कोरोना से भी भयावह बर्ड फ्लू फैलने की संभावना, दुनिया की आधी आबादी पर खतरा

कोरोना से भी भयावह बर्ड फ्लू फैलने की संभावना, दुनिया की आधी आबादी पर खतरा
कोरोना से भी भयावह बर्ड फ्लू फैलने की संभावना जाहिर की गई है.

एक अमेरिकी डॉक्टर और वैज्ञानिक ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से भी भयावह बर्ड फ्लू (Bird Flu) की महामारी फैलने की संभावना जताई है.

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वाशिंगटन: एक अमेरिकी डॉक्टर ने चेतावनी दी है कि कोरोना (Coronavirus) से भी भयावह बर्ड फ्लू (Bird Flu) बीमारी के फैलने की संभावना है. ये इतना खतरनाक हो सकता है कि इसकी वजह से दुनिया की आधी आबादी खत्म हो सकती है. अमेरिकी डॉक्टर के मुताबिक कोरोना का संक्रमण तो उसके सामने बच्चों के खेल की तरह होगा.

डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक शाकाहार को प्रोत्साहित करने वाले एक अमेरिकी डॉक्टर और वैज्ञानिक डॉ माइकल ग्रेगर ने इस बारे में जानकारी दी है. उन्होंने एक नई किताब लिखी है जिसका नाम है- महामारी से कैसे बचें. डॉ माइकल ग्रेगर शाकाहार के फायदे बताते रहे हैं.

उन्होंने कहा है कि जानवरों के मांस की वजह से कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं. इसकी वजह से समूची मानव जाति पर खतरा पैदा हो गया है. जानवरों को पालतू बनाने से लेकर उनके शिकार और उनके मांस को खाने के प्रति लगाव ने मानव जाति को खतरे में डाल दिया है.



जानवरों से फैलने वाले वायरस से सबसे ज्यादा खतरा



डॉ माइकल ने बताया है कि जूनोसेस इस तरह का संक्रमण है, जो जानवरों से इंसानों में फैलता है. ज्यादातार वायरस कोई नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. लेकिन इनमें से कुछ वायरस मसलन ट्यूबरक्लोसिस और सार्स जैसे वायरस इतनी तेजी से बढ़ते हैं कि ये काफी खतरनाक हो जाते हैं.

इसी कड़ी में कुछ थ्योरी के मुताबिक कोरोना वायरस का संक्रमण भी चीन के वुहान के मीट मार्केट के जरिए जानवरों के मांस से इंसानों के शरीर में आया है. डॉ माइकल ग्रेगर ने बताया है कि सबसे ज्यादा खतरा चिकेन से फैलने वाले वायरस से है. इस वक्त पूरी दुनिया में करीब 2400 करोड़ चिकेन पाले जा रहे हैं, जबकि 20 साल पहले इसकी संख्या आधी थी.

चिकेन आज के एग्रीकल्चर का बड़ा हिस्सा हैं. तकरीबन सभी देशों में चिकेन और अंडा खाए जा रहे हैं. सबसे चिंता की बात ये है कि चिकेन को बड़ी क्रूरता से पिंजरे में रखा जाता है. चिकेन फॉर्म्स की हालत बड़ी खराब होती है. इन्हें केमिकल वाले खाद्य पदार्थ खाने को दिया जाता है.

चिकेन से फैलने वाले वायरस से सबसे ज्यादा खतरा
डॉ माइकल ग्रेगर ने कहा है कि इसकी वजह से चिकेन में वायरस का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसके जरिए ये इंसानों के शरीर में प्रवेश कर सकता है.

उन्होंने लिखा है कि जितनी ज्यादा संख्या और जितनी क्रूरता से हम चिकेन को फॉर्मिंग करेंगे, इससे वायरस के फैलने का खतरा उतना ही ज्यादा होगा. ये महामारी को आमंत्रण देने जैसा है.

एवियन इंफ्लूएंजा जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू कहा जाता है, इस महामारी ने 1918 से 1920 के बीच दुनियाभार की करीब एक तिहाई आबादी को संक्रमित कर दिया था. इसकी वजह से कुल 10 फीसदी मौतें हुई थीं. इतिहास में ये सबसे भयावह महामारी के तौर पर दर्ज हैं.

डॉ माइकल ग्रेगर ने बताया है कि 1997 में बर्डड फ्लू के एक नए प्रकार का पता चला जिसे H5N1 नाम दिया गया. हांगकांग में इसके संक्रमण ने भयानक तबाही मचाई और इसके संक्रमण में आए करीब एक तिहाई लोगों की मौत हो गई. हालांक अच्छी बात ये रही कि इसका ट्रांसमिशन रेट काफी कम था.

एक्सपर्ट बताते हैं कि H5N1 का नया वायरस ज्यादा खतरनाक हो सकता है. एक्सपर्ट ने बताया है कि इससे ज्यादा मौतें हो सकती है और पूरी मानवजाति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

H5N1 लंग्स पर असर डालता है. लेकिन इसका नया वायरस शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है. ये पहले की तुलना में दस गुना ज्यादा तेजी से बदल सकता है. 1918 की महामारी से ये ज्यादा खतरनाक हो सकता है. इसकी वजह से मृत्युदर 50 फीसदी हो सकती है. इसलिए एक्सपर्ट इसे पूरी दुनिया की आधी आबादी के लिए खतरनाक मान रहे हैं.

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