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ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद ऐसे बदला था भारत के प्रति US प्रशासन का रवैया

File Photo: Barack Obama
File Photo: Barack Obama

20 जनवरी 2009 में अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बनने वाले बराक ओबामा देश के पहले अश्वेत राष्ट्र प्रमुख बने. इसी के साथ ये दिन अमेरिकी इतिहास में दर्ज हो गया. 'यस वी कैन' का नारा देकर व्हाइट हाउस पहुंचने वाले ओबामा की जिंदगी कई उतार चढ़ाव से भरी रही.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 24, 2018, 3:58 AM IST
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20 जनवरी 2009 में अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बनने वाले बराक ओबामा देश के पहले अश्वेत राष्ट्र प्रमुख बने. इसी के साथ ये दिन अमेरिकी इतिहास में दर्ज हो गया. 'यस वी कैन' का नारा देकर व्हाइट हाउस पहुंचने वाले ओबामा की जिंदगी कई उतार चढ़ाव से भरी रही. लेकिन महात्मा गांधी और मार्टिन लूथर किंग को आदर्श मानते ओबामा ने मुश्किलों से कभी हार नहीं मानी.

पिता केन्याई और मां अमेरिकी
दुनिया का सबसे ताक़तवर पद संभाल चुके ओबामा का जन्म साल 1961 में हवाई में हुआ था. उनकी मां कान्सास की एक श्वेत महिला थीं और पिता केन्याई मूल के थे. बराक ओबामा की मां का अपने पहले पति से तभी तलाक हो गया था जब वो सिर्फ दो साल के थे. जब ओबामा पांच साल के हुए तो उनकी मां ने दूसरी शादी कर ली.

ओबामा के सौतेले पिता इंडोनेशिया के रहने वाले थे. अपने दूसरे पति के साथ रहने के लिए ओबामा की मां ने भी जकार्ता चले जाने का फैसला किया. ओबामा की शुरुआती स्कूल शिक्षा इंडोनेशिया में ही हुई. 1970 के दशक में वह अमेरिका लौटे और अपने नाना-नानी के साथ रहने लगे. यहीं उन्होंने आगे की पढ़ाई की. पेशवर जिंदगी की शुरुआत बतौर शिक्षक के रूप में करने वाले ओबामा 90 का दशक आते आते राजनीति में आ गए.
ऐसे बने हनुमान भक्त


1995 में लिखे ‘ड्रीम्स फ्रॉम माई फादर’ के नाम से लिखे अपने यादगार अनुभवों में बराक ओबामा ने उन दिनों को याद किया है जब वो अपनी मां के साथ जकार्ता में रहने जा रहे थे. ओबामा ने विस्तार से लिखा है कि कैसे पहली बार उन्हें पता चला था कि हनुमान नाम के भी कोई देवता हैं. ओबामा के मुताबिक, जब उनके पिता ने उन्हें हनुमान की मूर्ति दिखाई उस वक्त वो हैरत से हनुमान जी की मूर्ति की तरफ देखते रहे. उस शक्तिशाली भगवान की मूर्ति ओबामा के जेहन में बस गई थी. उस दिन के बाद से ही भगवान हनुमान उनके लिए हौसले, उम्मीद, शक्ति और हिम्मत का प्रतीक बन गए थे. हनुमान के तौर पर उन्हें एक ऐसा साथी मिला था, जो उन्हें हर हालात से मुकाबला करने का साहस देता था.

ऐसे शुरू हुई ओबामा-मिशेल की लव स्टोरी
बराक ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल, दोनों की मुलाकात 1989 में शिकागो के कॉलेज में हुई थी. रोमांटिक नेचर के ओबामा ने मिशेल को कई बार डेट करने की कोशिश की, लेकिन मिशेल हमेशा ना करती रहीं.  ओबामा और मिशेल ने हावर्ड यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की, लेकिन मिशेल एक साल पहले ही वहां से पास आउट हो गई थी. हावर्ड में दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई. अपनी ग्रेजुएशन के बाद मिशेल ने शिकागो की एक लॉ फर्म में काम किया. वहीं, पर ओबामा की मिशेल से फिर मुलाकात हुई. वहां ओबामा ने मिशेल को प्रपोज किया. पहले तो मिशेल ने इनकार किया लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्होंने ओबामा को हां कर दी और 1992 में दोनों ने शादी कर ली.

राजनीति की शुरुआत
ओबामा के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1996 से हुई. जब वो इलिनोइस के स्टेट सीनेट पद के लिए चुने गए. 1998 और 2000 में वो दोबारा स्टेट सीनेट बने. 2004 में उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर रुख किया. उन्होंने इसी साल अमेरिकी सीनेट पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की. जुलाई 2004 में डेमोक्रेटिक नेशनल कंवेशन की-नोट एड्रेस में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. 10 फरवरी 2007 में स्प्रिंगफील्ड इलिनोइस में उन्हें आधिकारिक तौर पर डेमोक्रेट्स की ओर से राष्ट्रपति पद का दावेदार घोषित किया गया. जहां से उनकी राष्ट्रपति तक पहुंचने की नींव रखी गई.

ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत को लेकर बदला अमेरिकी प्रशासन का रवैया
ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत को लेकर भी अमेरिकी प्रशासन का रवैया बदल गया. व्हाइट हाउस में प्रशासन ने जानना शुरू किया कि हिंदू धर्म क्या है, उसके मूल्य क्या हैं, हनुमान क्या हैं? ये ओबामा की भक्ति ही थी कि साल 2009 में पहली बार व्हाइट हाउस में आधिकारिक तौर पर दीवाली का दीया जलाया गया.

इस मौके पर मौजूद हर मेहमान को दीवाली का तोहफा भी दिया गया. इसके बाद मुख्य पुजारी ने बराक ओबामा को लाल रंग की एक खूबसूरत शॉल पहनाई. व्हाइट हाउस में इसके बाद ओबामा ने एक और परंपरा शुरू की. दीवाली पर उनकी तरफ से एक रिकॉर्डेड संदेश जारी किया जाने लगा.
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