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धरती का पारा 2 डिग्री भी बढ़ा तो 100 करोड़ लोगों पर बरसेगी आग, वैज्ञानिकों का अलर्ट

धरती का पारा 2 डिग्री भी बढ़ा तो 100 करोड़ लोगों पर बरसेगी आग, वैज्ञानिकों का अलर्ट

यदि धरती का तापमान 2 डिग्री भी बढ़ गया तो 100 करोड़ लोगों पर खतरा बढ़ जाएगा. (सांकेतिक फोटो)

यदि धरती का तापमान 2 डिग्री भी बढ़ गया तो 100 करोड़ लोगों पर खतरा बढ़ जाएगा. (सांकेतिक फोटो)

ब्रिटेन (britain) के मौसम विभाग (Weather department) की रिपोर्ट बताती है कि अगर दुनिया का तापमान 2 डिग्री बढ़ता है तो हीट स्ट्रेस (Heat stress) में 15 गुना बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जिसकी चपेट में दुनियाभर के हर क्षेत्र के लोग आएंगे. हीट स्ट्रेस को गर्मी और उमस के एक घातक मेल के तौर पर परिभाषित किया जाता है. मौसम विभाग को मिले नए आंकड़ों के मुताबिक, नए तापमान से होने वाले हीट स्ट्रेस से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या आज 6.8 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ हो गई है. अगर 4 डिग्री तापमान बढ़ता है तो वह दुनिया की आधी आबादी को अत्यधिक गर्मी की चपेट में ले सकता है.

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    लंदन.  ब्रिटेन (britain) के मौसम विभाग (Weather department) की रिपोर्ट बताती है कि अगर दुनिया का तापमान 2 डिग्री बढ़ता है तो हीट स्ट्रेस (Heat stress)  में 15 गुना बढ़ोतरी देखी जा सकती है, जिसकी चपेट में दुनियाभर के हर क्षेत्र के लोग आएंगे. हीट स्ट्रेस को गर्मी और उमस के एक घातक मेल के तौर पर परिभाषित किया जाता है. मौसम विभाग को मिले नए आंकड़ों के मुताबिक, नए तापमान से होने वाले हीट स्ट्रेस से प्रभावित हो सकने वाले लोगों की संख्या आज 6.8 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ हो गई है. अगर 4 डिग्री तापमान बढ़ता है तो वह दुनिया की आधी आबादी को अत्यधिक गर्मी की चपेट में ले सकता है.

    मौसम विभाग में जलवायु प्रभाव के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एंडी हार्टेले का कहना है कि इस स्तर के ऊपर जानेे का सीधा मतलब है कि लोगों का अत्यधिक खतरे में पड़ना, आबादी का कमजोर तबका या ऐसे लोग जिन्हें काम के सिलसिले में बाहर निकलना होता है, या वे जो खुले मैदानों में सूरज की सीधी रोशनी में काम करते हैंं ;  वे सभी बहुत ज्यादा खतरे हैं.  ये नतीजे 2 डिग्री और 4 डिग्री जलवायु परिवर्तन के पांच भिन्न प्रकारों से प्रभावित क्षेत्रों कों दर्शाने वाले मानचित्रों की श्रंखला के हिस्से के रूप में सामने आए हैं. इसके अलावा बाढ़, जंगल में लगने वाली आग, सूखा और खाद्य असुरक्षा भी इन प्रकारों में शामिल हैं.

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    इंसानी हीट स्ट्रेस का खतरा तापमान और उमस पर निर्भर करता है. इसे वेट बल्ब ग्लोब टेंपरेचर (डब्ल्यूबीजीटी) का इस्तेमाल करके इंगित किया जाता है. 32 डिग्री से ऊपर डब्ल्यूबीजीटी अत्यधिक खतरे की ओर इशारा करता है. इस स्तर पर बाहर काम करने वाले और आबादी का कमजोर तबके के शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है.

    डॉ एंडी विल्टशायर (अर्थ सिस्टम और मिटीगेशन साइंस प्रमुख) बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन में से कोई भी असर एक भयानक भविष्य की झलक दिखाता है. लेकिन जलवायु परिवर्तन में गंभीर बदलाव से कई तरह के प्रभाव देखने को मिलेंगे और हमारे मानचित्र दिखाते हैं कि कुछ क्षेत्रों में इसके कई तरह के असर देखे जा सकते हैं. शायद ब्राजील और इथियोपिया जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ऊपर बताए गए पांच खतरों में से चार का असर देखा जा सकता है. अगर जलवायु परिवर्तन से बचना है तो हमें तत्काल प्रभाव से तेजी से हो रहे उत्सर्जन में भारी कटौती लानी पड़ेगी.

    Tags: Britain, Heat stress, Weather department

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