12 से 15 साल के बच्चों के लिए भी कोरोना वैक्सीन, फाइजर ने कहा- टीका 100% असरदार

फाइज़र कोरोना वैक्सीन. (सांकेतिक तस्वीर)

फाइज़र कोरोना वैक्सीन. (सांकेतिक तस्वीर)

Biontech Pfizer Coronavirus Vaccine: फाइजर-बायोएनटेक टीका कोरोना वायरस के उस नए प्रकार से सुरक्षा दे सकता है जो पहले ब्रिटेन और फिर दक्षिण अफ्रीका में पाया गया.

  • ए पी
  • Last Updated: March 31, 2021, 7:20 PM IST
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वॉशिंगटन. दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने बुधवार को कहा कि उसका कोविड-19 टीका 12 साल तक के बच्चों के लिये भी सुरक्षित है. कंपनी की इस घोषणा को इस आयु वर्ग के बच्चों के स्कूल जाने से पहले उनके टीकाकरण की संभावना के तौर पर देखा जा रहा है. कंपनी ने कहा है कि उनकी वैक्सीन इन बच्चों पर 100 फीसदी असरदार है.

कई देशों में ऐसे व्यस्कों को कोविड-19 टीकों की खुराकें दी जा रही है, जो कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में अति संवेदनशील हैं. फाइजर का टीका 16 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को लगाने की अनुमति है, लेकिन महामारी को रोकने के लिये सभी आयुवर्ग के बच्चों को टीका लगाया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, साथ ही इससे कम से कम बड़ी कक्षाओं के छात्रों के स्कूल जाने का रास्ता साफ हो सकता है.

फाइजर ने बताया कि 12 से 15 साल के 2,260 अमेरिकियों पर किये गए शोध के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार टीके की पूरी खुराकें ले चुके इनमें से किसी भी बच्चे के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का कोई मामला सामने नहीं आया.

इस बीच, एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर और जर्मन जैवप्रौद्योगिकी कंपनी बायोएनटेक द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित कोविड-19 टीका, कोरोना वायरस के उस नए प्रकार से सुरक्षा दे सकता है जो पहले ब्रिटेन और फिर दक्षिण अफ्रीका में पाया गया.
‘नेचर मेडिसिन’ नामक शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, कोरोना वायरस के ‘एन501वाई’ और ‘ई484के’ म्यूटेशन पर उक्त टीका प्रभावी है. अमेरिका के टेक्सास विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों समेत विशेषज्ञों के दल के अनुसार, टीके का वायरस के ई484के म्यूटेशन पर पड़ने वाला प्रभाव एन501वाई म्यूटेशन पर पड़ने वाले प्रभाव से थोड़ा कम है.

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फाइजर कोविड-19 की एक खुराक का ही प्रभावी असर दिखाई देता है: अध्ययन



दूसरी ओर, फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 टीके की केवल एक खुराक से ही उन लोगों में प्रभावी असर दिखाई देता है जो पूर्व में इस महामारी से संक्रमित हुए थे. एक अध्ययन के अनुसार इस एक खुराक से ही लोगों में इस महामारी का मुकाबला करने के लिए एक मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता पैदा होती है और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे कब संक्रमित हुए थे या निवारक उपाय करने से पहले वायरस के खिलाफ उनमें एंटीबॉडी बने थे या नहीं.

‘जर्नल यूरोसर्विलांस’ में प्रकाशित नवीनतम अध्ययन में जिव मेडिकल सेंटर में 514 कर्मियों के एक समूह को शामिल किया गया था. टीके की पहली खुराक लेने से पहले 17 प्रतिभागी एक और दस महीने के बीच किसी समय कोविड-19 से संक्रमित हुए थे. पूरे समूह के एंटीबॉडी स्तर को टीकाकरण से पहले मापा गया था और उसके बाद अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मनी की उसकी सहयोगी बायोएनटेक द्वारा विकसित बीएनटी162बी2 एमआरएनए टीके के असर को देखा गया. शोधकर्ताओं ने कहा कि टीके का असर उन लोगों में काफी प्रभावशाली था जो पहले इस महामारी से संक्रमित हुए थे.

अध्ययन का नेतृत्व करने वाले इजरायल में बार-इलान विश्वविद्यालय से प्रोफेसर माइकल एडेलस्टीन ने कहा, ‘‘इस अध्ययन से देशों को टीका नीति के बारे में निर्णय लेने में मदद मिल सकती है - उदाहरण के लिए, क्या पहले से संक्रमित लोगों को प्राथमिकता में टीका लगाया जाना चाहिए और यदि हां, तो उन्हें कितनी खुराक देनी चाहिए.’’ (इनपुट भाषा से भी)
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