इज़रायल में सत्ता की लंबी रेस के घोड़े बेंजामिन नेतन्याहू की दौड़ खत्म, एक नज़र उनके सफ़र पर

मई 2015 में, बेंजामिन नेतन्याहू ने चौथी बार संसद में विश्वास मत हासिल किया था. (रॉयटर्स फाइल फोटो)

मई 2015 में, बेंजामिन नेतन्याहू ने चौथी बार संसद में विश्वास मत हासिल किया था. (रॉयटर्स फाइल फोटो)

Benjamin Netanyahu Journey: दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी के प्रमुख बेंजामिन नेतन्याहू मार्च 2009 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, इसके पहले वो 1996 और 1999 के बीच थोड़े वक्त के लिए सत्ता में आए थे.

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नई दिल्ली. इज़रायल के राष्ट्रवादी कट्टरपंथी नेता नफ्ताली बेनेट ने घोषणा की है कि वह एक शक्तिशाली गठबंधन सरकार में शामिल होंगे. इसके साथ ही देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में लंबे वक्त से चल रही सरकार का अंत हो सकता है. आईए इज़रायल में लंबे वक्त से सत्तासीन रहे नेतन्याहू के सफर पर नज़र डालते हैं. खासकर तब से जब वह 2009 के बाद दोबारा सत्ता में आए.


सत्ता में वापसी

दक्षिणपंथी लिकुद पार्टी के प्रमुख मार्च बेंजामिन नेतन्याहू 2009 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने, इसके पहले वो 1996 और 1999 के बीच थोड़े वक्त के लिए सत्ता में आए थे. इसके बाद इन्होंने विदेश मंत्री रहे अति राष्ट्रवादी एविगडर लिबरमेन के साथ हाथ मिलाया. जनवरी 2013 में हुए आकस्मिक चुनाव के बाद नेतन्याहू ने कट्टरपंथियों के साथ गठबंधन किया, ये वो लोग थे जो 1967 में छह दिन चले युद्ध के दौरान फिलिस्तीन में ज़ब्त की गई ज़मीन पर कब्जा जमाना चाहते थे.


ग़ज़ा युद्ध
जुलाई 2014 में, इज़रायल ने हमास पर ग़ज़ा पट्टी में एक मिलेट्री ऑपरेशन लॉन्च किया और जो टनल तस्करी के लिए इस्तेमाल की जा रही थी, उन पर सीधे रॉकेट से निशाना साध कर उड़ाया जा रहा था. इस युद्ध में फिलिस्तीन के करीब 2,251 लोग मारे गए थे, इसमें से ज्यादातर नागरिक थे और वहीं इज़रायल की तरफ से 74 लोग मारे गए थे जिसमें ज्यादातर सैनिक थे.


दक्षिण-पंथी सरकार

मई 2015 में, नेतन्याहू ने चौथी बार संसद में विश्वास मत हासिल किया. एक साल बाद ही उन्होंने यिसरेल बेतन्यू पार्टी के साथ गठबंधन किया और उनके प्रमुख लिबरमैन को रक्षा मंत्री का पद दिया. ये इज़रायल के इतिहास में सबसे कट्टर दक्षिण पंथी सरकार थी. जून 2017 में, अंतर्राष्ट्रीय विचारधारा के खिलाफ जाते हुए, 1991 में फिलिस्तीन के इलाके में कब्जाई ज़मीन पर सरकार की स्वीकृत की गई पहली इमारत का काम शुरू किया.




जलता हुआ ग़ज़ा

मार्च 2018 में ग़ज़ा में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसके तहत फिलिस्तीनियों ने इज़रायल स्थित अपने घर लौटने की मांग उठाई जहां से 1948 में यहूदी राष्ट्र बनने के बाद उन्हें निकाल बाहर कर दिया गया था. 2018 से दिसंबर 2019 तक 352 फिलिस्तिनी और इज़रायली आगजनी में मारे गए. आठ इज़रायली भी मारे गए.


राजनीतिक संकट

अप्रैल 2019 में लिकुद ने आम चुनाव में 120 में से 35 सीट जीती, इतनी ही सीटें नेतन्याहू के मध्यमार्गी विरोधी बैनी गांट्ज़ के हिस्से भी आई. नेतन्याहू बहुमत हासिल करने में नाकाम रहे. सितंबर 17 को नए चुनाव के बाद भी नेतन्याहू के लिकुद और गांट्ज़ के ब्लू और व्हाइट गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर रही. गठबंधन कोई नहीं बना पाया और तीसरे चुनाव की नौबत आ गई. इस बीच नेतन्याहू को समर्थन देने वाले डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2020 को मध्य पूर्व शांति योजना का अनावरण किया जो यहूदी राष्ट्र के पक्ष में है. चार अरब देश – यूएई, बहरिन, सुडान और मोरक्को ने इज़रायल के साथ अपने रिश्ते सामान्य किए. ट्रंप ने अमेरिकी दूतावास को यरुशलम स्थानांतरित करके इस शहर को इज़रायल की राजधानी की मान्यता दी जो एक तरह से नेतन्याहू को तोहफा था, इसके अलावा सिरियाई गोलन हाइट्स पर इज़रायल के कब्ज़े को भी मान्यता दी.


तीसरी बार गतिरोध

2 मार्च, 2020 को इज़रायल ने एक साल में तीसरी बार मतदान किया, लेकिन नेतन्याहू और गांट्ज़ के बीच फिर गतिरोध पैदा हुआ. महीना खत्म होने तक इज़रायल की अदालत ने नेतन्याहू पर लगे भ्रष्टाचार के केस की सुनवाई को टाल दिया और कोविड-19 के मामले बढ़ते गए, इस बीच गांट्ज़ ने अंतरिम आपातकाल सरकार के लिए एक करार किया. अप्रैल 20 को नेतन्याहू और गांट्ज़ ने तीन साल की एकजुट सरकार बनाई. समझौता हुआ कि नेतन्याहू 18 महीने के लिए प्रधानमंत्री रहेंगे, वहीं गांट्ज़ रक्षा मंत्री रहेंगे. फिर नए चुनाव से पहले 18 महीनों के लिए गांट्ज़ कुर्सी संभालेंगे, लेकिन यह डील ज्यादा नहीं चली.


दो साल में चौथा चुनाव

दो साल में चौथी बार हुए नए चुनाव में लिकुद ने बाज़ी मारी, लेकिन नेतन्याहू की बात नहीं बनी. इज़रायल के राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से सरकार बनाने के लिए कहा, लेकिन वह फिर डगमगा गए. मई 5 को विपक्षी नेता लापिड पर सरकार बनाने का जिम्मा आया. नेतन्याहू को झटका देते हुए कट्टर राष्ट्रवादी नेता नफतीली बेनेट ने कहा कि वह मजबूत सरकार बनाने के लिए दोस्त लापिड का साथ देंगे. नेतन्याहू ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा होगा.

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