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ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई मूल के लोगों पर कोरोना का कहर, अधिक हुई मौतें : अध्‍ययन

ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई मूल के लोगों पर कोरोना का कहर, अधिक हुई मौतें : अध्‍ययन

ब्रिटेन में गोरों की अपेक्षा दक्षिण एशियाई लोगों की कोरोना वायरस से अधिक मौतें हुई हैं. ( फाइल फोटो)

ब्रिटेन में गोरों की अपेक्षा दक्षिण एशियाई लोगों की कोरोना वायरस से अधिक मौतें हुई हैं. ( फाइल फोटो)

COVID-19 DEATHS : ब्रिटेन में कोरोना महामारी के कारण गोरे निवासियों की तुलना में अश्‍वेत और अन्‍य जातीय के अल्‍पसंख्‍यक लोग अधिक मर रहे हैं. यह जानकारी देते हुए सरकारी कमीशन रिपोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा संभवत: टीकाकरण की कम दरों के कारण हो रहा हो. डॉ. रागीब अली ने कहा कि पहली दो लहरों में यह देखा गया है कि मुख्‍य रूप से गोरों की तुलना में जातीय अल्‍पसंख्‍यकों में उच्‍च मृत्‍यु दर रही. ऐसा संक्रमण के उच्‍च जोखिम के कारण हुआ और इससे विशेष रूप से वृद्ध आयु वर्ग के लोग प्रभावित हुए.

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    लंदन. ब्रिटेन (Britain) में कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के कारण गोरे निवासियों की तुलना में अश्‍वेत और अन्‍य जातीय के अल्‍पसंख्‍यक लोग अधिक मर (covid-19 deaths) रहे हैं. यह जानकारी देते हुए सरकारी कमीशन रिपोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा संभवत: टीकाकरण (vaccination) की कम दरों के कारण हो रहा हो. अध्‍ययन में पाया गया है कि गोरे लोगों में वायरस के पॉजीटिव टेस्‍ट की संभावना अधिक होती है, लेकिन अश्‍वेत और दक्षिण एशिया मूल के ब्रिटेन निवासियों में उच्‍च मृत्‍यु दर होती है. ब्रिटिश सरकार के COVID-19 और जातीयता पर स्वतंत्र सलाहकार डॉ. रागीब अली ने कहा कि पहली दो लहरों में यह देखा गया है कि मुख्‍य रूप से गोरों की तुलना में जातीय अल्‍पसंख्‍यकों में उच्‍च मृत्‍यु दर रही.

    उन्‍होंने कहा कि ऐसा संक्रमण के उच्‍च जोखिम के कारण हुआ और इससे विशेष रूप से वृद्ध आयु वर्ग के लोग प्रभावित हुए. हाल के दिनों में हम गोरे लोगों की तुलना में जातीय अल्‍पसंख्‍यकों में कम संक्रमण दर देख रहे हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती होना और उनकी मृत्यु की दर अभी भी अधिक है. इस पैटर्न के साथ अब उच्च जोखिम वाले समूहों में टीके के स्तर का मिलान हो रहा है. उन्‍होंने कहा कि इन दिनों ब्रिटिश स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों ने बड़ा अभियान शुरू किया है. इससे जातीय अल्पसंख्यकों के बीच टीके की झिझक दूर हो रही है. इस अभियान में सामुदायिक समूहों और धार्मिक नेताओं ने भी अपना योगदान दिया है.

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    टीकाकरण दरों में सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई 

    उन्‍होंने कहा कि इससे कुछ सफलता मिली है. अक्टूबर से पहले छह महीनों में किसी भी समूह में अफ्रीकी और पाकिस्तानी लोगों में टीकाकरण दरों में सबसे बड़ी वृद्धि देखी गई है. लेकिन कुल टीकाकरण दर गोरे लोगों में सबसे अधिक और अश्वेत समूहों में सबसे कम है. ब्रिटेन में लगभग 90% वयस्कों को कम से कम एक वैक्सीन की खुराक मिली है, लेकिन एशियाई समुदायों में यह आंकड़ा 80% से कम है और ब्लैक अफ़्रीकी और ब्लैक कैरेबियन पृष्ठभूमि के लोगों में दो-तिहाई से भी कम है. सरकार ने अली को तब नियुक्त किया जब यह स्पष्ट हो गया कि कुछ जातीय समूहों में टीकाकरण के आंकड़ों में कमी देखी गई थी.
    इस अध्‍ययन ने कई कारकों पर जानकारी दी है. कुछ जातीय समूहों में स्‍वास्‍थ्‍य स्थितियों का प्रचलन अधिक होता है. उनके घरों में रहने वालों की संख्‍या भी अधिक होती है और वे फ्रंटलाइन नौकरियों में अधिक होते हैं जैसे टैक्‍सी ड्राइवर. इस समूह में महामारी की शुरुआत में उच्‍च संक्रमण दर देखी गई थी.

    सभी लोगों को तीसरी बूस्‍टर खुराक दे दी जाए

    समानता मंत्री केमी बडेनोच ने कहा कि COVID-19 विभिन्न जातीय समूहों को कैसे प्रभावित करता है, महामारी शुरू होने के बाद से इसकी समझ बदल गई है. यह जरूरी है कि जोखिम वाले लोगों को उनका बूस्टर टीका मिल जाए. उन्होंने कहा कि अब हम जानते हैं कि वे कहां रहते हैं, और वे कितने लोगों के साथ रहते हैं, यह उतना अहम नहीं है, जितना कि वायरस के प्रति उनकी संवेदनशीलता. सरकार का लक्ष्‍य है कि जनवरी तक 18 साल और उससे अधिक आयु के सभी लोगों को तीसरी बूस्‍टर खुराक दे दी जाए. स्वास्थ्य अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे सुरक्षा बढ़ेगी. वहीं नए वेरिएंट ओमिक्रॉन को दूर रखने में भी मदद मिलेगी. ब्रिटेन ने 145,000 से अधिक कोरोनोवायरस मौतें दर्ज की हैं, जो रूस के बाद यूरोप में सबसे अधिक है.

    Tags: Britain, Corona Pandemic, Covid-19 deaths, Positive, Vaccination

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