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अमेरिका अब सुपरपावर नहीं रहा, अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी पर ब्रिटेन का बड़ा बयान

काबुल के नजदीकी इलाके वजीर अकबर खान में पेट्रोलिंग करते तालिबानी लड़ाके. (AP/18 Aug 2021)

काबुल के नजदीकी इलाके वजीर अकबर खान में पेट्रोलिंग करते तालिबानी लड़ाके. (AP/18 Aug 2021)

UK Defence Secretary US Super Power: तालिबान ने कई प्रमुख शहरों पर कब्जा करने के बाद 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था. यह 31 अगस्त की समयसीमा से दो हफ्ते पहले हुआ था.

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    लंदन. ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने अफगानिस्तान में करीब 20 साल बाद फिर से तालिबान की वापसी को अमेरिका के लिए करारी शिकस्त बताया और कहा कि उसे अब महा शक्ति नहीं कह सकते. वालेस ने परोक्ष रूप से अमेरिका पर हमला बोला और सुपरपावर मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह देश अब सिर्फ एक बड़ी शक्ति बनकर रह गया है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद आलोचनाओं से घिर जो बाइडन के लिए ब्रिटेन के रक्षा मंत्री का यह बयान बड़ा झटका है.

    जब उनसे यह पूछा गया कि क्या अफगानिस्‍तान से ब्रिटिश सेना की निकासी को देश की शक्ति से जोड़कर देखा जा सकता है, तो उन्होंने इसका जवाब ‘हां’ में दिया. वालेस ने कहा, ‘क्योंकि ब्रिटेन एक सुपरपावर नहीं है, तो ऐसे में संकटग्रस्त देश से निकलना निश्चित ही हमारी सीमा को प्रदर्शित करता है.’ हालांकि यह पहली बार नहीं है जब वालेस ने खुलकर अमेरिका की आलोचना की है. इससे पहले उन्होंने अफगानिस्तान में शांति के लिए तालिबान के साथ समझौते को एक भूल बताया था.

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    गौरतलब है कि बीते 29 अगस्त को ब्रिटेन के शेष सैनिकों के काबुल से वापस अपने देश पहुंचने के साथ ही ब्रिटेन का अफगानिस्तान में 20 साल लंबा सैन्य अभियान खत्म हो गया जहां तालिबान ने कब्जा कर लिया है. तालिबान ने कई प्रमुख शहरों पर कब्जा करने के बाद 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था. यह अमेरिका के देश से जाने की समयसीमा से दो हफ्ते पहले हुआ था.

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    ब्रिटेन से पहले रूस ने भी अफगानिस्तान में अमेरिका की भागीदारी की आलोचना करते हुए दावा किया था कि वहां उसने अपनी 20 साल लंबी सैन्य उपस्थिति से ‘शून्य’ हासिल किया है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बीते एक सितंबर को कहा था कि 20 वर्षों तक, अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में ‘… वहां रहने वाले लोगों को सभ्य बनाने की कोशिश कर रही थी. इसका परिणाम व्यापक त्रासदी, व्यापक नुकसान के रूप में सामने आया .. यह नुकसान दोनों को हुआ, ये सब करने वाले अमेरिका को और इससे भी अधिक अफगानिस्तान के निवासियों को. परिणाम, अगर नकारात्मक नहीं तो शून्य है.’

    पुतिन ने कहा कि ‘बाहर से कुछ थोपना असंभव है. अगर कोई किसी के लिए कुछ करता है, तो उन्हें उन लोगों के इतिहास, संस्कृति, जीवन दर्शन के बारे में जानकारी लेनी चाहिए… उनकी परंपराओं का सम्मान करना चाहिए.’ रूस दस साल तक अफगानिस्तान में युद्ध लड़ता रहा और 1989 में सोवियत सैनिकों की वापसी हुई. रूस ने पिछले कुछ वर्षों में मध्यस्थ के रूप में राजनयिक वापसी की है.

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