UN महासभा में ब्रिटेन पीएम बोरिस जॉनसन बोले- Corona के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (फोटो सौ. ट्विटर)
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (फोटो सौ. ट्विटर)

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (PM Boris Johnson) ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus) ने विभन्न देशों के बीच के रिश्तों को अस्तव्यस्त कर दिया है. उन्होंने विश्व नेताओं से कोविड-19 के 'साझे दुश्मन' के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया.

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  • Last Updated: September 26, 2020, 10:39 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र. कोरोना वैक्सीन को लेकर अब ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन का बयान सामने आ रहा है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि ऑक्सफोर्ड वैक्सीन क्लीनिकल परीक्षण के तीसरे चरण में पहुंच गई है. AstraZeneca ने पहले से ही लाखों डोज का निर्माण शुरू कर दिया है, ताकि कामयाबी मिलने पर तेजी से वितरण हो सके. हम भारत के Serum संस्थान के साथ एक बिलियन डोज की आपूर्ति करने के लिए समझौता कर चुके हैं. साथ ही निम्न और मध्यम आय वाले देशों तक डोज पहुंचाने पर समझौता किया जा चुका है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने विभन्न देशों के बीच के रिश्तों को अस्तव्यस्त कर दिया है. उन्होंने विश्व नेताओं से कोविड-19 के 'साझे दुश्मन' के खिलाफ एकजुट होने का आग्रह किया. जॉनसन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पहले से रिकॉर्ड किए गए संबोधन में कहा कि महामारी के नौ महीनों के दौरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय की धारणा बिखरी सी प्रतीत होती है. ऐसा फिर कभी नहीं होना चाहिए कि हमें एक ही दुश्मन के खिलाफ अलग-अलग 193 अभियान चलाने पड़ें. जॉनसन ने अन्य वैश्विक महामारी को रोकने की योजना भी बताई है. उनकी योजना में पुशजन्य अनुसंधान प्रयोगशाला का नेटवर्क खड़ा करने और खतरनाक विषाणुओं की पशुओं से मानव में आने से पहले ही पहचान करना शामिल है.

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कोरोना संक्रमित हो गए थे बोरिस
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री खुद कोविड-19 से संक्रमित हो गए थे और उन्हें तीन रातें आईसीयू में बितानी पड़ी थी. उन्होंने बीमारी के प्रकोप के बारे में बताने के लिए जल्द चेतावनी प्रणाली बनाने के लिए देशों से आंकड़े साझा करने की अपील की और कहा कि मुल्कों को जरूरी सामान के निर्यात पर नियंत्रण नहीं करना चाहिए जैसा कई देशों ने महामारी के दौरान किया है. जॉनसन ने कोरोना वायरस का टीका उपलब्ध होने पर दुनिया के 92 गरीब देशों को यह टीका हासिल करने में मदद के लिए 63.6 करोड़ डॉलर की प्रतिबद्धता भी जताई है. उन्होंने कहा कि ब्रिटेन विश्व स्वास्थ्य संगठन की आर्थिक सहायता अगले चार सालों में 30 प्रतिशत तक बढ़ाएगा.
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