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ब्रिटेन की अश्वेत आबादी ने माना-पुलिस उनसे सम्मान से नहीं आती पेश

ब्रिटेन की अश्वेत आबादी ने माना-पुलिस उनसे सम्मान से नहीं आती पेश

अश्वेत आबादी ने माना कि पुलिस उनके साथ भेदभाव करती है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अश्वेत आबादी ने माना कि पुलिस उनके साथ भेदभाव करती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

ब्रिटेन के अश्वेत निवासियों (Black People) की कई पीढ़ियां ने यहां अपना जीवन व्यतीत करने के बाद यह अनुभव किया कि देश की पुलिस और राजनीति (Police and Politicians) ने उनके साथ भेदभाव किया और उन्हें विफलता की ओर धकेला है.

    लंदन. ब्रिटेन के अश्वेत निवासियों (Black People) की कई पीढ़ियां ने यहां अपना जीवन व्यतीत करने के बाद यह अनुभव किया कि देश की पुलिस और राजनीति (Police and Politicians) ने उनके साथ भेदभाव किया और उन्हें विफलता की ओर धकेला है. सीएनएन और सेवंता कॉर्नेस ने मिलकर एक सर्वेक्षण कराया था जिसमें यह बात सामने आई कि ब्रिटेन में अश्वेत आबादी पुलिस में संस्थागत तौर पर पैठे नस्लवादी विचार से दुखी और परेशान है.

    इस सर्वे में शामिल हुए 1535 लोग

    सीएनएन ने यह सर्वे 2012 से जून 2014 के बीच 18 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के 1535 ब्रिटिश लोगों का आॅनलाइन सर्वेक्षण किया जिसमें कम से कम 500 काले व अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को शामिल किया गया था. इस सर्वे में शामिल लोगों से यह पूछा गया कि क्या पुलिस उनसे सम्मान से पेश आती है. इसके जवाब में 49 फीसदी काले लोगों ने कहा कि पुलिस उनके साथ सम्मान से पेश नहीं आती है जबकि 26 फीसदी गोरे लोगों ने कहा कि उनके साथ पुलिस अच्छा व्यवहार नहीं करती है. यह अंतर स्पष्ट है कि ब्रिटिश पुलिस काले लोगों के साथ हिकारत से पेश आती है जबकि वे गोरों के साथ ऐसा कम करते हैं.

    पुलिस नस्लवादी भेदभाव करती है: सर्वे

    इस सर्वे में एक दूसरा प्रश्न यह पूछा गया कि ब्रिटिश पुलिस संस्थागत तौर पर नस्लवादी है. इसके जवाब में 54 फीसदी काले लोगों ने हां कहा जबकि केवल 27 फीसदी श्वेत लोगों का यह मानना है कि पुलिस नस्लवादी व्यवहार करती है.अश्वेत लोग श्वेत लोगों की तुलना में दोगुने हैं जो यह सोचते हैं कि ब्रिट्रिश पुलिस और मीडिया उनसे भेदभाव करती है. देश में ऐतिहासिक नस्लीय अन्याय को दूर करने के लिए सरकार ने बहुत कम काम किया है. यही वजह है कि बहुत से काले लोग यह मानते हैं कि देश की गर्वनिंग कंर्जवेटिव पार्टी संस्थागत रूप में नस्लवादी है.

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    अमेरिका में 25 मई को जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस द्वारा हत्या किए जाने के बाद अश्वेतों के समर्थन में दुनिया भर में आंदोलन उठ खड़े हुए. कई देशों में नस्लीय भेदभाव के प्रतीक माने जाने वाले मूर्तियों को हटाए जाने की मांग भी प्रदर्शनकारियों ने की. इस महीने की शुरूआत में ब्रिटेन में 17वीं सदी के इंसानों की खरीद-बिक्री करने वाले एडवर्ड कोलस्टन की मूर्ति को प्रदर्शनकारियों ने ना सिर्फ गिराया बल्कि उसे पैर से ठोकर मार-मारकर नदी में गिरा दिया था. प्रदर्शनकारियों ने महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला की मूर्ति को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई.

    Tags: England, Statue vandalism

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