पेड़ बन कर दुनिया के सामने आया 40 साल पहले मारा गया शख्स, हैरत में डाल देगी सच्चाई

फोटो सौ. (फेसबुक)
फोटो सौ. (फेसबुक)

साइप्रस में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जहां 40 साल पहले एक शख्स का (Murder) कर दिया गया था. लेकिन बाद में वह एक पेड़ (Tree) बनकर दुनिया के सामने आया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 3:41 PM IST
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साइप्रस. इस संसार की हर चीज एक दिन खत्म हो जाएगी. चाहे वो कोई इमारत हो या कोई इंसान. ऐसा माना जाता है कि इंसान मरने के बाद दोबारा जन्म लेते हैं. गीता में भी लिखा है आत्मा अजर-अमर है इसे ना आग जला सकती, ना पानी गला सकता और ना ही हवा सुखा सकती. हर इंसान का जन्म मरने के बाद किसी ना किसी रूप में जरूर होता है. ऐसा ही मामला साइप्रस में देखने को मिला. जहां 40 साल पहले मर (Dead) चुका एक आदमी पेड़ (Tree) बनकर दुनिया के सामने आ गया. द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स का 40 साल पहले मर्डर कर दिया गया था. जो अब पेड़ बनकर दुनिया के सामने दोबारा मौजूद है. खबरों के मुताबिक, 1974 में अहमेट हर्ग्यूनर नाम के एक शख्स को ग्रीक और टर्किश संघर्ष के बीच मार दिया गया था. कई सालों तक उसका मृत शरीर नहीं मिला, लेकिन जहां उसकी मौत हुई थी, वहां एक पेड़ उग आया. जब पूरे मामले की छानबीन की गई, तब उसकी मौत का रहस्‍य दुनिया के सामने आया.

जानकारी के मुताबिक, साइप्रस में हर्ग्यूनर और एक अन्‍य शख्‍स को संघर्ष के दौरान गुफा के अंदर डाइनामाइट से उड़ा दिया गया था. उस दौरान गुफा में एक छेद बन गया. छेद से सूरज की रोशनी उस अंधेरी गुफा में पहुंचने लगी और हर्ग्यूनर के पेट में पड़े अंजीर के बीज को फलने-फूलने का मौका मिल गया. देखते ही देखते पेट में मौजूद बीज ने पौधे का रूप ले लिया. और वो एक बड़ा अंजीर का पेड़ बन गया. उस पेड़ पर साल 2011 में सबसे पहले एक शोधकर्ता का ध्‍यान गया. यह शोधकर्ता भी इस बात से हैरान था कि गुफा के अंदर कैसे पेड़ निकल सकता है, वो भी ऐसे पहाड़ी इलाके में जहां आमतौर पर अंजीर के पेड़ पाए ही नहीं जाते हैं. उसके बाद इस मामले की रिसर्च की गई. रिसर्च में सामने आया कि यहां एक लाश काफी लंबे समय से दबी हुई थी. पुलिस ने जब पेड़ के आसपास खुदाई की तो इस स्थान से कुल तीन शव बरामद हुए.

बताया जा रहा है कि मरने से पहले हर्ग्यूनर ने अंजीर खाई होगी. हर्ग्यूनर की बहन मुनूर हर्ग्यूनर ने बताया कि, "हम जिस गांव में रहते थे, वहां करीब चार हजार लोग थे. उनमें आधी आबादी ग्रीक और आधी आबादी तुर्की के लोगों की थी. 1974 में तनाव शुरू हो गया. मेरा भाई टर्किश रेसिस्‍टेंट ऑर्गनाइजेशन में शामिल हो गया था. 10 जून को ग्रीक मेरे भाई को उठा ले गए."



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'खोजने पर भी नहीं मिला भाई'
मुनूर का कहना है कि उन्‍होंने अपने भाई को बहुत खोजा, लेकिन वो नहीं मिला. वो बताती हैं कि, "हमारे ब्‍लड सैंपल और लाश के डीएनए आपस में मैच हो गए और इसी वजह से हमें पता चल पाया कि हमारे भाई ने अपना आखिरी वक्‍त कहां गुजारा था. वो बताती हैं कि अंजीर के पेड़ की वजह से हमें हमारे भाई के बारे में पता चल पाया. बता दें कि साइप्रस ने 1981 में उन दो हजार लोगों की खोज के लिए एक कमेटी का गठन किया था, जो 1963 से 1974 के बीच गायब हो गए थे. कमेटी को लापता लोगों की लिस्‍ट बनाने के अलावा यह भी पता करना था कि उन लोगों के साथ आखिर हुआ क्‍या, जो इस दौरान गायब हो गए. लापता लोगों का पता लगाने के लिए 1,222 बार खुदाई अभियान चलाए गए, लेकिन सिर्फ 26 फीसदी मामलों में ही अवशेष मिल पाए. शोधकर्ताओं की टीम पिछले 12 सालों में अहमेट हर्ग्यूनर समेत 890 लोगों के अवशेष बरामद कर पाई है.
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