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जलवायु परिवर्तन पर चिंतित बिल गेट्स, कहा- अमीर देशों को 'सिंथेटिक बीफ' अपनाना चाहिए

 माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अपनी किताब में दावा किया है कि गैस उत्सर्जन में कमी या इससे बचने में इनोवेशन बड़ी भूमिका निभाएगा. (Bill Gates)
माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने अपनी किताब में दावा किया है कि गैस उत्सर्जन में कमी या इससे बचने में इनोवेशन बड़ी भूमिका निभाएगा. (Bill Gates)

Bill Gates on Climate Change: सेल्युलर संरचना को देखें, तो यह आम मीट की तरह ही होता है, लेकिन इसे जानवर से नहीं लिया जाता. इसे न्यूट्रिएंट सीरम में मसल्स सेल्स बढ़ाकर तैयार किया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 11:36 AM IST
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नई दिल्ली. माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के सह-संस्थापक बिल गेट्स (Bill Gates) ने एक किताब लिखी है- 'How to Avoid a Climate Disaster.' इस किताब के जरिए उन्होंने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जुड़ी कई बातें लिखी हैं. उन्होंने बताया है कि वास्तव में जलवायु परिवर्तन का कारण बन रही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse gas emissions) को पूरी तरह कैसे हटाया जा सकता है. वहीं, उन्होंने प्रोटीन प्रॉब्लम को लेकर भी कहा है कि दुनिया के अमीर देशों को सिंथेटिक बीफ अपना लेना चाहिए.

अपनी किताब में उन्होंने दावा किया है कि गैस उत्सर्जन में कमी या इससे बचने में इनोवेशन बड़ी भूमिका निभाएगा. उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि सभी राष्ट्र इनोवेशन के जरिए यह काम कम कीमत पर कर सकेंगे. साथ ही यह राजनीतिक तौर पर भी संभव होगा. इसके अलावा उन्होंने अपनी किताब के आखिर में उन तरीकों की एक लंबी सूची शामिल की है, जिसके जरिए देश रिसर्च और डेवलपमेंट में ज्यादा खर्च कर सकते हैं.

क्या है 'सिंथेटिक बीफ' जिसके बारे में गेट्स बात कर रहे हैं
मांसाहार को लेकर गेट्स ने कहा, 'मुझे लगता है कि अमीर देशों को 100 फीसदी सिंथेटिक बीफ की ओर बढ़ना चाहिए. आप बदले हुए स्वाद के आदी हो जाएंगे.' और वो दावा कर रहे हैं कि इसका स्वाद समय के साथ और बेहतर होगा. दरअसल, सिंथेटिक बीफ को लैब में तैयार किया गया या कल्चर्ड मीट भी कहा जाता है. इसे लैब में सेल्स की मदद से तैयार किया जाता है.



सेल्युलर संरचना को देखें, तो यह आम मीट की तरह ही होता है, लेकिन इसे जानवर से नहीं लिया जाता. इसे न्यूट्रिएंट सीरम में मसल्स सेल्स बढ़ाकर तैयार किया जाता है. साथ ही मसल्स की तरह लगने वाले फाइबर्स में बदला जाता है. खास बात है कि सिंथेटिक बीफ की मदद से जानवरों पर जारी क्रूरता पर लगाम लगाई जा सकेगी. साथ ही यह ज्यादा असरदार, स्वस्थ, सुरक्षित होगा. लैब में तैयार होने के कारण वैज्ञानिक इसे स्वस्थ फैट, विटामिन या वैक्सीन से और बेहतर बना सकते हैं.
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