डगलस स्टुअर्ट को 'शगी बेन' के लिए मिला बुकर पुरस्कार-2020, अवनि रह गयीं पीछे

डगलस स्टुअर्ट की 'शगी बेन' को मिला बुकर पुरस्कार
डगलस स्टुअर्ट की 'शगी बेन' को मिला बुकर पुरस्कार

Booker Prize 2020: डगलस स्टुअर्ट के नॉवेल 'शैगी बेन' को साल 2020 के बुकर पुरस्कार के लिए चुन लिया गया है. इस पुरस्कार के तहत उनके 50 लाख रुपए की राशि दी जाएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 20, 2020, 8:41 AM IST
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लंदन. स्कॉटलैंड के लेखक डगलस स्टुअर्ट (Douglas Stuart) को उनकी किताब 'शगी बेन' (Shuggie Bain) के लिए साल 2020 का बुकर पुरस्कार (Booker Prize 2020) दिया जाएगा. बुकर पुरस्कार फाउंडेशन ने गुरुवार को इसका ऐलान किया. स्टुअर्ट को ये पुरस्कार जिस किताब के लिए मिल रहा है वो उनकी डेब्यू नॉवेल है. इस पुरस्कार के लिए नॉमिनेट हुई ये अब तक कि सिर्फ दूसरी ही स्कॉटिश नॉवेल है. इस पुरस्कार के तहत जीतने वाले को 50 हज़ार पाउंड करीब 50 लाख रुपए दिए जाते हैं. भारतीय मूल की लेखिका अवनि दोशी की किताब 'बर्न्ट शुगर' भी इस रेस में काफी आगे चल रही थी हालांकि सफलता स्टुअर्ट को मिली.

इस बार बुकर की दौड़ में कुल छह किताबें थीं. इस पुरस्कार का निर्णय करने वाली जूरी में ली चाइल्ड, समीर रहीम, एमिली विल्सन और लेन सिसे शामिल रहे जिसे मारग्रेट बस्बी चेयर कर रहीं थीं. 'शगी बेन' छोटे लड़के की कहानी है जो कि 1980 के दशक में ग्लासगो, स्कॉटलैंड के सरकारी मकानों में कहीं रह रहा था. शैगी और उसके भाई-बहनों को उसके पिता छोड़कर चले गए थे और उनकी मां ने उसे पाला जो कि खुद एक शराबी थीं.

राजनीतिक नॉवेल मानी जाती है शगी बेन
गार्जियन में शगी बेन का रिव्यू लिखने वाले एलेक्स प्रेस्टन के मुताबिक ये के बेहद गा,भीर राजनीतिक नॉवेल है, ये ग्लासगो के समाज पर से पर्दा उठाकर रख देती है जहां लोग सभ्य होने का दिखावा करते आए हैं. इस नॉवेल के जरिए स्टुअर्ट गरीबी और उससे जुड़ी सच्चाइयों पर बात करते हैं. इस नॉवेल को लिखने के लिए स्टुअर्ट ने 10 साल से भी ज्यादा का वक़्त लिया था. स्टुअर्ट ने ये किताब अपनी मां को समर्पित की है जो एक शराबी थीं और उनकी मौत जब स्टुअर्ट 16 साल के थे तभी हो गयी थी.
अवनि दोशी भी रहीं करीबी


दुबई में रह रही भारतीय मूल की लेखिका अवनि दोशी की किताब 'बर्न्ट शुगर' भी बुकर पुरस्कार की रेस में शामिल थी. अमेरिका में जन्मी और वर्तमान में दुबई में रह रहीं अवनि की पुस्तक के साथ बुकर पुरस्कार की दौड़ में जिम्बावे के लेखक सिटसी दांगारेंबगा की ‘‘दिस मॉरनेबल बॉडी’’, अमेरिकी लेखक डायना कुक की ‘‘ द न्यू वाइल्डनेस’’, माजा मैन्जिस्टे की ‘द शैडो किंग’,ब्रांडन टेलर की ‘‘रियल लाइफ’’और न्यूयॉर्क में रह रहे स्कॉटलैंड के लेखक डगलस स्टुअर्ट की ‘‘शगी बेन’’ शामिल थे.




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