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बेलारूस: राजधानी में दो लाख प्रदर्शनकारी जुटे, रूस ने सैन्य मदद की बात कही

बेलारूस की राजधानी में रविवार को दो लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हो गए.

बेलारूस की राजधानी में रविवार को दो लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हो गए.

अलेक्जेंडर लुकाशेंको ((Alexander Lukashenko)) के छठी बार चुनाव जीतने के बाद से बेलारूस की राजधानी समेत अन्य शहरों में बहुत जोरदार तरीके से विरोध आयोजित हो रहे हैं.

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    मिंस्क. बेलारूस की राजधाानी मिंस्क में जोरशोर से हाल ही चुनाव में जीते राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको (Alexander Lukashenko) के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं. रविवार को राजधानी में देश के इतिहास में सबसे बड़ा प्रदर्शन आयोजित हुआ और यह आरोप लगाया कि नवनिर्वाचित राष्ट्रपति लुकाशेंको ने चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए धांधलियां की हैं. लुकाशेंको लगातार छठी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने में सफलता प्राप्त की है. विपक्षी दलों की ओर से लगातार हो रहे प्रदर्शन को देखते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन (Vladimir Putin) ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया है और प्रदर्शनकारियों को शांत कराने के लिए सेना की टुकड़ी भेजने (Military Help From Russia) का प्रस्ताव दिया है.

    प्रदर्शन स्थल पर दो लाख से ज्यादा लोग इकट्ठा हुए

    रूस ने कहा है कि अगर लुकाशेंको को अगर अनिवार्य हुआ तो हमारी ओर सैन्य सहायता की पेशकश की गई है लेकिन प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की उपस्थिति हमें नजर नहीं आ रही है. प्रदर्शन स्थल पर करीब 2,00,000 लोग इकट्ठा होकर नारे लगा रहे हैं. बेलारूस में वोटिंग से लेकर अबतक दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है ज​बकि हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.

    लुकाशेंको ने पहली बार 1994 में चुनाव जीता था

    रूस की पश्चिमी सीमा से सटा बेलारूस 25 अगस्त 1991 को सोवियत संघ से अलग होकर आजाद देश बना था. इसके बाद संविधान बना और जून 1994 को पहला राष्ट्रपति चुनाव हुआ. राष्ट्रपति बने अलेक्जेंडर लुकाशेंको. 1994 से लेकर अब तक छह बार चुनाव हो चुके हैं. लुकाशेंको को कभी-कभी 'यूरोप का अंतिम तानाशाह' भी कहा जाता है. वे पहली बार 1994 में चुनाव जीत सत्ता में आए थे.

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    वर्ष 2015 के चुनाव में भी उन्होंने बड़ी जीत की घोषणा की थी. चुनाव में लुकाशेंको को 83.5% वोट के साथ विजेता घोषित किया गया था. उस चुनाव में उन्हें चुनौती देने वाला कोई भी गंभीर उम्मीदवार मैदान में नहीं था जबकि इस साल के चुनाव को उनके 'नेतृत्व में हताशा के बढ़ते संकेतों के बीच' आयोजित किया गया. स्वेतलाना ने चुनाव को बहुत गंभीरता से लिया और पूरे दमखम के साथ मोर्चा लिया. हालांकि चुनाव के नतीजे जब आए तो वह बुरी तरह से हार गईं.

    स्वेतलाना के पति जेल में बंद है

    37 वर्षीय स्वेतलाना ने अपने जेल में बंद पति के स्थान पर यह चुनाव लड़ा. उन्होंने विपक्ष की कई बड़ी रैलियों का उन्होंने नेतृत्व किया. विपक्ष ने पहले ही कहा था कि उन्हें वोटों में धांधली होने की उम्मीद है और यही वजह है कि वह वोटों की एक वैकल्पिक गिनती रखेगा. वहीं दूसरी ओर लुकाशेंको ने क़सम खाई है कि देश में स्थिति नियंत्रण में रहेगी. लुकाशेंको के छठी बार चुनाव जीतने के बाद से बेलारूस की राजधानी समेत अन्य शहरों में बहुत जोरदार तरीके से विरोध आयोजित हो रहे हैं.

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