इंडोनेशिया में लौटा बार्टर सिस्टम! छात्रों से फीस के बदले ले रहे नारियल

इंडोनेशिया में छात्रों से फीस के बदले नारियल लिया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
इंडोनेशिया में छात्रों से फीस के बदले नारियल लिया जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Coconut as a college Fees: इंडोनेशिया (Indonesia) की राजधानी बाली के एक कॉलेज द वीनस वन टूरिज्म अकेडमी ने अजीबोगरीब तरकीब निकाली. कॉलेज प्रशासन ने अपने छात्रों को फीस (Tuition Fees) के बदले में नारियल जमा कराने को ​कहा.

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  • Last Updated: November 4, 2020, 10:50 PM IST
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बाली. दुनिया भर में कोरोनावायरस (Coronavirus) के चलते कितनी अलग-अलग तरह की कहानियां देखने, सुनने और पढ़ने को मिल रही हैं. ऐसी ही एक कहानी इंडोनेशिया से सामने आ रही है. यह कहानी एक बार बार्टर सिस्टम के दोबारा लौटने की है. कोरोनो के चलते यहां के लोगों की आर्थिक हालत खराब हो गई. स्कूल और कॉलेज के छात्र अपनी फीस भी भरने में समस्या महसूस कर रहे हैं. इन समस्या से पार पाने के लिए इंडोनेशिया (Indonesia) की राजधानी बाली के एक कॉलेज द वीनस वन टूरिज्म अकेडमी ने अजीबोगरीब तरकीब निकाली. कॉलेज प्रशासन ने अपने छात्रों को फीस (Tuition Fees) के बदले में नारियल जमा कराने को ​कहा. गौरतलब है कि इंडोनेशिया में नारियल (Coconut As college Fees) का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है और यह सबसे अच्छी बात है कि यह कॉलेज भी नारियल उत्पादन करता है.

फीस में मिले नारियल से तेल निकालेगा कॉलेज

इस कॉलेज के प्रशासन ने इस आशय का ई-मेल छात्रों को आधिकारिक तौर पर लिखा है. कॉलेज प्रशासन के अनुसार छात्रों से बतौर फीस नारियल की वसूली की जा रही है और इसे नारियल तेल के उत्पादन में इस्तेमाल में लाएगा. इस संस्थान के एक कर्मचारी वयन पसेक ने स्थानीय मीडिया बाली के पुष्पा न्यूज को बताया कि प्राकृतिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल शुद्ध नारियल तेल निकालने में किया जाएगा.



बार्टर सिस्टम क्या है
वस्तु विनिमय प्रणाली या बार्टर सिस्टम (barter system) विनिमय का एक तरीका है. मुद्रा का आविष्कार होने से बहुत पहले से इस प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है. आज भी दुनिया में कई स्थानों में अलग अलग रूप में बार्टर सिस्टम का उपयोग होता है. इस प्रणाली में लोग सेवाओं और वस्तुओं के लिए सेवाओं और वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं.

'छात्रों में बिजनेस की समझ विकसित करने की पहल'

लोकल अखबार ‘बाली सन' के मुताबिक़, कॉलेज सिर्फ नारियल ही नहीं, बल्कि दूसरे नेचुरल प्रोडक्ट्स भी स्वीकार कर रहा है. उदारण के तौर पर मोरिंगा और दूसरे पौधों की पत्तियां, जो हर्बल साबुन बनाने में इस्तेमाल होती हैं. स्टूडेंट्स अपने बनाए हुए प्रोडक्ट्स को दोबारा बेच भी सकते हैं, ताकि उनमें बिजनेस की समझ विकसित हो सके.

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उन्होंने बताया कि पहले हमने शिक्षा शुल्क को किश्तों में देने का कार्यक्रम शुरू किया, लेकिन अब हम पहले की तुलना में ज्यादा नई और लचीली व्यवस्था शुरू की ताकि ज्यादातर छात्रों की समस्या का समाधान हो सके. कोरोना वायरस महामारी के कारण हमने नरम नीति अपनाई है। हम शुद्ध नारियल तेल का उत्पादन करते हैं, इसलिए छात्र अपना परीक्षा शुल्क नारियल लाकर दे सकते हैं.
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