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Coronavirus Vaccine: कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज़ लेने में देरी की तो नहीं होगा कोई असर!

कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine). (Pic- ANI)
कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine). (Pic- ANI)

Coronavirus Vaccine: कंपनी का यह बयान तब आया है जब जर्मनी और डेनमार्क जैसे देश वैक्‍सीन की दूसरी डोज के तय समय में देरी करने की बात कह रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2021, 12:15 PM IST
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नई दिल्‍ली. दुनियाभर में कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine) को लेकर अब टीकाकरण (Vaccination) का काम जारी होने वाला है. अमेरिका, ब्रिटेन जैसे कुछ देशों में तो यह शुरू भी हो चुका है. इस बीच दवा निर्माता कंपनी बायोएटेक और फाइजर ने अपनी कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine) को लेकर बड़ा दावा किया है. दोनों कंपनियों का कहना है कि अगर उनकी ओर से विकसित की गई कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine) के पहले और दूसरे यानी बूस्‍टर डोज में कोई देरी होती है तो कोरोना वैक्‍सीन के प्रभावी रहने के कोई सबूत नहीं हैं.

दोनों कंपनियों का यह संयुक्‍त बयान तब आया है जब जर्मनी और डेनमार्क जैसे देश दूसरी डोज के तय समय में देरी करने की बात कह रहे हैं. वहीं दवा कंपनियों फाइजर और बायोएनटेक का कहना है कि कोरोना वैक्‍सीन (Coronavirus Vaccine) की पहली और दूसरी डोज के बीच तीन हफ्तों का ही फासला होना चाहिए, जैसा कि परीक्षण में किया गया.





जर्मनी ने सोमवार को कोरोना वैक्‍सीन की ठीक सुचारू आपूर्ति बनाए रखने के लिए दूसरी डोज में देरी की बात पर विचार किया. ऐसा ही कदम ब्रिटेन ने पिछले हफ्ते उठाया है. वहीं डेनमार्क ने कोरोना वैक्‍सीन की पहली और दूसरी डोज के बीच में 6 हफ्तों के अंतराल को मंजूरी दे दी है.
वहीं फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना द्वारा विकसित कोविड-19 के टीके से एलर्जी होने की आशंका के बाद वैज्ञानिकों ने उन लोगों को दूसरी खुराक देने से पहले कुछ सुरक्षा उपायों की रूपरेखा तय की है, जिनमें पहली खुराक के बाद प्रतिकूल लक्षण नजर आए थे. ‘एलर्जी एंड क्लिनिकल इम्युनोलॉजी: इन प्रैक्टिस’ नाम के जर्नल में प्रकाशित शोध में कोविड-19 के टीके लगाए जाने के बाद होने वाली एलर्जी के ज्ञात तथ्यों के बारे में बताया गया है.

शोध में विशेषज्ञों के दल का नेतृत्व मेसाच्युसेट्स जनरल अस्पताल के एलर्जी विशेषज्ञों ने की. इसमें विस्तृत सलाह दी गई है, ताकि विभिन्न प्रकार की एलर्जी से ग्रस्त लोग सुरक्षित तरीके से कोविड-19 का टीका लगवा सकें.
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