादी की जंग हिंदू, मुस्लिम, बुद्ध और ईसाई, सभी ने मिलकर लड़ी. अब हम मजहब के आधार पर देश को बांटने की इजाजत नहीं दे सकते. देश अब विकास और समृद्धि की तरफ बढ़ रहा है. हमें सांप्रदायिक सद्भाव बनाकर रखना होगा. इसके बिना विकास के रास्ते पर चलना नामुमकिन है.

मोदी के साथ होगी मुलाक़ात
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन ने मंगलवार को बताया कि हसीना और मोदी गुरूवार को एक डिजिटल शिखर वार्ता में हिस्सा लेंगे. दोनों नेता पुराने रेल मार्ग -- चिलाहाटी-हल्दीबाड़ी रेल मार्ग-- को 55 वर्षों बाद पुन: खोले जाने के गवाह भी बनेंगे. इसे 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान बंद कर दिया गया था और उस समय बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा था. रेल मार्ग कूचबिहार और बांग्लादेश के चिलाहाटी को जोड़ेगा. मोमेन ने बताया, 'डिजिटल बैठक के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में करीब नौ सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है...लेकिन इन्हें अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है क्योंकि वे (अधिकारी) अब भी इस पर काम कर रहे हैं.'
इससे पहले बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया था कि दोनों पक्षों के बीच चार सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होंगे. मोमेन ने कहा कि ढाका सभी बड़े द्विपक्षीय मुद्दों को उठाएगा जिनमें जल बंटवारा, कोविड-19 सहयोग, सीमा पर जान जाना, व्यवसाय में असंतुलन, संपर्क मार्ग और रोहिंग्या मुद्दे भी शामिल हैं. मोमेन ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान साझी नदियों में जल बंटवारे पर प्रमुखता से चर्चा होगी. उन्होंने कहा कि ढाका, सीमा पार बहने वाली सात बड़ी नदियों -- मोनू, मुहुरी, गोमती, धराला, दूधकुमार, फेनी और तीस्ता के मुद्दे को एक ही फ्रेमवर्क में लाने की मांग करेगा.



मजहब के नाम पर कट्टरता को नहीं बख्शेंगे!
इससे पहले देश के नाम एक संदेश में शेख हसीना ने कहा- मैं कभी भी मजहब के नाम पर देश में कट्टरता और अराजकता नहीं फैलने दूंगी. हम सब को यह सोचना होगा कि मजहबी मूल्यों का स्तर कैसे बनाकर रखें और इस देश को विकास के रास्ते पर बढ़ाएं. बांग्लादेश के लोग बेहतरीन और पवित्र हैं. इस मुल्क में हर किसी को अपने धर्म का पालन करने की इजाजत है. यहां कट्टरता की कोई इजाजत नहीं. देश के 16.5 करोड़ लोग शांति और सांप्रदायिक सद्भाव के साथ रहना चाहते हैं. 18 मिनट के संबोधन में हसीना ने आगे कहा- यह वो दिन है जब हमें अपने शहीदों को याद करना चाहिए. उन्होंने देश की आजादी के लिए अनगिनत कुर्बानियां दीं. हमें धार्मिक भेदभाव या कट्टरता से दूर रहना होगा. युवाओं को भी यह समझना होगा कि ये आजादी कितनी बेशकीमती है. इसे सहेज कर रखना होगा। हमें अपने मुल्क और इसके ध्वज का अपमान सहन नहीं कर सकते.

कोरोना से साथ मिलकर लड़ेंगे
विदेश मंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान कोविड-19 महामारी पर द्विपक्षीय सहयोग शीर्ष एजेंडा में शामिल होने की संभावना है. उन्होंने कहा, 'भारत ने हमसे वादा किया है कि वे कोविड-19 का टीका सबसे पहले बांग्लादेश को देंगे.' बांग्लादेश की बेक्सिमो फार्मा ने पांच नवंबर को भारत के सीरम इंस्टीट्यूट से कोविड-19 का तीन करोड़ टीका आपूर्ति करने के लिए समझौता किया था.

मोमेन ने कहा कि बांग्लादेश रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र में भारत के समर्थन की मांग करेगा. भारत अगले महीने अस्थायी सदस्य के तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शामिल होगा. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के सीमा सुरक्षा बल की कार्रवाई पर भी चिंता जताएगा जिससे सीमावर्ती इलाकों में इसके नागरिकों की जान जाती है.
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