News18 Exclusive: बांग्‍लादेश का अनदेखा पहलू है ये मंदिर, सरकार करती है देखभाल

राधा कृष्ण कांतोज्यू मंदिर की इमारत की देखभाल की जिम्मेदारी बांग्‍लादेश सरकार निभाती है.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 5:25 PM IST
News18 Exclusive: बांग्‍लादेश का अनदेखा पहलू है ये मंदिर, सरकार करती है देखभाल
इसकी बनावट इतनी मजबूत है कि 1897 में भयानक भूकंप जब इस इलाके में आया तब भी यह नहीं गिरा.
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 5:25 PM IST
मुस्लिम बाहुल्य देश बांग्‍लादेश में एक ऐसा मंदिर है जिसे पिछले 267 साल से सहेजकर रखा गया है. ये है राधा कृष्ण कांतोज्यू मंदिर, जिसे 1704 में तत्कालीन दिनाजपुर राज्य के राजा प्राणनाथ ने बनवाना शुरू किया और करीब 48 साल तक इस मंदिर का निर्माण चलने के बाद 1752 में उनके बेटे रामनाथ ने इसे बनवाने का काम पूरा किया. इसकी बनावट इतनी मजबूत है कि 1897 में भयानक भूकंप जब इस इलाके में आया तब भी यह नहीं गिरा.

क्यों खास है ये मंदिर?
हिन्दुत्व के इतिहास को अपने आप में समेटे हुए इस मंदिर की हर एक ईट पर महाभारत काल और रामायण काल की घटनाओं और प्रसंगों की मूर्तियां बनाई गई हैं. इसमें सीता स्वयंवर, भरत मिलाप, गीता उपदेश प्रमुख हैं. हर एक ईट जब तस्वीरों के जरिए हिन्दुत्व के इतिहास का वर्णन करती है तो नजारा देखते ही बनता है. इस मंदिर को प्राचीन टेराकोटा शैली से बनाया गया है. टेरेकोटा एक विशेष तरीके की मिट्टी होती है,जिसे मध्यकालीन युग में गीला करके पत्थरों को जोड़ने में इस्तेमाल किया जाता था. न्यूज18 इंडिया ने भी इस मंदिर में जाकर राधाकृष्ण के दर्शन किए.

इस मंदिर की हर एक ईट पर महाभारत काल और रामायण काल की घटनाओं और प्रसंगों की मूर्तियां बनाई गई हैं.


क्या परंपराएं जुड़ी हैं इस मंदिर से?
मंदिर में स्थापित राधा-कृष्ण कुछ उंचाई पर विराजमान हैं, जिन्हें दिन में समय-समय पर बाहर लाया जाता है. भक्त जमीन से ही इनके दर्शन कर सकते हैं. जबकि हर साल जनमाष्टमी के दिन राधा कृष्ण की मूर्ति को नदी में नाव के जरिए दिनाजपुर शहर में राजा के महल ले जाया जाता है और दो महीने बाद इसे वापस सड़क के रास्ते इस मंदिर में लाया जाता है.

भक्तों और पर्यटकों में काफी लोकप्रिय है ये मंदिर
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हर रोज 800-1000 श्रद्धालु इस मंदिर में आते हैं. त्योहार और किसी खास दिन श्रद्धालुओं की तादात 1 लाख तक पहुंच जाती है. जहां तक पर्यटकों का सवाल है तो पहले भारत और बांग्‍लादेश से यहां लोग आते थे, लेकिन पिछले दो सालों में अमेरिका, इटली, मलेशिया और श्रीलंका से पर्यटक आते हैं और इस मंदिर की कलाकृति से रूबरू होते हैं.

यहां पिछले दो सालों से अमेरिका, इटली, मलेशिया और श्रीलंका से पर्यटक आते हैं.


बेहतरीन रखरखाव कर रही है बंग्लादेश सरकार

वैसे तो यह मंदिर एक ट्रस्ट के द्वारा संचालित है, लेकिन इमारत के देखभाल की जिम्मेदारी बांग्‍लादेश सरकार निभाती है. हर साल एक बार ईट पर बनी मीर्तियों की पॉलिशिंग की जाती है. इसके अलावा इस मंदिर के बाहरी हिस्से को भी खूबसूरत बनाया जा रहा है, ताकि पर्यटकों की तादात में बढ़ोत्तरी हो.

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First published: July 16, 2019, 10:39 PM IST
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