'जामुन', 'खरगोश' और 'इंसान', पिछले 15 सालों में नासा ने मंगल पर खोजीं ये अजीबोगरीब चीजें

ऑपर्च्युनिटी नासा का सबसे लंबे समय तक मंगल पर रहने वाला रोवर है. यह करीब 15 सालों तक मंगल ग्रह के चक्कर मारता रहा.

News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 7:23 PM IST
'जामुन', 'खरगोश' और 'इंसान', पिछले 15 सालों में नासा ने मंगल पर खोजीं ये अजीबोगरीब चीजें
नासा के मार्स रोवर ऑपर्च्युनिटी ने मंगल पर कई सारी अजीबोगरीब चीजें खोजी हैं (फोटो क्रेडिट- नासा)
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Updated: June 20, 2019, 7:23 PM IST
नासा ने मंगल पर 2003 में दो रोवर भेजे थे. ये मंगल पर चक्कर काट रहे थे और वहां से कई चीजों की तस्वीरें नासा को भेज रहे थे. इन रोवर्स के नाम हैं, ऑपर्च्युनिटी और स्पिरिट. इन दोनों ने ही अपने मिशन के दौरान कुछ जबरदस्त चीजें खोजी हैं. हम आपको बता रहे हैं कि क्या हैं ये चीजें और क्या हैं उसका मतलब?

साल 2003 में नासा ने अपने दो मानवरहित रोवर मंगल पर अपने मंगल मिशन के तहत भेजे थे. ये रोवर तबसे वहां पर चीजों की तस्वीरें ले लेकर नासा को भेज रहे हैं. इस साल की शुरुआत में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने अपने इस 15 साल के मार्स मिशन के पूरे हो जाने की बात कही है. नासा का ऑपर्च्युनिटी रोवर से पिछले 8 महीनों से संपर्क भी कटा हुआ है.

ऑपर्च्युनिटी नासा का सबसे लंबे समय तक मंगल पर रहने वाला रोवर है. यह नासा के स्पिरिट रोवर के मुकाबले कई साल ज्यादा काम करता रहा है. स्पिरिट ने 2010 में ही काम करना बंद कर दिया था.

अब चूंकि नासा के दोनों ही रोवर काम करना बंद कर चुके हैं और यह मिशन पूरा हो चुका है. यहां हैं वो चीजें जो इस 15 साल के मिशन में नासा के इन दोनों रोवर ने मंगल पर खोजीं-

रोवर ने नासा पर ब्लूबैरीज जैसे पत्थर खोजे (फोटो क्रेडिट- नासा)


जामुन या ब्लूबैरीज
रोवर ऑपर्च्युनिटी ने अपने मंगल पर उतारे जाने के कुछ ही महीनों के अंदर, जहां उसे उतारा गया था, उसके पास से ही अजीब से दिखने वाले पत्थरों के एक इलाके की तस्वीर भेजी. इसे देखकर पहले तो वैज्ञानिक ये समझ ही नहीं सके कि यह क्या है. बाद में उन्होंने इन छोटे गोल-गोल पत्थरों को नाम दिया 'ब्लूबैरीज'.
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हालांकि वैज्ञानिक पूरी तरह से पता नहीं लगा सके कि ये पत्थर इस डिजाइन में कैसे पहुंचे. वे यह अनुमान लगा रहे हैं कि यह चंद्रमा पर पानी होने का सबसे पहला सबूत हो सकता है.

धरती के अलावा किसी ग्रह पर पहला उल्कापिंड (फोटो क्रेडिट- नासा)


धरती के अलावा किसी ग्रह पर पहला उल्कापिंड
2005 में ऑपर्च्युनिटी रोवर ने एक उल्कापिंड भी देखा था. जिसका आकार एक बास्केट बॉल की तरह था. उस समय नासा ने इसे धरती के अलावा किसी ग्रह पर खोजा गया पहला उल्कापिंड बताया था.

रोवर ने न सिर्फ इसे खोजा, बल्कि इसका परीक्षण भी किया था. जिसके बाद वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे ते कि इसमें ज्यादातर मात्रा लोहे और निकल की है. नासा ने इसके बाद इसका नाम हीट शील्ड रॉक रखा था क्योंकि यह एक रोवर की हीट शील्ड के पास ही मिला था. अत्यधिक गर्मी से खुद के बचाव के लिए नासा का रोवर इस हीट शील्ड को पहनकर चांद पर गया था. और 2003 में मंगल पर पहुंचने के बाद हीट शील्ड को खुद से अलग कर दिया था.

बड़े-बड़े कानों वाले खरगोश जैसी चीज (फोटो क्रेडिट- नासा)


'बनी' खरगोश
हालांकि ऑपर्च्युनिटी रोवर मंगल पर जीवन होने का कोई भी सबूत पेश नहीं कर पाया लेकिन एक बार इसने एक तस्वीर भेजी, जिसके बाद नासा के वैज्ञानिकों की सांसे तेज हो गईं. रोवर को अचानक से एक अजीब से चीज दिखी थी, जिसका आकार बड़े-बड़े कानों वाले खरगोश की तरह था. इस तस्वीर को 2004 में, रोवर के लाल ग्रह पर पहुंचने के दो महीने के अंदर ही लिया गया था. इस तस्वीर को 'मिशन सक्सेस' के तहत लिए पैनोरमा शॉट में भेजा गया था.

वैज्ञानिकों को यह आभास भी हुआ था कि जैसे ही मंगल पर हवा बही, इन कानों को थोड़ा हिलते हुए भी देखा गया था. जबकि नासा के इंजीनियरों ने इसके किसी भी तरह का जीवित प्राणी होने की सारी संभावनाओं को नकार दिया था और कहा था कि हो सकता है कि यह सिर्फ एक छोटे से रुई के टुकड़े जैसा कुछ था, जो शायद नासा के यान से ही बाहर आकर गिर गया था.

जेली भरे डोनट जैसी चीज (फोटो क्रेडिट- नासा)


जेली डोनट
इसके बाद इसने एक और अजीबोगरीब खोज की थी. यह थी डोनट जैसी दिखने वाली एक रहस्यमयी चीज. वह भी बिल्कुल ठीक कहें तो एक जेली भरे डोनट जैसी चीज. इस चीज को 2014 में ऑपर्च्युनिटी रोवर ने देखा था.

हालांकि रोवर इस जगह की तस्वीर पहले भी ले चुका था और उस वक्त यहां पर कुछ भी नहीं था. बाद में वैज्ञानिकों ने साधारण अनुमान लगाया कि यह एक साधारण पत्थर हो सकता है जिसे रोवर अपने पहियों के साथ ले आया था.

एक पत्थर पर आदमी जैसा कुछ (फोटो क्रेडिट- नासा)


मंगल पर 'इंसान'
साल 2007 में, स्पिरिट रोवर ने एक फोटो भेजी थी, जिसमें एक पत्थर पर आदमी जैसा कुछ बैठा हुआ दिख रहा था. जाहिर है ऐसी तस्वीर सामने आते ही तहलका मच गया था. लेकिन तब सारे ही अनुमानों को गहरा झटका लगा, जब नासा ने इसकी व्याख्या में बताया कि यह मंगल पर जीवन का सबूत नहीं हो सकता. नासा ने यह भी बताया कि यह मात्र एक भ्रामक पत्थर है.

स्पिरिट रोवर के बनाए गए निशान (फोटो क्रेडिट- नासा)


लिंगनुमा रोवर का निशान
मंगल ग्रह पर 2004 में पहुंचने के बाद, स्पिरिट रोवर ने मंगल की सतह पर जो निशान बनाए वे किसी लिंग की तरह थे. इसे धरती पर भेजे जाने के 10 साल बाद किसी रैडिट यूजर ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए जब यह बात लिखी तो यह तस्वीर वायरल होने लगी. लोगों ने इसपर मीम भी बनाए लेकिन जल्द ही नासा ने इसकी सच्चाई खोल दी और सारे अनुमान धराशायी हो गए.

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First published: June 20, 2019, 7:11 PM IST
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