चीन में भिखारी QR कोड से मांग रहे भीख, हर हफ्ते कमा रहे 45 हजार रुपये

खबर है कि जो भी भिखारियों को क्यूआर कोड या फिर ई-वॉलेट के जरिए पैसा देता है उनका डाटा कंपनियों को बेच दिया जाता है.

News18Hindi
Updated: July 13, 2019, 10:47 AM IST
चीन में भिखारी QR कोड से मांग रहे भीख, हर हफ्ते कमा रहे 45 हजार रुपये
चीन में भिखारी क्यूआर कोड से मांग रहे भीख, हर हफ्ते कमा रहे 45 हजार रुपये
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Updated: July 13, 2019, 10:47 AM IST
चीन में भिखारियों ने भीख मांगने का नया तरीका निकाला है. यहां के भिखारी पैसे मांगने के लिए क्यूआर कोड और ई-वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं. भिखारी इन नए तरीकों से हर हफ्ते 45 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे हैं. बताया जाता है कि बैंकों ने इसके लिए बकायदा भिखारियों का अपने यहां पर अकाउंट भी खोला हुआ है. खबर है कि जो भी भिखारियों को क्यूआर कोड या फिर ई-वॉलेट के जरिए पैसा देता है उनका डाटा कंपनियों को बेच दिया जाता है.

चीन में भिखारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब चीन में अलीबाबा की अलीपे और वी चैट जैसी बड़ी ई-वॉलेट कंपनियां भी मैदान में उतर चुकी हैं. चीन के इन भिखारियों ने यहां के पर्यटन स्थलों को अपने कब्जे में ले लिया है. ज्यादातर भिखारी पर्यटन स्थल पर डिजिटल पेमेंट या क्यूआर कोड सिस्टम लेकर बैठे होते हैं. भिखारियों का कहना है कि डिजिटल पेमेंट की वजह से उन्हें आसानी से भीख मिल जाती है. भिखारियों का कहना है कि पहले लोग छुट्टे पैसे नहीं होने का बहाना करते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होता.



कंपनियों ने निकाला अलग रास्ता
कई कंपनियों ने भिखारियों के कुछ सुविधाएं भी शुरू की हैं. अलीबाबा ग्रुप के अली पे या टैन्सेंट के वीचैट वॉलेट के माध्यम से इन कोड को स्कैन कर उन्हें भीख दी जा सकती है. बताया जाता है कि कुछ कंपनियों ने स्पांसर्ड कोड भी निकाला है. इस कोड को अगर केवल स्कैन भी कर दिया जाए तो कुछ रकम भिखारी को मिल जाती है.
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