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भारतीय मूल के संजीव सहोता की किताब ‘चाइना रूम’ बुकर पुरस्कार के दावेदारों में शामिल

भारतीय मूल के संजीव सहोता (Sanjeev Sahota) उन 13 लेखकों में शामिल है, जिनकी किताब ‘चाइना रूम’ को इस साल बुकर पुरस्कार (booker prize) के दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है.

भारतीय मूल के संजीव सहोता (Sanjeev Sahota) उन 13 लेखकों में शामिल है, जिनकी किताब ‘चाइना रूम’ को इस साल बुकर पुरस्कार (booker prize) के दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है.

भारतीय मूल के संजीव सहोता (Sanjeev Sahota) उन 13 लेखकों में शामिल है, जिनकी किताब ‘चाइना रूम’ को इस साल बुकर पुरस्कार (booker prize) के दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है.

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    लंदन. भारतीय मूल के ब्रितानी उपन्यासकार संजीव सहोता (Sanjeev Sahota) उन 13 लेखकों में शामिल है, जिनकी किताब ‘चाइना रूम’ को इस साल बुकर पुरस्कार के दावेदारों की सूची में शामिल किया गया है. 40 वर्षीय सहोता के दादा-दादी 1960 के दशक में पंजाब से यहां आ गए थे. सहोता ने पहले भी 'द ईयर ऑफ द रनवेज' के लिए 2015 के बुकर पुरस्कार के दावेदारों में जगह बनाई थी और उन्हें 2017 में साहित्य के लिए यूरोपीय संघ पुरस्कार मिला थ. उनके उपन्यास 'चाइना रूम' को ब्रिटेन या आयरलैंड में अक्टूबर 2020 और सितंबर 2021 के बीच प्रकाशित 158 उपन्यासों में से चुना गया. अंग्रेजी में लिखे गए और ब्रिटेन या आयरलैंड में प्रकाशित पुस्तक के लिए किसी भी राष्ट्रीयता का लेखक इस पुरस्कार को जीतने का पात्र है.

    बुकर पुरस्कार के चयनमंडल ने कहा, 'चाइना रूम ने दो काल और दो महाद्वीपों को एक साथ बुनते हुए प्रवासी अनुभव पर आधारित कहानी के एक शानदार मोड़ के साथ हमें प्रभावित किया.' सहोता के अलावा नोबेल पुरस्कार विजेता जापानी लेखक काजुओ इशिगुरो और पुलित्जर पुरस्कार विजेता रिचर्ड पॉवर्स प्रतिष्ठित बुकर पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं.

    इशिगुरो को पुरस्कार के लिए चौथी बार नामित किया
    साल 2017 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार जीत चुके ब्रिटेन के इशिगुरो प्रेम एवं मानवता पर आधारित उपन्यास ‘क्लारा एंड द सन' के लिए 50,000 पाउंड के बुकर पुरस्कार के लिए मंगलवार को घोषित दावेदारों की लंबी सूची में जगह बनाने में कामयाब रहे. इशिगुरो को इस पुरस्कार के लिए चौथी बार नामित किया गया है. उन्हें इससे पहले ‘द रीमेन्स ऑफ दि डे’ के लिए 1989 में इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. अमेरिकी लेखक पॉवर्स को ‘बिविल्डर्मेंट’ के लिए नामित किया गया है. पॉवर्स ने 2019 में ‘द ओवरस्टोरी’ के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता था और इस पुस्तक ने बुकर पुरस्कार के अंतिम दावेदारों में भी जगह बनाई थी.

    इस साल की सूची में दक्षिण अफ्रीका के डैमोन गैलगट का उपन्यास ‘द प्रॉमिस’, कनाडाई लेखक मैरी लॉसन का ‘ए टाउन कॉल्ड सोलेस’ जगह मिली है. बुकर पुरस्कार की शुरुआत 1969 में की गई थी. इनके अलावा अमेरिकी पैट्रीशिया लॉकवुड को ‘नो वन इज टॉकिंग अबाउट दिस’ और उनके हमवतन नाथन हैरिस को ‘द स्वीटनेस ऑफ वॉटर’ के लिए सूची में जगह मिली है. सूची में अमेरिकी लेखक मैगी शिपस्टेड की ‘ग्रेट सर्कल’, ब्रितानी उपन्यासकार फ्रांसिस स्पफर्ड की ‘लाइट परपेचुअल’, ब्रितानी/सोमालियाई लेखक नादिफा मोहम्मद की ‘द फॉर्च्यून मेन’, ब्रितानी/कनाडाई लेखक रशेल कस्क की ‘सेकंड प्लेस’, दक्षिण अफ्रीकी उपन्यासकार कारेन जेनिंग्स की ‘एन आइलैंड’ और श्रीलंकाई लेखक अनुक अरुदप्रगसम की‘ए पैसेज नॉर्थ’ भी शामिल है.

    सूची में अंतिम छह में जगह बनाने वाली किताबों की घोषणा 14 सितंबर को की जाएगी और विजेता को तीन नवंबर को लंदन में एक समारोह के दौरान पुरस्कृत किया जाएगा. इससे पहले, 2020 का बुकर पुरस्कार स्कॉटिश-अमेरिकी डगलस स्टुअर्ट ने अपने पहले उपन्यास 'शुगी बैन' के लिए जीता था.

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