दुनियाभर के कई मुसलमान क्यों कर रहे हैं हज यात्रा के बहिष्कार की मांग

लीबिया के सबसे जानेमाने सुन्नी मौलवी ग्रैंड मुफ्ती सादिक अल-घरीआनी ने बहिष्कार का आह्वान किया, तब दुनियाभर में इसकी गूंज सुनाई पड़ी.

News18Hindi
Updated: July 9, 2019, 1:24 PM IST
दुनियाभर के कई मुसलमान क्यों कर रहे हैं हज यात्रा के बहिष्कार की मांग
फॉरेन पॉलिसी डॉट कॉम के एक आंकड़े अनुसार हर साल करीब 23 लाख हज यात्री मक्का की यात्रा करते हैं.
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Updated: July 9, 2019, 1:24 PM IST
सऊदी अरब में स्थिति इस्लाम के पवित्र तीर्थस्‍थल मक्का में होने वाली हज यात्रा का इस बार मुस्लिम समाज के ही कई लोग विरोध कर रहे हैं. यह बेहद चौंकाने वाला है, क्योंकि सउदी अरब के शासक प्र‌िंस मोहम्मद बिन सलमान ने हज यात्रा को और ज्यादा आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं. फिर आखिर इस विरोध के पीछे वजह क्या है? गहराई से देखे जाने पर कई परतें खुलती हैं.

राजनीतिक कारणों से धार्मिक यात्रा में आई बाधा


सऊदी अरब इन दिनों आंतरिक राजनीतिक कलह से गुजर रहा है. प्रिंस सलमान जिन नीतियों पर सऊदी अरब को आगे ले जाना चाह रहे हैं, उसे कई मुस्लिम व धार्मिक संगठन खुश नहीं है. हज यात्रा के बहिष्कार की चिंगारी पिछले साल ही उठने लगी थी. लेकिन बीते अप्रैल में जब लीबिया के सबसे जानेमाने सुन्नी मौलवी ग्रैंड मुफ्ती सादिक अल-घरीआनी ने बहिष्कार का आह्वान किया, तब दुनियाभर में इसकी गूंज सुनाई पड़ी. मौलवी के अपील में दोबारा हज यात्रा करने पर इस्लाम में पाप का भागीदार बनने का भी जिक्र किया. हालांकि विरोध के पीछे कारण कुछ और ही था.

हज यात्रा के पैसे से अमीर हो रहा है सऊदी अरब

हज के मौजूदा विरोध के पीछे पहला और प्रमुख तर्क यह दिया जा रहा है कि हज यात्रा के दौरान दुनियाभर के मुसलमान अपने पैसे सऊदी अरब को दे आते हैं. इससे सऊदी अरब की अर्थव्यस्‍था को भारी फायदा हो रहा है.

हज के पैसे से खून-खराबे को बढ़ावा दे रहा है सऊदी
लीबियाई मौलवी का आरोप है कि हज से मिलने वाले पैसों से अरब की ना केवल अर्थव्यवस्‍था को मजबूती मिल रही है, बल्कि उन पैसों का इस्तेमाल दहशत फैलाने के लिए किया जा रहा है.
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सऊदी अरब पर आरोप है कि हज से मिलने वाले पैसों से सऊदी अरब हथ‌ियारों की खरीदारी कर रहा है. दूसरे तरीकों से इन हथ‌ियारों का इस्‍तेमाल सीरिया, लीबिया, ट्यूनीशिया, सूडान और अल्जीरिया जैसे देशों में दहशत फैलाने में किए जा रहे हैं. इनका हवाला देते हुए मौलवी सादिक ने दुनियाभर के मुस्लिमों से कहा कि हज पर जाकर सऊदी को पैसा देकर खून-खराबा फैलाने वाले देश की मदद बिल्‍कुल भी ना करें.

बीते सालों में सऊदी में बढ़ी है दहशतगर्दी
फॉरेन पॉलिसी डॉट कॉम की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि यमन में सऊदी के द्वारा सप्‍लाई किए गए बमों से लगातार हमले जारी हैं. इनमें हजारों लोग जान से मारे जा चुके हैं. जबकि इंस्ताबुल के सऊदी दूतावास में पत्रकार जमाल खशोगी की विभत्स हत्या की गई. माना जा रहा है कि सऊदी लगातार दशहतगर्दी को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें हज से मिलने वाले पैसे बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं.

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पहले से चल रहा है विरोध, इस बार ट्विटर पर हुआ ट्रेंड
लीबियाई मौलवी हज यात्रा के बहिष्कार को लेकर आवाज बुलंद करने वाले पहली शख्सियत नहीं हैं. इससे पहले सऊदी अरब के ही प्रखर आलोचक युसूफ अल-काराडावी ने पिछले साल अगस्त महीने में फतवा जारी कर बहिष्कार का आह्वान किया था. इसमें उन्होंने हज के विकल्प के तौर पर दूसरे रास्ते भी सुझाए थे, जिनमें भूखों को खाना-खिलाना समेत बेसहारों को सहारा देना शामिल था.



लेकिन वर्तमान विरोध ने एक ग्लोबल रूप धारण किया है. इस बार खुलकर दुनियाभर के मुसलमानों ने प्रिंस के खिलाफ एक सुर में आवाज उठाई है. इस आवाज का नाम बना है, #boycotthajj. ट्विटर के इस हैशटैग पर हज के बहिष्कार के लिए जमकर प्रचार किया जा रहा है. साथ ही प्रिंस सलमान को खून का सौदागर बताया जा रहा है.







इस्लाम का मसीहा बनने के लिए सऊदी करता है कई इंतजाम
सऊदी अरब बखूबी जानता है उसके लिए हज यात्रा के क्या मायने हैं. इसलिए सऊदी अरब अपनी ऐतिहासिक मूल्यों का काफी खयाल रखता है. इस्लाम के दोनों प्रमुख शहरों मक्का और मदीना, व हजरत मोहम्मद पैगंबर और काबा दोनों की मजार इसी देश में हैं. अपने इस आकर्षण को ही बचाए रखने के लिए जब 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई तो धार्मिक मान्यताओं को बचाने के लिए सऊदी अरब में दुनियाभर के मस्जिदों को बनाए रखने और उन्हें और ज्यादा मजबूत करने के लिए अरबों-खरबों की फंडिंग की थी.

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यही वजह कि जब कभी इस्लाम को लेकर शिया-सुन्नी में बहस छिड़ती है तो सऊदी अरब से ही मामले में अंतिम फैसले के लिए दुनिया ताक लगाए रखती है. ऐसे में सऊदी अरब लगातार खुद को इस्लामिक देशों के नेतृत्वकर्ता के रूप में देखता है.



अरब देशों में आंतरिक कलह के आसार
सऊदी अरब किसी भी हालत में अपने देश से हज यात्रियों को बिछड़ता नहीं देखना चाहेगा. ऐसे में लीबियाई मौलवी हों या यमन के दूसरे खलीफा, सऊदी अरब सबको शांत कराने की ताक में रहेगा. इससे अरब देशों में आतंरिक कलह के आसार बढ़ते जा रहे हैं.

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फॉरेन पॉलिसी डॉट कॉम के एक आंकड़े अनुसार हर साल करीब 23 लाख हज यात्री मक्का की यात्रा करते हैं. इससे सऊदी अरब को अरबों-खरबों रुपये का व्यापार मिलता है. इन्हीं सब मामलों को देखते हुए सऊदी अरब रियाद के प्रिंस से भी रिश्ते खराब हो गए हैं. जबकि यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार अरब के देशों में अस्पतालों, शादियों, बच्चों के स्कुल बसों को बम से निशाना बनाया जा रहा है. इन सब को खत्म करने के लिए सउदी अरब को ही प्रमुख भूमिका निभानी होगी.
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